सोनिया गांधी की किताब ‘Belonging’ के छपने से पहले मचा बवाल! Penguin India ने क्यों किया किनारा?

न्यूज तक डेस्क

• 09:32 AM • 29 Aug 2026

सोनिया गांधी की नई किताब ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ रिलीज से पहले चर्चा में है. पेंगुइन इंडिया ने मैनुस्क्रिप्ट में बदलाव को लेकर प्रोजेक्ट से दूरी बनाई है. किताब अमेरिका में प्रकाशित होगी. 544 पन्नों की इस किताब में सोनिया गांधी अपनी जिंदगी, राजीव गांधी से प्रेम, शादी और राजनीति से जुड़े कई अनुभव साझा करेंगी.

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कांग्रेस की सीनियर लीडर सोनिया गांधी की किताब छपने से पहले ही चर्चा में आ गई है. किताब का नाम है 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव'. पहले खबर यह थी कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया इसे छाप रहा है. लेकिन अब बड़ी खबर यह आई है कि पेंगुइन इंडिया ने इसे छापने से इंकार कर दिया है. जानकारी के मुताबिक पब्लिशर और किताब की लेखिका के बीच मैनुस्क्रिप्ट के कुछ हिस्सों को लेकर सहमति नहीं बन पाई.

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मैनुस्क्रिप्ट के कुछ हिस्सों पर नहीं बनी सहमति

सूत्रों के मुताबिक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने किताब के एक हिस्से में कुछ बदलाव और कुछ कंटेंट हटाने का सुझाव दिया था. सोनिया गांधी ने इन बदलावों को स्वीकार नहीं किया. इसके बाद पेंगुइन इंडिया इस प्रोजेक्ट से अलग हो गया. लेकिन इस बीच चौंकाने वाली खबर यह आई है कि अमेरिका में इसे अल्फ्रेड ए. नोपफ प्रकाशित करेगा, जो पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का ही हिस्सा है.

साथ ही खबर यह भी है कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के इस प्रोजेक्ट से बाहर होने के बाद अब कई भारतीय प्रकाशक सोनिया गांधी की किताब को प्रकाशित करने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि अभी किसी के साथ ऐसी डील की फिलहाल कोई खबर नहीं है.

राजनीतिक दबाव की चर्चा तेज

इस खबर के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा यह है कि राजनीतिक दबाव की वजह से पेंगुइन इंडिया इसे नहीं छाप रहा है. किताब को 10 नवंबर को प्रकाशित किए जाने की खबर पहले ही आ चुकी है. लेकिन 10 नवंबर को वर्ल्ड वाइड रिलीज से पहले ही बुक शेल्फ से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तेज हलचल मची है.

हर कोई यह जानने को बेताब है कि 544 पन्नों की इस किताब में 2004 के अंतरात्मा की आवाज वाले पीएम पद के फैसले से लेकर राजनीति के कौन-कौन से बंद राज खुलने वाले हैं. किताब में सोनिया गांधी अपनी जिंदगी के वह राज खोलने वाली हैं, जो पिछले कई दशकों से देश की सबसे सुरक्षित तिजोरी में बंद थे.

बुक का टाइटल ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ ने और ज्यादा उत्सुकता पैदा की है. पहली बार खुद सोनिया गांधी फर्स्ट पर्सन में सुनाने वाली हैं अपनी लव स्टोरी, जिसकी नींव पड़ी थी इंग्लैंड में आज से करीब 60 साल पहले.

राजीव गांधी और सोनिया की प्रेम कहानी फिर चर्चा में

किताब के आने की चर्चा ने चर्चित बना दिया है दो लव बर्ड्स राजीव गांधी और सोनिया गांधी को. सोनिया गांधी की नई किताब आने से पहले पुष्ट सोर्सेज और करीबियों के हवाले से आई राजीव-सोनिया की मोहब्बत की वो अनसुनी कहानियां, जो किसी बॉलीवुड की सुपरहिट रोमांटिक फिल्म की स्क्रिप्ट को भी पीछे छोड़ दें.

लंदन से शादी तक की कहानी

राजीव गांधी और सोनिया के लंदन में मिलने, प्यार बढ़ने, शादी होने तक की बहुत सारी कहानियां किताबों, इंटरव्यू से सुनी-सुनाई जा चुकी हैं. अब तक हम जो भी जानते हैं, उसका आधार यही सब है. किस्से-कहानियां कितनी सच्ची थीं, यह तो सिर्फ और सिर्फ सोनिया गांधी बता सकती हैं और वह अब बताने जा रही हैं अपनी कलम से अपनी कहानी.

‘बिलॉन्गिंग’ से पहले कैंब्रिज की वो दास्तान

उससे पहले देखिए चर्चित चेहरा में ‘बिलॉन्गिंग’. किताब से पहले कैंब्रिज की वो दास्तान. सोनिया गांधी ने पति की याद में पहली किताब ‘राजीव’ 1992 में राजीव गांधी की हत्या के ठीक एक साल बाद लिखी थी, जिसे वाइकिंग पेंगुइन ने छापा था.

टिश्यू पेपर पर लिखी कविता का किस्सा

सोनिया गांधी ने खुद पहली बार उस ऐतिहासिक टिश्यू पेपर वाले किस्से का खुलासा किया था, जहां राजीव ने कैंब्रिज के वर्सिटी रेस्टोरेंट में पहली मुलाकात के दौरान उनके लिए नैपकिन पर एक खूबसूरत कविता लिखी थी.

उस किताब में सोनिया ने अपने हंसते-खेलते परिवार में आए खौफ, इंदिरा गांधी की हत्या के बाद अस्पताल के गलियारे में राजनीति में जाने से राजीव को रोकने की बेबसी और अंततः नियति के हाथों अपने प्यार को खोने के गहरे दर्द को बेहद ईमानदारी से बयां किया था.

1965 में शुरू हुई प्रेम कहानी

यह कहानी शुरू होती है साल 1965 के इंग्लैंड से, जहां कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाती और इंदिरा गांधी के बड़े बेटे राजीव गांधी मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे.

उसी दौर में इटली के ओरबासानो शहर से आई 18 साल की सोनिया मैनो वहां के एक छोटे से लैंग्वेज स्कूल में अंग्रेजी सीख रही थी.

ग्रीक रेस्टोरेंट में पहली मुलाकात

सोनिया को अंग्रेजी खाना बिल्कुल रास नहीं आता था. इसलिए वह अक्सर कैंब्रिज के किंग स्ट्रीट पर स्थित वर्सिटी नाम के एक मशहूर ग्रीक रेस्टोरेंट में इटालियन पास्ता और सलाद खाने जाया करती थीं.

इसी रेस्टोरेंट की धुंधली रोशनी में एक दोपहर राजीव गांधी ने सोनिया को पहली बार देखा और देखते ही लव एट फर्स्ट साइट वाला सीन हो गया.

प्यार से शादी तक आसान नहीं था सफर

कैंब्रिज में प्यार तो हुआ, जिसे शादी तक ले जाना था. तब दोनों का असली इम्तिहान शुरू हुआ. सोनिया गांधी के पिता स्टेफानो मैनो इटली के ओरबासानो शहर में बिल्डिंग कॉन्ट्रैक्टर थे. जब उन्हें पता चला कि उनकी बेटी भारत के एक बड़े राजनीतिक परिवार के लड़के से प्यार करती है, तो वह इस रिश्ते के सख्त खिलाफ हो गए.

उनके विरोध की वजह राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक थी. वह नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी इटली से हजारों मील दूर एक ऐसे देश में जाकर रहे, जिसकी भाषा, पहनावा और संस्कृति उनके लिए बिल्कुल अनजान थी. स्टेफानो को डर था कि सोनिया वहां के माहौल में कभी ढल नहीं पाएंगी.

25 फरवरी 1968 को हुई शादी

आखिरकार वह दिन भी आया, जब इस अनोखी प्रेम कहानी को उसकी मंजिल मिली. 25 फरवरी 1968 को नई दिल्ली के एक सफदरजंग रोड प्रधानमंत्री के घर के बैक लॉन में राजीव और सोनिया की शादी सादगी से हुई. सिर्फ परिवार के लोग और बेहद करीबी दोस्त ही शामिल हुए थे.

सोनिया गांधी ने इस खास मौके पर गुलाबी रंग की खादी की साड़ी पहनी थी, जिसे खुद जवाहरलाल नेहरू ने जेल में रहते हुए काटा था और जिसे पहनकर कभी इंदिरा गांधी की भी शादी हुई थी. शादी की रस्में कश्मीरी पंडितों के रीति-रिवाजों के अनुसार हुईं और सोनिया मैनो हमेशा-हमेशा के लिए सोनिया गांधी बन गईं.

राजनीति में नहीं आना चाहती थीं सोनिया गांधी

सबसे बड़ा और अनसुना राज यह है कि सोनिया गांधी कभी राजनीति में नहीं आना चाहती थीं. इस बात को लेकर इंदिरा गांधी और सोनिया के बीच एक मूक सहमति, सीक्रेट अंडरस्टैंडिंग थी. इंदिरा जानती थीं कि राजनीति का रास्ता कितना कांटों भरा है. इसलिए उन्होंने खुद राजीव और सोनिया को राजनीतिक बैठकों से दूर रखा.

राजीव गांधी जब इंडियन एयरलाइंस में पायलट के तौर पर काम करते थे और सोनिया घर संभालती थीं. देखना होगा कि सोनिया गांधी की इस किताब में और किन राजों से पर्दा उठता है.