South India Lok Sabha Seat Delimitation:देश में लोकसभा सीटों के परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर जारी बहस के बीच केंद्र सरकार ने दक्षिण भारत के राज्यों से जुड़े सभी भ्रम दूर करने की कोशिश की है. संसद में इस मुद्दे पर विस्तार से बात रखते हुए बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा कि किसी भी दक्षिण भारतीय राज्य को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा.
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किसी भी राज्य का नहीं होगा नुकसान
सांसद तेजस्वी सूर्या ने सदन में जानकारी दी नरेंद्र मोदी सरकार ने दक्षिण भारत के हर राज्य के हितों का पूरा ध्यान रखा है. उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा फैलाया जा रहा यह डर निराधार है कि परिसीमन से दक्षिण भारत की राजनीतिक ताकत कम होगी. सरकार की योजना के अनुसार, सीटों का बंटवारा इस तरह किया जा रहा है कि किसी भी राज्य की हिस्सेदारी प्रभावित न हो.
राज्यों के अनुसार सीटों का संभावित आंकड़ा:
तेजस्वी सूर्या ने सदन में स्पष्ट किया कि अगर 2011 की जनगणना या नई जनगणना को आधार बनाया जाता तो दक्षिण भारत को नुकसान होता, लेकिन सरकार की वर्तमान योजना से दक्षिण को कोई नुकसान नहीं होगा.
केरल: वर्तमान में केरल की 20 सीटें हैं. यदि 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन होता तो यह घटकर केवल 14 रह जातीं. लेकिन सरकार के नए फॉर्मूले से केरल की सीटें बढ़कर 30 होने जा रही हैं.
तमिलनाडु: यहां वर्तमान में 39 सीटें हैं. 2011 की जनगणना के आधार पर यह केवल 49 ही हो पाती, लेकिन सरकार ने इसे 59 करने का प्रस्ताव रखा है.
आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश के खाते में भी सीटों का इजाफा होगा और इसे 37 सीटें मिलने की उम्मीद है.
23% की हिस्सेदारी रहेगी बरकरार
सरकार के मुताबिक, नए परिसीमन के बाद भी संसद में दक्षिण भारत के राज्यों का कुल अनुपात 23.9 प्रतिशत ही बना रहेगा, जो कि वर्तमान में भी है. तेजस्वी सूर्या ने कहा कि हर राज्य में सीटों को करीब 50 फीसदी बढ़ाने का फैसला ऐतिहासिक है और यह सभी के साथ न्याय सुनिश्चित करेगा.
सदन में चर्चा के दौरान तेजस्वी सूर्या ने विपक्षी दलों के विरोध पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कुछ लोग केवल विरोध के लिए भ्रम फैला रहे हैं और अलगाववाद की भाषा बोल रहे हैं.
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