साल 2026 में तमिनलाडु में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. भले ही अभी तक चुनाव की तारीखों को लेकर कोई घोषणा नहीं हुई है लेकिन राज्य का राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुंच गया है. तमिलनाडु की बात करें तो राज्य में कुल 234 विधानसभा सीटें है और मुख्य रूप से दो गठबंधन DMK+ और AIDMK+ के बीच सत्ता की लड़ाई होती थी. लेकिन इस बार एक तीसरा मोर्चा विजय थलापति की भी खूब चर्चा हो रही है कि आखिर इस बार वो क्या कमाल कर सकते है या फिर उनका बिहार में प्रशांत किशोर जैसा हाल हो जाएगा. इसी बीच Vote Vibe का ताजा सर्वे सामने आया है, जिसके नतीजे बेहद चौंकाने वाले है. आइए विस्तार से जानते हैं तमिनलाडु की जनता का क्या है मूड?
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सीएम के लिए पसंदीदा चेहरा कौन?
इस सर्वे में तमिनलाडु की जनता से कई तरह के सवाल किए गए है. इन्हीं में से एक सवाल था कि आप तमिलनाडु का सीएम(मुख्यमंत्री) किसे देखना चाहते है? इसके जवाब में 33.3% लोगों ने DMK+ के एम. के. स्टालिन को अपनी पहली पसंद बताई है. वहीं 29.8% लोगों ने AIDMK+ के पलानी स्वामी(EPS) को पसंदीदा सीएम चेहरा बताया. वहीं विजय थलापति के पक्ष में 23.2% लोग दिखें, जो उन्हें तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनाना चाहते है. तो इस सर्वे के मुताबिक स्टालिन अभी भी पहली पोजिशन पर है.
जनता किसे देगी वोट?
जब जनता से पूछा गया कि आगामी विधानसभा चुनाव में आप किस गठबंधन/पार्टी को वोट देंगी तो उन्होंने चौंकाने वाला जवाब दिया. DMK+ गठबंधन को 35.8% लोगों ने समर्थन देने की बात कही. वहीं AIDMK+ गठबंधन को सिर्फ 2 फीसदी कम यानी 33.8% लोगों ने समर्थन देने की बात कही है. इसके अलावा विजय थलापति की पार्टी TVK को 19.2% लोगों ने वोट देने की बात बताई है.
चुनाव में विजय की क्या होगी भूमिका?
जनता से एक और अहम सवाल किया गया कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय थलापति की क्या भूमिका होगी? इस सवाल के जवाब में सबसे ज्यादा 31.4 फीसदी लोगों ने कहा कि उनका PK जैसा हाल होगा. इसके अलावा 22.1% ने विजय को वोटकटवा, 17.8% सरकार बनाने के पक्ष में और 7.8% लोग किंगमेकर की भूमिका में मानते है.
पीके जैसा हाल का क्या है मतलब?
अब एक सवाल आता है कि विजय थलापति के लिए जो कहा जा रहा है कि उनकी हालात बिहार में प्रशांत किशोर जैसी हो जाएगी, तो इसका मतलब क्या है? तो दरअसल नवंबर 2025 में बिहार में विधानसभा चुनाव हुए थे, जिसमें राजनीतिक जानकार से खुद राजनेता बने प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज मैदान में उतरी थी. चुनाव से पहले कहा जा रहा था कि प्रशांत किशोर या तो खुद की दम पर सरकार बनाएंगे या फिर किंगमेकर की भूमिका में रहेंगे. लेकिन परिणाम इसके उलट आए और प्रशांत किशोर की पार्टी चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाई.
एंटी इनकंबेंसी माहौल पर जनता की राय
जब जनता से पूछा गया कि, ट्रेंड के हिसाब से सरकार बदलने का कितना चांस है? इस सवाल के जवाब में 58% लोगों का कहना है कि पूरा चांस है, वहीं 21% लोगों का कहना है कि चांस ही नहीं है. यानी की ज्यादातर लोगों का कहना है कि सरकार बदल जाएगी.
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