Shesh Bharat: तमिलनाडु की सत्ता संभालते ही नए मुख्यमंत्री और 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है. मुख्यमंत्री विजय ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन 'लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम' (LTTE) के मारे गए प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरन को खुलेआम श्रद्धांजलि दी है.
ADVERTISEMENT
मुल्लीवाइक्कल नरसंहार की बरसी पर प्रभाकरन को याद करते हुए सीएम विजय ने कहा कि वे मुल्लीवाइक्कल की यादों को हमेशा अपने दिलों में सहेजकर रखेंगे. इसके साथ ही उन्होंने समंदर पार रहने वाले तमिल भाई-बहनों के अधिकारों के लिए एकजुट रहने का संकल्प भी दोहराया. विजय के इस बयान के बाद दिल्ली से लेकर चेन्नई तक की सियासत गर्मा गई है.
राजीव गांधी हत्याकांड का जख्म हुआ हरा
वेलुपिल्लई प्रभाकरन भारत के लिए कोई साधारण नाम नहीं है, बल्कि वह देश के सबसे बड़े घाव का मास्टरमाइंड था. श्रीलंका में तमिलों के लिए अलग देश की मांग को लेकर प्रभाकरन ने 1976 में एलटीटीई का गठन किया था. उसने दुनिया को 'सुसाइड बॉम्बर' (आत्मघाती हमलावर) जैसा खतरनाक हथियार दिया था.
साल 1987 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने श्रीलंका में शांति सेना भेजी थी, जिससे प्रभाकरन भारत से नाराज था. इसके बाद 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी रैली के दौरान एलटीटीई की आत्मघाती हमलावर धनु ने खुद को बम से उड़ा लिया, जिसमें राजीव गांधी की मौत हो गई. तब से आज तक भारत में एलटीटीई एक प्रतिबंधित संगठन है.
कानूनी शिकंजे से हमेशा दूर रहा प्रभाकरन
राजीव गांधी हत्याकांड में प्रभाकरन को मुख्य साजिशकर्ता (मास्टरमाइंड) बनाया गया था. भारत की टाडा अदालत ने उसकी गैर-मौजूदगी में उसे फांसी की सजा भी सुनाई थी. हालांकि, श्रीलंका में गृहयुद्ध चलने के कारण उसे कभी भारत प्रत्यर्पित नहीं किया जा सका.
राजीव गांधी की हत्या के 18 साल बाद, 18 मई 2009 को श्रीलंकाई सेना ने मुल्लीवाइक्कल मिलिट्री ऑपरेशन में प्रभाकरन को मार गिराया था. श्रीलंका सरकार से उसकी मौत की पुष्टि होने के बाद, अक्टूबर 2010 में चेन्नई की अदालत ने उसके खिलाफ केस बंद कर दिया था. इस मामले के अन्य दोषियों जैसे नलिनी और पेरारिवलन को सुप्रीम कोर्ट ने साल 2022 में रिहा कर दिया था.
राहुल गांधी की चुप्पी पर BJP हमलावर
दिलचस्प बात यह है कि सीएम विजय तमिलनाडु में कांग्रेस के समर्थन से ही सरकार चला रहे हैं. राहुल गांधी उनके न सिर्फ गठबंधन सहयोगी हैं, बल्कि पुराने मित्र भी हैं. इस पूरे विवाद पर राहुल गांधी और कांग्रेस हाईकमान ने अब तक कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन तमिलनाडु से कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इसका कड़ा विरोध किया है. उन्होंने साफ कहा कि प्रभाकरन का महिमामंडन कांग्रेस को किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है.
दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस मुद्दे को लेकर राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है. बीजेपी का आरोप है कि राहुल गांधी सत्ता के लालच और अपने गठबंधन को बचाने के लिए इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि उनके साथी दल के नेता उनके ही पिता के हत्यारे की तारीफ कर रहे हैं.
क्यों विजय खेल रहे हैं 'कट्टर तमिल राष्ट्रवाद' का कार्ड?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सीएम विजय का यह बयान कोई गलती नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. तमिलनाडु की सत्ता में पूरी तरह पैर जमाने के लिए वे 'कट्टर तमिल राष्ट्रवाद' (Tamil Nationalism) का सहारा ले रहे हैं. राज्य में द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) जैसे स्थापित दलों को टक्कर देने के लिए विजय उस तमिल सेंटिमेंट को अपनी तरफ खींचना चाहते हैं, जो श्रीलंका में तमिलों पर हुए अत्याचारों को लेकर संवेदनशील है.
मई 2009 में मुल्लीवाइक्कल में जब श्रीलंकाई सेना ने प्रभाकरन को घेरा था, तब वहां भारी गोलाबारी में 40 हजार से ज्यादा बेगुनाह तमिल नागरिक मारे गए थे. विजय इसी दर्द को राजनीतिक हथियार बना रहे हैं. कानूनी तौर पर भले ही प्रभाकरन का चैप्टर बंद हो चुका हो, लेकिन तमिलनाडु की राजनीति में उसका नाम आज भी एक संवेदनशील बारूद की तरह है, जिस पर विजय अपनी सियासी गोटियां सेट कर रहे हैं.
ADVERTISEMENT


