तमिलनाडु की राजनीति में सुपरस्टार थलापति विजय की एंट्री ने चुनावी बिसात को पूरी तरह बदल दिया है. अपनी पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) का मेनिफेस्टो जारी करते हुए विजय ने ऐसे वादे किए हैं, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है. विजय ने सीधे तौर पर महिलाओं और गरीबों के हितों पर निशाना साधा है. उनके मेनिफेस्टो में सबसे अधिक चर्चा 'सोने' के वादों की हो रही है, जिसे विरोधी 'फ्रीबी' बता रहे हैं, तो वहीं फैंस इसे एक 'गोल्डन ऑपर्च्युनिटी' मान रहे हैं.
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विजय का बड़ा मास्टरस्ट्रोक
विजय ने महिलाओं का दिल जीतने के लिए दो बेहद लुभावनी योजनाओं का ऐलान किया है. पहली है 'अन्नन सीर योजना', जिसके तहत 5 लाख रुपये से कम आय वाले परिवारों की दुल्हनों को उनकी शादी पर 8 ग्राम सोना और एक रेशमी साड़ी दी जाएगी.
दूसरी योजना है 'थाईमामन थंगा मोधिरम', जिसमें हर नवजात शिशु को सोने की अंगूठी और एक 'बेबी वेलकम किट' देने का वादा किया गया है. इसके अलावा, 60 वर्ष से कम उम्र की महिला मुखिया को हर महीने ₹2,500 की नकद सहायता भी दी जाएगी.
जयललिता और करुणानिधि की विरासत को चुनौती
तमिलनाडु में मुफ्त उपहारों की राजनीति कोई नई बात नहीं है. पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता ने भी शादी के लिए सोना देने की योजना से महिलाओं के बीच अपनी 'अम्मा' वाली छवि मजबूत की थी. विजय ने इसी पुराने द्रविड़ फॉर्मूले को नए अंदाज में पेश किया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि नवजात बच्चों को सोने की अंगूठी देने का वादा करके विजय ने जयललिता और करुणानिधि दोनों की विरासत को बड़ी चुनौती दी है. हालांकि, इन योजनाओं को लागू करना आसान नहीं होगा. केवल शादी के सोने के लिए सरकार को सालाना करीब ₹800 करोड़ से ₹1,000 करोड़ के अतिरिक्त बजट की जरूरत होगी.
युवाओं के लिए भविष्य की योजना और 'जीरो ड्रॉपआउट' का लक्ष्य
विजय का दूसरा बड़ा फोकस युवाओं पर है. उन्होंने 29 साल से अधिक उम्र के ग्रेजुएट बेरोजगारों को ₹4,000 और डिप्लोमा धारकों को ₹2,500 मासिक भत्ता देने का वादा किया है. साथ ही, हायर एजुकेशन के लिए बिना गारंटी ₹20 लाख तक का लोन देने की बात कही गई है.
शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकारी स्कूल के बच्चों की माताओं को सालाना ₹15,000 देने का वादा किया गया है, ताकि गरीबी के कारण बच्चे स्कूल न छोड़ें.
2026 का चुनावी समीकरण, किंग बनेंगे या स्पॉइलर?
विजय ने किसी भी बड़े दल (DMK, AIADMK या BJP) के साथ गठबंधन न करने का साहसी फैसला लिया है. वे सभी 234 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रहे हैं. विजय की यह रणनीति स्थापित राजनीतिक दलों के लिए खतरे की घंटी है.
जानकारों का कहना है कि विजय का वोट शेयर सीधे तौर पर डीएमके और एआईएडीएमके के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकता है. अब देखना यह होगा कि 2026 के विधानसभा चुनावों में विजय 'किंग' बनकर उभरते हैं या फिर अन्य दलों का खेल बिगाड़ने वाले 'स्पॉइलर' साबित होते हैं.
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