Shesh Bharat: विजय ने अचानक क्यों बदली रणनीति? चुनाव आयोग के खिलाफ उतरने के पीछे क्या है सियासी गणित

रूपक प्रियदर्शी

• 11:27 AM • 16 Oct 2026

तमिलनाडु की राजनीति में थलपति विजय की TVK ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन में हिस्सा लिया. इसे कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के साथ विजय की बढ़ती नजदीकी के तौर पर देखा जा रहा है. स्टालिन के समर्थन और राहुल गांधी से मुलाकात के बीच अब विजय के अगले राजनीतिक कदम पर नजरें हैं.

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दक्षिण भारत में तमिलनाडु ही ऐसा राज्य है, जहां राजनीति और राजनीतिक समीकरणों का बदलना थम नहीं रहा है. मई में थलपति विजय जब जीते, तो यह साफ था कि वह बीजेपी के साथ किसी दोस्ती के मूड में नहीं हैं. जब उन्होंने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई, तब यह साफ हो गया कि विजय को बीजेपी से बैर और राहुल गांधी से दोस्ती रखने में राजनीतिक फायदा दिख रहा है. बीच में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद आया. इसी में विजय कई महीने से फंसे थे, लेकिन अब उन्होंने डेयरिंग फैसला लेकर खुलकर चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ TVK को उतार दिया.

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राहुल गांधी के समर्थन में चेन्नई में विपक्ष एकजुट

जब दिल्ली में राहुल गांधी ने पूरे विपक्ष को चुनाव आयोग के खिलाफ सड़क पर ला दिया, तब चेन्नई में कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने विपक्ष को एकजुट किया. वह वाला विपक्ष नहीं, जो विजय के खिलाफ है. उन्होंने उस विपक्ष को साथ लेकर प्रदर्शन निकाला है, जो राहुल गांधी को मानता है. काफी इंतजार तो था, लेकिन विजय ने बिना कोई इवेंट बनाए चेन्नई में TVK को इंडिया अलायंस का हिस्सा बना दिया. यह सब राहुल गांधी के चेन्नई दौरे के आसपास हुआ.

चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन में पहली बार उतरी TVK

इंडिया ब्लॉक के साथ औपचारिक रूप से दिखने के लिए एक मौके की तलाश थी. जब मणिक्कम टैगोर ने चेन्नई में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन की योजना बनाई, तो TVK के लोग पहली बार इंडिया ब्लॉक के मंच से सड़क पर उतरे. TVK पहली बार मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ 'लोकतंत्र बचाओ' आंदोलन के तहत सड़कों पर उतरी. चेन्नई में हुए विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस सांसद बी. मणिकम टैगोर ने किया. इसमें TVK के अलावा कांग्रेस, VCK, MDMK (वाइको), CPI, CPM, CPI-ML और IUML भी शामिल हुए.

कांग्रेस-टीवीके की नजदीकी से तमिलनाडु की राजनीति में हलचल

चेन्नई के एग्मोर में कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA ब्लॉक के मंच पर TVK सरकार के मंत्री ए. राजमोहन की मौजूदगी सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि तमिलनाडु की सत्ता में बड़े भूचाल का सीधा संकेत बनी है. चेन्नई में हुआ यह प्रदर्शन सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि तमिलनाडु में DMK के एकाधिकार को चुनौती देने और कांग्रेस-TVK के नए 'सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री एलायंस' के शक्ति प्रदर्शन का पहला ट्रेलर है.

वैसे भी TVK को सड़क पर उतरने का ज्यादा अनुभव नहीं है. अभिनेत्री तृषा को लेकर हुए कुछ विरोध प्रदर्शनों को छोड़कर TVK ने कभी कोई विरोध प्रदर्शन नहीं किया. विजय के सत्ता में रहने से इसकी ज्यादा संभावना भी नहीं बनती.

चुनाव आयोग के खिलाफ उतरना विजय के लिए क्यों था धर्मसंकट?

विजय की समस्या यह है कि जिस चुनाव आयोग पर इतने सवाल खड़े हुए हैं, उसी के रहते तमिलनाडु में उनकी पार्टी की धमाकेदार जीत हुई है. राजनीति में टाइमिंग ही सब कुछ होती है और विजय के सामने सबसे बड़ा 'धर्मसंकट' भी यही टाइमिंग थी. TVK के विरोधी यह सवाल उठा रहे थे कि जिस चुनाव आयोग के रहते विजय विधानसभा चुनाव और उपचुनावों में बंपर जीत हासिल कर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे, आज उसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वह कैसे कर सकते हैं? यही वजह थी कि TVK शुरुआत में दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों से थोड़ी दूरी बनाए हुए थी. लेकिन जब बात वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों और मतदाताओं के नाम काटने (SIR विवाद) की आई, तो अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए विजय को भी यह कड़ा फैसला लेना पड़ा.

स्टालिन के समर्थन से विजय पर बढ़ा राजनीतिक दबाव

इस कहानी का एक और बेहद रोमांचक मोड़ पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन का दांव है. DMK ने भले ही कांग्रेस से मतभेदों के चलते खुद को चेन्नई के इस प्रदर्शन से अलग कर लिया हो, लेकिन स्टालिन ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले मुख्य चुनाव आयुक्त विरोधी प्रदर्शन को बाहर से खुला समर्थन दे दिया. स्टालिन के इस 'स्मार्ट मूव' ने मुख्यमंत्री विजय पर चौतरफा राजनीतिक दबाव बना दिया. संदेश साफ था अगर स्टालिन जैसा पुराना नेता संसद से लेकर सड़क तक आयोग को घेर रहा है, तो कांग्रेस के साथ नई-नई गठबंधन सरकार में आए विजय पीछे कैसे रह सकते हैं? इसी दबाव का नतीजा रहा कि 3 अक्टूबर को गठबंधन में शामिल होने के बाद 15 अक्टूबर को TVK मैदान में आ गई.

राहुल गांधी और विजय की मुलाकात ने बढ़ाई सियासी चर्चा

कहते हैं कि सियासत के फैसले अक्सर लंच की मेज पर होते हैं. 10 अक्टूबर को चेन्नई के नीलंकरई में जब राहुल गांधी मुख्यमंत्री विजय के घर लंच पर पहुंचे, तो पूरे देश की निगाहें थम गईं. एक घंटे की बंद कमरे की बैठक के बाद दोनों नेता एक ही गाड़ी में बैठकर पलवक्कम के मशहूर कैफे में कॉफी, कुकीज और तिरामिसु का लुत्फ उठाने पहुंचे. जनता के साथ दोनों युवा नेताओं की ली गई ये 'सेल्फी' सिर्फ एक कैजुअल आउटिंग नहीं थी, बल्कि यह राहुल और विजय की उस मजबूत होती केमिस्ट्री का सबूत बनी, जिसने DMK को तमिलनाडु की राजनीति में अलग-थलग कर दिया है.

अब दिल्ली में INDIA ब्लॉक की बैठक में कब शामिल होंगे विजय?

चेन्नई की सड़कों पर मिली इस नई ऊर्जा के बाद अब सबकी नजरें देश की राजधानी पर टिकी हैं. चेन्नई की इस सफल साझा रैली के बाद अब सवाल है कि मुख्यमंत्री विजय कब दिल्ली में होने वाली INDIA ब्लॉक की किसी बड़ी बैठक में शामिल होने के लिए रवाना होंगे. राहुल और विजय चेन्नई-दिल्ली आते-जाते मिलते हैं, लेकिन विजय इंडिया ब्लॉक की किसी बैठक में शामिल नहीं हुए हैं. चूंकि वह बिना गाजे-बाजे के इंडिया ब्लॉक में आ चुके हैं, इसलिए अगला सवाल यही है कि विजय कब इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल होंगे.