Shesh Bharat: तमिलनाडु के चुनावों में सत्ता का सबसे बड़ा दावेदार तो डीएमके-कांग्रेस को ही माना जा रहा है. इसलिए भी कि वो सत्ता में हैं और इसलिए भी AIADMK-बीजेपी के लिए चुनाव आसान नहीं लेकिन कौन जीतेगा कौन हारेगा ये इस पर निर्भर माना जा रहा है कि एक्टर विजय का पॉलिटिकल डेब्यू कितना बड़ा हिट रहता है. विजय कुछ तो करेंगे, ये मानकर सबने स्ट्रैटजिक लाइन ली हुई है. इस बात की बड़ी चर्चा थी कि विजय और कांग्रेस मिलकर कोई बड़ा खेल कर सकते हैं. राहुल गांधी से पुरानी दोस्ती, डीएमके से विजय की लड़ाई और AIADMK को लेकर कोई इंटरेस्ट-ये सारे फैक्टर कैलकुलेट किए जा रहे थे लेकिन चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को लेकर विजय के स्टैंड से भगदड़ मच गई है.
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विजय ने तिरुनेलवेली रैली में कांग्रेस और DMK के गठबंधन पर कैश-बॉक्स अलायंस का हमला बोलकर धमाका कर दिया. हालांकि विजय ने हमला तो डीएमके पर बोला लेकिन ऐसा हमला जिससे कांग्रेस बच नहीं पाई. विजय ने आरोप लगा दिया है कि DMK ने तमिलनाडु कांग्रेस के नेताओं को करोड़ों रुपये देकर "खरीद" लिया है और उन्हें अपनी जेब में रखा हुआ है. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस अब एक स्वतंत्र ताकत नहीं रह गई है और केवल DMK के इशारों पर काम कर रही है.
'सच्चे कांग्रेसी TVK के साथ'
राजनीतिक गलियारे में ये सवाल है कि विजय और कांग्रेस एक-दूसरे के रास्ते में नहीं है. सिवाय इसके लिए कांग्रेस डीएमके की पुरानी अलायंस पार्टनर है. तमिलनाडु कांग्रेस का एक सेक्शन विजय के साथ अलायंस के फेवर में भी था. फिर भी विजय ने कांग्रेस को डीएमके के हाथों बिकी हुई पार्टी क्यों बोला. इसे ऐसे देखा जा रहा है कि विजय ने कोशिश की है कि अब तक जिस कांग्रेस समर्थकों को छू नहीं रहे थे उसे अपनी ओर लिया जाए. रैली में विजय ने एलान किया कि विजय ने दावा किया था कि "असली कांग्रेस" कार्यकर्ता उनके साथ हैं. विजय का सबसे बड़ा दांव ये है कि वो लोगों के मन में ये बात डाल दें कांग्रेस का नेतृत्व भले ही DMK के साथ हो, लेकिन कांग्रेस के सच्चे कार्यकर्ता और समर्थक उनकी पार्टी TVK के साथ हैं क्योंकि वे DMK के भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद से परेशान हैं.
तमिलनाडु में कांग्रेस और DMK का गठबंधन खुद को धर्मनिरपेक्षता का इकलौता चेहरा बताता है. विजय इसी छवि को तोड़ना चाहते हैं. वह कांग्रेस पर इसलिए हमला कर रहे हैं ताकि अल्पसंख्यकों और युवाओं को यह संदेश दे सकें कि धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिए अब एक नए और "साफ-सुथरे" विकल्प की जरूरत है, जो कांग्रेस अब नहीं रही. कांग्रेस तमिलनाडु में DMK की सबसे पुरानी और मजबूत सहयोगी है. विजय जानते हैं कि जब तक वह कांग्रेस की विश्वसनीयता को कम नहीं करेंगे, तब तक वह DMK के मजबूत किले में सेंध नहीं लगा पाएंगे. इसलिए वह कांग्रेस को "मजबूर" और "शक्तिहीन" सहयोगी के रूप में पेश कर रहे हैं. कांग्रेस ने विजय की इस चाल को समझ लिया है.
कांग्रेस का स्ट्राइक रहा है अच्छा
तमिलनाडु में अरसे से कांग्रेस डीएमके की जूनियर पार्टनर है. अपने दम पर ताकतवर नहीं डीएमके के लिए असरदार है. कांग्रेस ने DMK के साथ मिलकर राज्य की सभी 39 सीटों पर जीत दर्ज की थी. कांग्रेस ने अपने हिस्से की सभी 8 सीटें जीती. हालांकि, कांग्रेस का वोट शेयर गिरकर 10.67% रहा, जबकि BJP का बढ़कर 11.24% हो गया. 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 25 में से 18 सीटें जीती थीं, जो गठबंधन की जीत में मददगार बनी. पार्टी का दायरा सीमित है इसलिए विरोधियों के लिए सॉफ्ट टारगेट है. विजय कांग्रेस के यूथ और अल्पसंख्यक वोटों पर नजरें गड़ाए बैठे हैं.
DK की विजय को नसीहत
डीएमके के साथ चुनाव लड़ रही कांग्रेस ने भी तमिलनाडु की जनता के लिए अपने घोषणापत्र का पिटारा खोला. कर्नाटक से डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार आए. एमके स्टालिन के साथ रैली भी की और कांग्रेस का घोषणापत्र भी जारी किया. उनके कानों तक विजय के आरोप पहुंचे थे. हैरानी हुई जब डीके ने चेन्नई की प्रेस कॉन्फ्रेंस में विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) और उनके दावों की धज्जियां उड़ा दीं. शिवकुमार ने कह दिया कि विजय Immature Politician हैं, उनमें पॉलिटिकल
Maturity नहीं है. उन्होंने विजय को नसीहत देते हुए कहा कि आप लोगों को फिल्मों की तरह बेवकूफ नहीं बना सकते. फिल्मों वाले डायलॉग और स्टंट असली राजनीति में काम नहीं आते. शिवकुमार ने चुटकी लेते हुए कहा कि शायद विजय को लग रहा होगा कि उनके साथ तमिल मानिला कांग्रेस है, लेकिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) मजबूती से मुख्यमंत्री स्टालिन के साथ है.
तमिलनाडु कांग्रेस में माना जाता है कि एक सेक्शन विजय के साथ दिल से है. लोकल नेता विजय के पक्ष में बोलते भी हैं लेकिन डीके पहले ऐसे नेशनल कांग्रेस नेता बने जिन्होंने खुदकर विजय की बैंड बजाई. Immature Politician का ऐसा टैग है जिसे बर्दाश्त करना विजय के लिए मुश्किल होगा.
दुश्मन का दुश्मन दोस्त माना जाता है. जब विजय की फिल्म जननायकन अटकी तो माना गया कि बीजेपी ब्लैकमेल कर रही है. तब एमके स्टालिन और राहुल गांधी ने विजय के लिए आवाज उठाई थी. इसे माना गया कि स्टालिन तो नहीं लेकिन राहुल गांधी के साथ आगे विजय की कोई केमेस्ट्री बन सकती है लेकिन राहुल गांधी ने कतई इस भाईचारा को डीएमके के खिलाफ जाने नहीं दिया. विजय समर्थकों को क्लियर मैसेज दिया कि डीएमके के साथ अलायंस पर कोई सेकंड थॉट नहीं है. सीट शेयरिंग में भी कांग्रेस ने स्टालिन का अपर हैंड मान लिया.
फिर भी माना जा रहा था कि चुनाव के नतीजे आने के बाद जरूरत के हिसाब से कोई चीजें बदलें लेकिन विजय ने तो बड़ा स्टैंड ले लिया. कांग्रेस के वोट बैंक पर भी धावा बोल दिया. डीके ने विजय की काबिलियत पर सवाल उठाकर मतभेद की महीन लाइन को और चौड़ा कर दिया है.
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