राज्यसभा की राजनीति में शुक्रवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला. आम आदमी पार्टी (AAP) के 10 में से 7 सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है. इस बड़े बदलाव के बाद ऊपरी सदन यानी राज्यसभा में सत्ताधारी गठबंधन (NDA) की स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है. राघव चड्ढा समेत इन सांसदों के पाला बदलने से अब बीजेपी बहुमत के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंच गई है.
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बहुमत से सिर्फ एक वोट दूर
राज्यसभा में साधारण बहुमत के लिए 123 सांसदों की जरूरत होती है. इस विलय से पहले राज्यसभा में बीजेपी के पास 106 सांसद थे. अब 7 नए सदस्यों के जुड़ने के बाद पार्टी की अपनी व्यक्तिगत संख्या 113 हो जाएगी. बीजेपी के 113 सांसदों में यदि 7 नामांकित (Nominated) और 2 निर्दलीय सदस्यों का समर्थन जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा 122 तक पहुंच जाता है. यानी BJP साधारण बहुमत से सिर्फ 1 वोट पीछे है.
दो-तिहाई बहुमत अभी दूर
राज्यसभा की कुल 244 सीटें हैं. संविधान संशोधन जैसे बड़े कानून पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 163 सांसदों की जरूरत होती है. NDA अभी 145 पर है. मतलब अभी भी 18 सीटें कम हैं.
लोकसभा में भी NDA के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है. वहां यह आंकड़ा 363 है. यही वजह है कि महिला आरक्षण बिल जैसे बड़े कानून अब तक संसद में पास नहीं हो सके.
राघव चड्ढा ने दी जानकारी
राघव चड्ढा ने साफ किया है कि संविधान के नियमों के मुताबिक, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई या उससे अधिक सांसद दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं, तो इसे 'विलय' (Merger) माना जाता है. चूंकि आप के 10 में से 7 सांसद एक साथ आए हैं, इसलिए इन पर दलबदल कानून लागू नहीं होगा और इनकी सदस्यता सुरक्षित रहेगी. राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन की मंजूरी के बाद बीजेपी ने आधिकारिक तौर पर विलय की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
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