स्मृति ईरानी का पॉलिटिकल करियर करीब 20 साल का है. लोकसभा के 4 चुनाव लड़ीं. एक में जीतीं. चार में हारीं. चुनाव हारने के बाद कभी कुछ बिगड़ा नहीं बल्कि बड़ा फायदा होता रहा. 2014 से स्मृति ईरानी की राजनीति ऐसे चमकी कि आसमान पर पहुंच गई. बस 2024 का चुनाव नहीं हारना था. 2024 के चुनाव की हार भारी पड़ रही है. कैसे-कैसे अफवाहें उड़ रही हैं.
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2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने राहुल गांधी के खिलाफ स्मृति ईरानी को उतारा. स्मृति ईरानी चुनाव तो नहीं जीत पाईं लेकिन राहुल गांधी को कड़ी टक्कर देकर वायरल हो गईं. राजनीति एकदम से पीक पर पहुंच गई. बीजेपी के बड़े-बड़े नेता देखते रहे गए. स्मृति ईरानी की गिनती बीजेपी के टॉप नेताओं में होने लगी.
लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी मोदी ने सरकार में शिक्षा मंत्री बनाकर धमाका कर दिया. हालांकि डिग्री को लेकर इतना विवाद हुआ कि ज्यादा समय तक शिक्षा मंत्री नहीं रह पाईं. फिर भी मोदी ने मंत्रालय बदल-बदलकर 10 साल केबिनेट मंत्री बनाए रखा. 2014 से 2024 तक 10 साल स्मृति ईरानी की तूती बोलती रही. राहुल गांधी के खिलाफ बीजेपी की सबसे बड़ी असेट थीं स्मृति ईरानी.
2014 में हारते ही जैसे स्मृति ईरानी को 2019 का लोकसभा चुनाव का टिकट मिल गया था. अमेठी में डटी रहीं. 2019 में राहुल गांधी को हराकर धमाका किया भी. कांग्रेस और राहुल गांधी चुपचाप राहुल नाम से चमकती-दमकती स्मृति ईरानी की राजनीति को देखते रहे. 2024 में इसी को पंचर करने के लिए बड़ा प्लान बनाया.
2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से स्मृति ईरानी का टिकट कन्फर्म था. आखिर वक्त तक राहुल गांधी ने अमेठी आना कन्फर्म नहीं किया. स्मृति ईरानी तो अमेठी से लड़ीं लेकिन राहुल गांधी पड़ोस की रायबरेली सीट से लड़े. अमेठी में कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया कांग्रेस के एक सामान्य कार्यकर्ता किशोरी लाल शर्मा को.
अमेठी में ये कांग्रेस का ट्रैप था जिसमें स्मृति ईरानी और बीजेपी फंस गई. बड़ा खेल ये हुआ कि किशोरी लाल शर्मा ने स्मृति ईरानी को हरा दिया. किशोरी लाल कहां स्मृति ईरानी को हरा पाएंगे ? बीजेपी का यही कैलकुलेशन फेल हुआ. स्मृति ईरानी के लिए न तो कोई और सेफ सीट ढूंढी गई, न कोई प्लान बी बनाया. हारने के बाद स्मृति ईरानी को बीजेपी ने उनके हाल पर छोड़ दिया. न सरकार में मंत्री बनाई गईं. न राज्यसभा भेजने का तिकड़म लगाया, न पार्टी में कोई जिम्मेदारी मिली. स्मृति ईरानी की राजनीति फिलहाल एकदम चौपट हाल में है.
अब ये चर्चा जोर शोर से शुरू हुई कि एक्टिंग करियर से पॉलिटिक्स में आईं स्मृति ईरानी फिर एक्टिंग में कमबैक कर रही हैं. अटकलें लगाने वालों ने इतना तक कन्फर्म कर दिया कि टीवी के सबसे हिट सीरियल अनुपमा से स्मृति ईरानी टीवी में फिर एंट्री करेंगी. अमेठी से अनुपमा पहुंचाने वाली अटकलों को इसलिए मजबूती मिली कि अनुपमा फेम एक्ट्रेस रूपाली गांगुली ने सीरियल छोड़ दिया है. सीरियल में 15 साल का लीप आने वाला है. कई पुराने कलाकार सीरियल छोड़ चुके हैं.
प्रोड्यूसर अनुपमा के लिए किसी दमदार रिप्लेसमेंट की तलाश में हैं. जब मेनस्ट्रीम मीडिया में भी ये हेडलाइन चलनी शुरू हुई तब स्मृति ईरानी को चुप्पी तोड़नी पड़ी. उन्होंने अनुपमा में जाने या फिर एक्टिंग में कमबैक की हेडलाइन को फेक न्यूज कह दिया.
पॉलिटिक्स में आने से पहले स्मृति ईरानी टीवी की स्टार एक्ट्रेस थीं. क्योंकि सास भी कभी बहू थी टीवी इतिहास का सबसे बड़ा हिट सीरियल था. बहूरानी तुलसी विरानी के किरदार में स्मृति ईरानी घर-घर की पसंद बन गईं. टीवी करियर में मुश्किल से 7-8 साल गुजारे स्मृति ईरानी ने. 2007 में उन्होंने पीक टाइम पर सीरियल छोड़ दिया. शायद फुलटाइम राजनीति के लिए.
टीवी करियर बनाते हुए स्मृति ईरानी बीजेपी के संपर्क में आ चुकी थीं. 2003 में बीजेपी ज्वाइन की थी. वो दौर अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी का होता था. स्मृति ईरानी की जबर्दस्त लोकप्रियता का राजनीतिक लाभ उठाने के लिए 2004 में दिल्ली की चांदनी चौक लोकसभा सीट पर कपिल सिब्बल के खिलाफ उतारा गया. स्मृति ईरानी जीत तो नहीं पाईं लेकिन राजनीति में सक्रियता बढ़ गई.
उन दिनों नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम होते थे और गुजरात दंगों के कारण घिरे हुए थे. एक दौर ऐसा भी आया कि जब बीजेपी में रहते हुए जोश-जोश में स्मृति ईरानी ने मोदी के इस्तीफे की मांग कर दी थी. आगे चलकर स्मृति ईरानी और मोदी की ट्यूनिंग ऐसी बनी कि स्मृति ईरानी राहुल गांधी के टक्कर की नेता बन गईं. 2011 में गुजरात सीएम मोदी ने अपने राज्य गुजरात से राज्यसभा सांसद बना दिया. 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी पीएम के उम्मीदवार बने तो स्मृति ईरानी को अमेठी में राहुल गांधी को हराने का जिम्मा मिला. जो 2014 में नहीं कर पाईं वो उन्होंने 2019 में कर दिखाया लेकिन 2024 की हार भारी पड़ रही है. स्मृति ईरानी बीजेपी में हैं. बस कहीं दिखाई नहीं दे रही हैं.
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