Tamil Nadu Election में BJP के लिए खतरा बनेगी इन 3 नेताओं की तिकड़ी, विजय-स्टालिन-जगन की फोटो ने बढ़ाई अटकलें

Tamil Nadu Election: चेन्नई की एक हाई-प्रोफाइल शादी में थलापति विजय, एम.के. स्टालिन और वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी का एक साथ नजर आना सियासी चर्चाओं का कारण बन गया है.

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में हलचल
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में हलचल

रूपक प्रियदर्शी

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Tamilnadu Election: दक्षिण भारत से आई एक तस्वीर इन दिनों इंटरनेट पर जबरदस्त चर्चा का विषय बनी हुई है. कहा जाता है कि राजनीति में तस्वीरें बहुत कुछ कह जाती हैं और चेन्नई की एक शाही शादी से सामने आई फोटो ने सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर #ThalapathyVijay, #Stalin और #Jagan एक साथ ट्रेंड कर रहे हैं. समर्थक इसे 'ब्लॉकबस्टर मोमेंट' बता रहे हैं तो आलोचक इसे महज दिखावा कहकर खारिज कर रहे हैं.

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मौका था आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के करीबी रिश्तेदार वाई.एस. सुनील रेड्डी के बेटे साहिल रेड्डी और वेदिका की शादी का. चेन्नई के द लीला पैलेस में आयोजित इस हाई-प्रोफाइल समारोह में कई बड़े चेहरे पहुंचे लेकिन सारी सुर्खियां उस सोफे ने बटोर लीं जिस पर जगन मोहन रेड्डी, तमिल सुपरस्टार से नेता बने थलापति विजय और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन साथ बैठे नजर आए. 

विजय और जगन की लंबी बातचीत 

तस्वीरों और वीडियो में विजय और जगन लंबी बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं. यही वजह है कि इसे सिर्फ एक शिष्टाचार मुलाकात मानने के बजाय 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है. सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ संयोग था या दक्षिण की राजनीति में किसी नए समीकरण की झलक?

दिलचस्प बात ये भी रही कि शादी में एआईएडीएमके नेता ई. पलानीस्वामी (EPS) भी मौजूद थे लेकिन चर्चा उतनी नहीं हुई. पूरा फोकस इन तीन चेहरों पर रहा, जिन्हें दक्षिण की राजनीति के प्रभावशाली खिलाड़ी माना जाता है. 

विजय-स्टालिन की साथ में कोई तस्वीर नहीं 

हालांकि विजय और स्टालिन की अलग से कोई तस्वीर सामने नहीं आई, लेकिन दोनों के बीच पहले से ही अच्छे संबंध बताए जाते हैं. जब विजय राजनीति में नहीं आए थे, तब भी मुलाकातें होती रही थीं. स्टालिन ने कई बार सार्वजनिक तौर पर विजय को छोटे भाई जैसा बताया है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि स्टालिन, विजय के प्रति नरम रुख बनाए रखना चाहते हैं ताकि उनका युवा वोट बैंक बीजेपी या एआईएडीएमके की ओर न खिसके.

दूसरी ओर जगन मोहन रेड्डी भले ही एनडीए का हिस्सा न रहे हों, लेकिन उन्हें बीजेपी के करीब माना जाता रहा है. इसके बावजूद स्टालिन और जगन के संबंध हमेशा सौहार्दपूर्ण रहे हैं. दोनों नेताओं ने कई मौकों पर केंद्र की नीतियों के खिलाफ और दक्षिणी राज्यों के अधिकारों के पक्ष में एक जैसी आवाज उठाई है.

कमबैक सिग्नल हो सकती है

विश्लेषकों का मानना है कि यह तस्वीर जगन के लिए भी एक तरह का 'कमबैक सिग्नल' हो सकती है. एक संदेश कि वह अभी भी दक्षिण के बड़े नेताओं की कतार में खड़े हैं. वहीं विजय के लिए अनुभवी नेताओं के साथ मंच साझा करना उन्हें एक गंभीर राजनीतिक खिलाड़ी के तौर पर पेश करता है.

राजनीतिक चर्चाओं में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या स्टालिन, विजय और जगन को साथ लाकर दक्षिण में बीजेपी के विस्तार को रोकने की रणनीति बना रहे हैं? जगन को आंध्र प्रदेश में अपनी पकड़ फिर मजबूत करनी है, जबकि विजय 2026 में तमिलनाडु की सत्ता की दौड़ में उतरने की तैयारी कर रहे हैं. ऐसे में क्या दोनों एक-दूसरे की लोकप्रियता का फायदा उठाएंगे?

जगन और विजय की राजनीति में कई समानताएं

जगन और विजय की राजनीति में कई समानताएं भी गिनाई जाती हैं. दोनों की पार्टियां काफी हद तक उनके व्यक्तिगत करिश्मे पर टिकी हैं. जगन अपनी पार्टी YSRCP का सबसे बड़ा चेहरा हैं, वहीं विजय की तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) उनके स्टारडम से ही पहचान बनाती है. दोनों को पॉपुलिस्ट राजनीति का माहिर खिलाड़ी माना जाता है. फर्क बस इतना है कि जगन को अपने पिता वाईएसआर की विरासत से मजबूत आधार मिला, जबकि विजय ने फिल्मी दुनिया से खुद का विशाल फैन बेस तैयार किया है, जिसे अब वोट में बदलना उनकी सबसे बड़ी चुनौती है.

आंध्र की राजनीति में जगन और चंद्रबाबू नायडू के बीच प्रतिस्पर्धा किसी से छिपी नहीं है. हालांकि नायडू ने विजय की राजनीतिक एंट्री पर कभी खुलकर टिप्पणी नहीं की, लेकिन दोनों के बीच औपचारिक सम्मान बना हुआ है. 2024 में नायडू की जीत पर विजय ने उन्हें बधाई दी थी, जिसका जवाब भी उन्होंने गर्मजोशी से दिया था. वहीं अभिनेता से नेता बने पवन कल्याण जो नायडू के सहयोगी हैं, विजय के प्रति सकारात्मक रुख रखते हैं.

इस वायरल फोटो का एक बड़ा राजनीतिक मतलब यह भी निकाला जा रहा है कि विजय अब सिर्फ तमिलनाडु तक सीमित नेता नहीं रहना चाहते, बल्कि राष्ट्रीय पहचान की ओर बढ़ रहे हैं. वहीं जगन के लिए यह संकेत हो सकता है कि वह टीडीपी-बीजेपी-जनसेना गठबंधन का मुकाबला करने के लिए व्यापक समर्थन तलाश रहे हैं.

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह मुलाकात किसी गठबंधन की शुरुआत है या सिर्फ एक सामाजिक समारोह का हिस्सा. लेकिन इतना तय है कि एक शादी की यह तस्वीर दक्षिण की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे चुकी है और 2026 के चुनावों से पहले ऐसे संकेतों को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा.

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