TMC नेता जहांगीर खान को बंगाल STF ने नेपाल बॉर्डर से किया गिरफ्तार, इस मामले में हुआ एक्शन

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना से जुड़े तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान को बंगाल एसटीएफ ने नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार ठिकाने बदल रहे थे, लेकिन एक सहयोगी के फोन नेटवर्क ने उनकी लोकेशन उजागर कर दी. इसके बाद एसटीएफ ने ऑपरेशन चलाकर उन्हें दबोच लिया.

Jahangir Khan News
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तपस सेनगुप्ता

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Jahangir Khan Arrested: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के फलता से तृणमूल कांग्रेस के नेता जहांगीर खान को बंगाल एसटीएफ ने नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तारी से बचने के लिए जहांगीर खान लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे. बंगाल एसटीएफ की टीम अगल-अलग मामलों में पुलिस उनकी तलाश कर रही थी. जांच के दौरान एसटीएफ ने जहांगीर खान के एक सहयोगी के फोन नेटवर्क को लगातार ट्रैक करना शुरू किया. इसी फोन नेटवर्क की लोकेशन का पीछा करते हुए एसटीएफ आखिरकार नेपाल बॉर्डर तक पहुंच गई और वहां से जहांगीर खान को धर दबोचा.

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लगभग 41 साल के जहांगीर खान दक्षिण 24 परगना के फलता विधानसभा क्षेत्र से टीएमसी के काफी सक्रिय नेता रहे हैं. वे फलता ब्लॉक और जिला परिषद स्तर पर काम करते रहे हैं. उनकी शिक्षा 12वीं पास है और वे मुख्य रूप से बिजनेस और सोशल वर्क से जुड़े रहे हैं. साल 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान फलता सीट पर टीएमसी ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया था.

फलता सीट पर विवाद और री पोलिंग

फलता विधानसभा सीट पर मतदान के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और गड़बड़ियां होने के आरोप लगे थे. इन गंभीर आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने इस सीट पर दोबारा मतदान यानी री पोलिंग का आदेश जारी किया था. जहांगीर खान इसी री पोलिंग में टीएमसी की तरफ से चुनावी मैदान में थे लेकिन चुनाव प्रक्रिया के दौरान उनके नाम पर कई तरह के विवाद जुड़ते चले गए. हालांकि री पोलिंग में उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा था.

हिंसा और पुरानी हत्या के मामले के आरोप

चुनावी माहौल के बीच जहांगीर खान के खिलाफ हिंसा करने, लोगों को धमकी देने और कट मनी लेने के गंभीर आरोप लगे थे. इसके अलावा उनके खिलाफ पुराने आपराधिक मामले भी थे जिसमें साल 2017 में हुई एक छोटी बच्ची की हत्या का मामला भी शामिल था. इन सभी मामलों की वजह से क्षेत्र में लगातार राजनीतिक तनाव बना हुआ था.

आईपीएस अधिकारी को खुली धमकी

जहांगीर खान पर चुनाव के दौरान केंद्रीय पर्यवेक्षक और आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को सरेआम खुली धमकी देने का भी एक बड़ा विवाद उठा था. इस घटना के बाद से ही इलाके की सियासी गर्मी और ज्यादा बढ़ गई थी और प्रशासन भी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के मूड में आ गया था.

हाईकोर्ट से राहत और फिर झटका

री-पोलिंग से पहले जहांगीर खान ने कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उन्होंने अदालत में याचिका दायर कर अपनी गिरफ्तारी से अंतरिम राहत की मांग की थी. शुरुआत में हाईकोर्ट से उन्हें अंतरिम राहत मिल भी गई थी लेकिन बाद में कोर्ट ने उनकी इस राहत को रद्द कर दिया जिसके बाद से ही उनके ऊपर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी और वे फरार हो गए थे.

चुनाव से दो दिन पहले नाम वापस लिया

फलता सीट पर 21 मई 2026 को दोबारा मतदान होना तय हुआ था लेकिन इस री पोलिंग से ठीक दो दिन पहले जहांगीर खान ने अचानक चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया था. नाम वापस लेने के पीछे उन्होंने अपने कुछ निजी कारणों और क्षेत्र के विकास का हवाला दिया था.

टीएमसी ने फैसले से बनाई दूरी

जहांगीर खान द्वारा चुनाव से ठीक पहले नाम वापस लिए जाने के बाद उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने इस पूरे मामले पर अपना रुख साफ किया था. टीएमसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि चुनाव से नाम वापस लेने का फैसला पूरी तरह से जहांगीर खान का व्यक्तिगत फैसला था और इस निर्णय से पार्टी का कोई लेना देना नहीं था.

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