बंगाल के बाद अब दिल्ली में 'खेला'? ममता बनर्जी की बढ़ी टेंशन, TMC में बड़ी टूट के आसार

बंगाल विधानसभा में 60 विधायकों की टूट के बाद अब टीएमसी के सांसदों में बगावत की आशंका है. सांसद सुखेंदु शेखर रॉय और नाराज काकोली घोष को लेकर अटकलें तेज हैं. ममता बनर्जी खुद नाराज नेताओं को मनाने और डैमेज कंट्रोल में जुट गई हैं, ताकि संसद में पार्टी को बिखरने से बचाया जा सके.

TMC political crisis
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पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सामने नई चुनौती खड़ी होती दिखाई दे रही है. विधानसभा में बड़े राजनीतिक झटके के बाद अब पार्टी के सांसदों को लेकर भी अटकलों का दौर शुरू हो गया है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बंगाल विधानसभा में हुई टूट का असर लोकसभा और राज्यसभा तक पहुंच सकता है. इसी संभावना को देखते हुए पार्टी नेतृत्व पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है.

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हाल ही में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में करीब 60 विधायकों के अलग होने से TMC को बड़ा झटका लगा था. यह पार्टी के इतिहास के सबसे बड़े अंदरूनी संकटों में से एक माना जा रहा है. हालात ऐसे बने कि विधानसभा अध्यक्ष ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता भी दे दी. इसके बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या इसी तरह की स्थिति संसद में भी देखने को मिल सकती है.

सांसदों में क्यों है बगावत का डर?

इस बीच राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने भी ऐसी संभावना से इनकार नहीं किया है. उनका कहना है कि जिस तेजी से बड़ी संख्या में विधायक अलग हुए हैं, उसी तरह की राजनीतिक प्रतिक्रिया लोकसभा में भी दिखाई दे सकती है. हालांकि उन्होंने राज्यसभा को लेकर कोई स्पष्ट भविष्यवाणी नहीं की, लेकिन संभावनाओं को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया.

बीजेपी पर लगा 'खेला' करने का आरोप

वहीं, वरिष्ठ TMC सांसद सौगत रॉय ने पार्टी में किसी बड़े विभाजन की संभावना को नकार दिया है. उनका आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी बंगाल विधानसभा की तरह संसद में भी राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश कर रही है. उन्होंने भरोसा जताया कि ममता बनर्जी पहले भी कई कठिन राजनीतिक परिस्थितियों का सामना कर चुकी हैं और इस बार भी पार्टी संकट से बाहर निकल आएगी.

इधर बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार का नाम भी लगातार चर्चा में बना हुआ है. पार्टी के भीतर उनकी नाराजगी पहले से चर्चा का विषय रही है. लोकसभा में चीफ व्हिप पद से हटाए जाने के बाद उन्होंने कई मौकों पर असंतोष जाहिर किया था. हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से किसी भी तरह की बगावत या अलग रास्ता अपनाने की बात नहीं कही है.

ममता बनर्जी खुद सक्रिय हुई

सूत्रों के मुताबिक, हालात को नियंत्रित करने के लिए ममता बनर्जी खुद सक्रिय हो गई हैं. बताया जा रहा है कि पिछले दो दिनों में उन्होंने कई नाराज विधायकों और सांसदों से बातचीत की है. पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि किसी भी असंतोष को बढ़ने से पहले ही दूर कर लिया जाए. इसके अलावा संसद में पार्टी के दो भरोसेमंद सांसदों को सहयोगियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है.

क्या कहता है कानूनी गणित?

वर्तमान में TMC के पास लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दलबदल कानून के तहत यदि दो-तिहाई सांसद किसी अलग गुट के साथ जाते हैं तो उनकी सदस्यता सुरक्षित रह सकती है. इसी वजह से राजनीतिक हलकों में दो संभावित रास्तों की चर्चा हो रही है. पहला, अलग गुट बनाकर खुद को असली TMC बताने की कोशिश और दूसरा, किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ विलय का विकल्प.

हालांकि पार्टी के चुनाव चिह्न और संगठन पर अधिकार केवल सांसदों या विधायकों की संख्या से तय नहीं होगा. इसके लिए चुनाव आयोग के सामने यह साबित करना होगा कि संगठन के भीतर वास्तविक बहुमत किसके साथ है. फिलहाल इतना तय है कि बंगाल में शुरू हुआ राजनीतिक संघर्ष अब केवल विधानसभा तक सीमित नहीं दिख रहा और आने वाले दिनों में इसकी गूंज संसद तक सुनाई दे सकती है.

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