Charchit Chehra: कौन हैं एक्ट्रेस त्रिवेणी राव, जो बनीं बीजेपी नेता और पूर्व CM बिप्लब देब की पत्नी? जानिए दोनों की पूरी कहानी

Chachit Chehra: कौन हैं कन्नड़ एक्ट्रेस त्रिवेणी राव, जिन्होंने बीजेपी नेता और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब से दूसरी शादी की? जानिए त्रिवेणी राव का फिल्मी करियर, बिप्लब देब की राजनीतिक यात्रा, पहली शादी, तलाक और दोनों की लव स्टोरी की पूरी कहानी.

Biplab Kumar Deb and Triveni Rao
पूर्व सीएम बिप्लब देव ने एक्ट्रेस त्रिवेणी राव से रचाई शादी!

रूपक प्रियदर्शी

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जिंदगी हो या राजनीति, कब क्या हो जाए, कोई नहीं जानता. प्यार भी कब कैसे किसी को हो जाए, इसकी भी कोई गारंटी नहीं होती. 50 पार लोग जब प्यार में पड़ते हैं या शादी करते हैं तो अक्सर हेडलाइंस बनती हैं. ऐसी ही एक हेडलाइन बनी है बिप्लब कुमार देब की. बिप्लब देब मामूली आदमी नहीं हैं. बीजेपी के बड़े नेता और सांसद तो हैं हीं, साथ ही त्रिपुरा के सीएम भी रहे. 25 साल की शादीशुदा जिंदगी के बाद उन्होंने दो बच्चों की मां नीति देब से तलाक लिया. फिर अपनी मां के कहने पर दूसरी शादी रचाई वो भी एकदम चुपके-चुपके. 19 जून को जब बिप्लब देब और कन्नड़ एक्ट्रेस त्रिवेनी  राव एक-दूसरे को हो रहे थे तब कहां जमाने को खबर थी. खबर तो जब पता चली जब बिप्लब देब और त्रिवेणी राव ने चाही. 

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दिल्ली में गुप्त रखी गई शादी का खुलासा तब हुआ जब पति-पत्नी अगरतला पहुंचे. मां के आशीर्वाद और परिवार की रजामंदी से हुई शादी का भव्य रिसेप्शन अगरतला के फाइव स्टार होटल पोलो टॉवर्स में हुआ. त्रिवेनी  राव से शादी करके चर्चित चेहरा बने हैं एक्स सीएम बिप्लब देब. हालांकि वे पहले भी अपने राजनीतिक सफर और अजीब-अजीब सी साइंस थ्योरीज को लेकर चर्चित रहे हैं. आइए विस्तार से जानते है पूरी कहानी.

नीति से पहले शादी, फिर तलाक!

नीति देब से शादी तब हुई थी जब बिप्लब देब राजनीति के स्ट्रगर थे. एसबीआई ऑफिसर नीति से 2001 को दिल्ली में आर्य समाज मंदिर में हुई थी. दोनों एक बेटा और एक बेटी के पेरेंट बने. न जाने कब कहां इतने लंबे समय साथ के बाद रिश्ते में दरारें पड़ने लगीं. सितंबर 2022 में दोनों ने अलग रहने का फैसला किया और जनवरी 2025 में दोनों ने आपसी सहमति से तलाक ले लिया. बिप्लब देब ने करीब 1 करोड़ रुपये के फुल सेटलमेंट के साथ 24 साल पुराने रिश्ते को अलविदा कह दिया. 

मां की वजह से शुरू की नई जिंदगी!

तलाक के बाद अकेले रह रहे बिप्लब देब को नए सिरे से जिंदगी शुरू करने के लिए मां ने प्रेरित किया. तब बिप्लब देब की लाइफ में एंट्री हुई कन्नड़ सिनेमा में 'कांस्टेबल सरोजा' के किरदार से मशहूर त्रिवेनी राव की. अभी भी ये पता नहीं कि त्रिपुरा के नेता की लाइफ में एक कन्नड़ एक्ट्रेस ने कब कैसे दस्तक दी. 

कौन हैं त्रिवेणी राव?

बैंगलोर बॉर्न त्रिवेनी राव ने कन्नड़ सिनेमा में तेजी से बड़े स्टार्स के साथ जगह बनाई. हालांकि अभी उनका करियर टॉप पर नहीं पहुंचा है. एक्टिव एक्टिंग करियर के बीच उन्होंने न केवल शादी का बड़ा फैसला किया बल्कि ऐसे दूल्हे से शादी की जो बीजेपी के बड़े नेता हैं, सीएम रह चुके हैं और उम्र में 15-20 साल का फासला माना जा रहा है. बिप्लब देब की उम्र 54 साल है, त्रिवेणी राव की सही उम्र पता नहीं लेकिन उनके करियर ग्राफ से अनुमान है कि वो अर्ली 30s में हो सकती हैं.

कन्नड़ फिल्म जगत में एक उभरती हुई एक्ट्रेस के तौर पर पहचान रखने वाली त्रिवेनी चाहे-अनचाहे त्रिपुरा की राजनीति का भी चेहरा है. जब भी बिप्लब देब का जिक्र होगा, त्रिवेणी का जिक्र भी होगा. चर्चा ये भी है कि शादी के बाद त्रिवेनी राव ने फिलहाल फिल्मों से दूरी बनाएंगी और सारा ध्यान नए परिवार पर लगाएंगी. सोशल मीडिया पर उनकी पहली शादी टूटने की अक्सर चर्चा होती रही लेकिन दूसरी शादी लोगों को पसंद आई. 'साउथ वेड्स नॉर्थ-ईस्ट' ट्रेंड के साथ दोनों को शादी की बधाइयां और शुभकामनाएं मिल रही हैं.

त्रिवेनी राव ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की. फिर फिल्मों का रुख किया. हालांकि उन्होंने कुछ ही फिल्मों में काम किया, लेकिन एक्टिंग स्किल से अपनी जगह बनाई. बड़ी पहचान 2018 में आई ब्लॉकबस्टर एक्शन-ड्रामा फिल्म 'टगारू से मिली. उन्होंने सुपरस्टार शिवराजकुमार के साथ कांस्टेबल सरोजा का कैरेक्टर प्ले किया. आगे उन्होंने पुनीत राजकुमार की सुपरहिट फिल्म युवारत्ना और राजमार्तंड में भी काम किया. सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाली त्रिवेनी अपनी फिटनेस और बोल्ड लुक्स के लिए भी जानी जाती हैं.

बिप्लब देब की रोचक लाइफ जर्नी!

25 नवंबर 1971 को त्रिपुरा के उदयपुर में मिडिल क्लास बंगाली परिवार में हुआ.परिवार 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पूर्वी पाकिस्तान जो कि अब बांग्लादेश है के चांदपुर जिले से शरणार्थी बनकर त्रिपुरा में बसा था. बिप्लब कुमार देब जिम ट्रेनर से संघ प्रचारक, नेता के पीए बनने और फिर सीएम तक पहुंचे. उनके जैसी लाइफ जर्नी त्रिपुरा ही नहीं, देश की चर्चित लाइफ ट्रांसफॉर्मेशन में से है. उनके पिता हीराधन देब जनसंघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित कार्यकर्ता थे, जिसके कारण राष्ट्रवाद और राजनीति के संस्कार बिप्लब को बचपन में ही मिल गए थे. उनकी मां मीना रानी देब गृहिणी रहीं.

1993 में त्रिपुरा से ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद हायर एजुकेशन और करियर बनाने बिप्लब देब त्रिपुरा से दिल्ली आ गए. दिल्ली में टिके रहने, अपने खर्चें चलाने के लिए जिम में बतौर प्रोफेशनल जिम ट्रेनर काम किया. उसी दौरान एसबीआई में काम करने वाली जालंधर के एक ब्राह्मण पंजाबी परिवार नीति देब से मुलाकात भी हुई जिनसे शादी की. उसी दौरान दिल्ली में के.एन. गोविंदाचार्य जैसे बड़े संघ नेताओं के संपर्क में आए और संघ से जुड़ते गए. करीब 15 साल तक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में काम किया, जिसने आगे चलकर उनके राजनीतिक जीवन की मजबूत नींव रखी. संघ के लिए गई मेहनत उन्हें बीजेपी की ओर ले गई.

अमित शाह ने भेजा था त्रिपुरा का कमान संभालने!

बीजेपी के बड़े नेता रहे आचार्य विष्णुकांत शास्त्री और केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम के पीए बनकर भी काम किया. पीए बनकर फायदा ये हुआ कि बिप्लब देब ने संसद, सरकार से लेकर वोट बैंक की राजनीति को करीब से जान लिया. आगे चलकर एक संघ प्रचारक पीए बनकर चतुर चुनावी नेता बनकर उभरा. इससे भी आसानी हुई कि वो जिस त्रिपुरा से आते थे वहां बीजेपी के लिए न तो भीड़ थी, न दीवानगी. त्रिपुरा जैसे राज्यों में बीजेपी को भी डायनामिक चेहरे की जरूरत थी.

2014 में जब केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनी, तो बीजेपी ने पूर्वोत्तर को कांग्रेस और कम्युनिस्टों से मुक्त कराने का एक बड़ा प्लान तैयार किया. त्रिपुरा में 25 साल से माणिक सरकार के नेतृत्व में लेफ्ट का बेहद मजबूत किला था, जिसे हिलाना नामुमकिन माना जाता था. कहा जाता है कि 2015 में अमित शाह ने ही त्रिपुरा के मूल निवासी बिप्लब देब को वापस अपने गृह राज्य जाने और वहां पार्टी को जमीन से खड़ा करने को कहा. जनवरी 2016 में मात्र 44 साल की उम्र में त्रिपुरा बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया. तब वहां बीजेपी का कोई मजबूत वजूद नहीं था. पार्टी 1% वोट शेयर वाली पार्टी थी. 

लेफ्ट का गढ़ में फहराया भगवा!

त्रिपुरा लौटते ही बिप्लब देब ने दिल्ली का सारा आराम छोड़ दिया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बैकग्राउंड से आए बिप्लब देब ने जमीनी स्तर पर संगठन को खड़ा करने के लिए दिन-रात एक कर दिया. उन्होंने तत्कालीन सीएम माणिक सरकार की 'मिस्टर क्लीन' की छवि के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी को हवा दी. राज्य के सुदूर आदिवासी क्षेत्रों और गांवों के तूफानी दौरे शुरू किए. उन्होंने भांप लिया था कि लेफ्ट शासन में युवाओं के बीच बेरोजगारी को लेकर भारी गुस्सा है. बिप्लब देब ने इसी गुस्से को भुनाया और 'चलो पलटाईट यानी आओ बदलें का ऐसा आक्रामक नारा दिया जिसने पूरे त्रिपुरा की राजनीति को पलट कर रख दिया. त्रिपुरा किले जीतने का मिशन दिल्ली में बना लेकिन मिशन पूरा करने का प्लान जमीन पर उतारने वालों में सबसे आगे थे यंग बिप्लब देब. 

बिप्लब देब की लीडरशिप में 2018 में बीजेपी की सरकार बन गई. उत्तर पूर्व में बीजेपी की चौथी सरकार बनी. लेफ्ट को उखाड़कर बीजेपी की पहली सरकार बनी. कम्युनिस्टों के सबसे मजबूत गढ़ में 'भगवा' लहराकर बिप्लब देब त्रिपुरा में बीजेपी के सबसे बड़े 'गेमचेंजर' और उत्तर पूर्व के बड़े बीजेपी फेस बनकर उभरे, जिसके इनाम के तौर पर पार्टी ने उन्हें त्रिपुरा का पहला बीजेपी सीएम बनाया. 

क्यों सीएम पद से हटे थे बिप्लब देब?

बिप्लब देब सीएम बनकर शासन तो चलाने लगे लेकिन काम से ज्यादा चर्चे होने लगे उनके अजीबोगरीब साइंस थ्योरीज के. एक राज्य का सीएम कहने लगा कि इंटरनेट की खोज महाभारत काल में हुई थी. संजय ने महाभारत का युद्ध सैटेलाइट के जरिए लाइव देखा था. नौकरी मांगने वाले बेरोजगारों को पान की दुकान और गाय पालने की सलाह देने लगे. कहते थे बत्तखों के तैरने से पानी में ऑक्सीजन बढ़ता है. डायना हेडन को मिस वर्ल्ड का खिताब देने पर सौंदर्य प्रतियोगिताओं के जजों को अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग माफिया बोल दिया. धमकाते थे कि सरकार पर उंगली उठाने वालों के नाखून नोच लेंगे. खुद को असली 'टाइगर' बताया जो सरकार चला रहा है. मतलब कुछ भी बोलकर बिप्लब देब अपनी और बीजेपी की खिल्ली उड़वा रहे थे. ये सब तब थमा जब पार्टी ने उनकी सत्ता पर पंजा मार दिया. 

2022 तक आते-आते पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह और एंटी-इंकंबेंसी बढ़ने लगी, जिसके चलते बीजेपी ने चुनाव से ठीक एक साल उनसे अचानक इस्तीफा ले लिया और माणिक साहा को नया सीएम बना दिया. बिप्लब देब का करियर एकदम धड़ाम हो गया. हालांकि पार्टी ने उन्हें हरियाणा जैसे राज्य का प्रभारी बनाकर, राज्यसभा सांसद बनाकर और फिर लोकसभा चुनाव में टिकट देकर मान बनाए रखा लेकिन जो रूआब सीएम बिप्लब देब का था वो त्रिपुरा पश्चिम के सांसद का कहां रहा.

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