West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में ममता या BJP...हवा का रुख किसकी तरफ, राजदीप सरदेसाई ने बता दिया?

Rajdeep Sardesai on West Bengal Election: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 को लेकर बड़ा राजनीतिक विश्लेषण सामने आया है. राजदीप सरदेसाई ने बताया कि इस बार मुकाबला विचारधारा नहीं बल्कि 'स्विगी पॉलिटिक्स' और SIR फैक्टर पर टिका है. ममता बनर्जी बनाम BJP की लड़ाई में महिला वोट बैंक, लक्ष्मी भंडार योजना और 3000 रुपये के वादे जैसे मुद्दे चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं.

West Bengal Election 2026
West Bengal Election 2026

न्यूज तक डेस्क

follow google news

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासी पारा चढ़ गया है. राज्य में मौजूद हर राजनीतिक दल जीतने के लिए प्रयास कर रहा है. न्यूज़ तक के विशेष कार्यक्रम 'साप्ताहिक सभा' में इंडिया टुडे के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई और तक चैनल्स के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर ने बंगाल चुनाव के समीकरणों पर विस्तृत चर्चा की. राजदीप सरदेसाई के अनुसार, इस बार का चुनाव विचारधारा से ज्यादा 'स्विगी पॉलिटिक्स' (डिलीवरी पॉलिटिक्स) और नए 'SIR' फैक्टर पर टिका हुआ है.

Read more!

महिला वोटर्स में 1 फीसदी की सेंधमारी भी बीजेपी के लिए टर्निंग पॉइंट

बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी की सबसे बड़ी ताकत उनके दो 'M' यानी मुस्लिम और महिला वोट बैंक रहे हैं. मुस्लिम वोट बैंक में विपक्षी दलों के लिए सेंध लगाना फिलहाल मुश्किल दिख रहा है, इसलिए भाजपा का पूरा ध्यान महिला वोटर्स पर केंद्रित है. भाजपा ने महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर टीएमसी को महिला विरोधी करार देने की रणनीति अपनाई है. राजदीप सरदेसाई का मानना है कि अगर भाजपा ममता के महिला वोट बैंक में मात्र 1% की भी गिरावट लाने में सफल रही, तो यह भाजपा के लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट हो सकता है. 

लोखीर भंडार बनाम 3000 का वादा: 'स्विगी पॉलिटिक्स' की जंग

चर्चा के दौरान एक नया शब्द 'स्विगी पॉलिटिक्स' उभर कर आया, जिसका अर्थ है वह राजनीति जहां जनता उस पार्टी को वोट देती है जो सीधे उनके घर तक लाभ पहुंचाती है. ममता बनर्जी 'लक्ष्मी भंडार' (लोखीर भंडार) और 'रूप श्री' जैसी योजनाओं के जरिए पहले से ही महिलाओं को आर्थिक लाभ दे रही हैं. इसके काट के रूप में भाजपा ने दांव खेला है कि यदि वे सत्ता में आते हैं, तो महिलाओं को मिलने वाली 1500 रुपये की राशि को बढ़ाकर 3000 रुपये कर दिया जाएगा. अब देखना यह है कि बंगाल की महिलाएं मौजूदा डिलीवरी पर भरोसा करती हैं या भविष्य के बड़े वादे पर.

दक्षिण बंगाल का रण और 100 पार का लक्ष्य

भौगोलिक समीकरणों की बात करें तो उत्तर बंगाल भाजपा का मजबूत गढ़ बन चुका है, लेकिन सत्ता की चाबी दक्षिण बंगाल के पास है. राजदीप सरदेसाई के मुताबिक, भाजपा का पहला लक्ष्य इस चुनाव में 100 सीटों का आंकड़ा पार करना है. यदि भाजपा कोलकाता और 24 दक्षिण परगना जैसे ममता बनर्जी के मजबूत किलों में सेंध मार पाती है, तभी वह टीएमसी को कड़ी टक्कर दे पाएगी. ममता बनर्जी का लक्ष्य अपनी स्पष्ट बहुमत (160+ सीटें) को बरकरार रखना है.

क्या 'SIR' फैक्टर पलट देगा बाजी?

इस चुनाव में सबसे चौंकाने वाला पहलू SIR फैक्टर (वोटर लिस्ट से नाम हटाना) बनकर उभरा है. रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 90 लाख वोटरों के नाम हटाए गए हैं. इनमें मटुआ, राजवंशी और मुस्लिम समाज के वोटर्स शामिल हैं. विश्लेषण में यह बात सामने आई कि लगभग 44 सीटें ऐसी हैं जहां हटाए गए वोटों की संख्या पिछली बार की जीत के अंतर (मार्जिन) से कहीं ज्यादा है. यह SIR फैक्टर उन 30-40 सीटों पर निर्णायक साबित हो सकता है जहां मुकाबला बेहद कड़ा है. यह देखना दिलचस्प होगा कि यह फैक्टर ममता को नुकसान पहुंचाता है या भाजपा का गणित बिगाड़ता है.

यहां देखें वीडियो

'23 को पहाड़ वालों को हाथ मत लगाना, वरना 5...' पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले अमित शाह का बड़ा चैलेंज

    follow google news