Assam Election News: असम विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले राज्य की सियासत में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. कभी एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे कांग्रेस नेता गौरव गोगोई और 'रायजोर दल' के प्रमुख अखिल गोगोई ने हाथ मिला लिया है.
ADVERTISEMENT
इस गठबंधन की सबसे खास बात यह है कि दोनों दलों के बीच बाकायदा एक MoU (Memorandum of Understanding) साइन हुआ है. राजनीति में लिखित शर्तों के साथ हुआ यह गठबंधन मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है.
आंदोलन की कोख से निकले अखिल गोगोई
अखिल गोगोई का सफर बेहद दिलचस्प रहा है. जोरहाट के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे अखिल ने हमेशा मिट्टी और हक की लड़ाई लड़ी. 'कृषक मुक्ति संग्राम' के जरिए उन्होंने किसानों की आवाज बुलंद की. 2011 के अन्ना आंदोलन में वे अरविंद केजरीवाल के साथ मंच साझा कर चुके हैं, हालांकि बाद में राजनीतिक मतभेदों के चलते दोनों के रास्ते अलग हो गए थे.
जेल से विधानसभा तक का सफर
अखिल गोगोई की असली ताकत तब दिखी जब उन्होंने जेल में रहते हुए 2021 का विधानसभा चुनाव जीता. सीएए (CAA) विरोध के दौरान उन पर यूएपीए (UAPA) लगाया गया था. उनकी अनुपस्थिति में उनकी 85 वर्षीय मां, प्रियदा गोगोई ने चुनाव प्रचार की कमान संभाली और शिवसागर सीट से उन्हें ऐतिहासिक जीत दिलाई. इस पूरे संघर्ष में उनकी पत्नी गीताश्री तामूली उनकी सबसे बड़ी ढाल बनकर खड़ी रहीं.
क्या है 'गोगोई प्लस गोगोई' का मास्टरप्लान?
इस गठबंधन के तहत रायजोर दल 11 सीटों पर चुनाव लड़ेगा, जबकि 2 सीटों पर 'फ्रेंडली फाइट' होगी. अखिल गोगोई ने स्पष्ट किया है कि उनका लक्ष्य व्यक्तिगत पद नहीं, बल्कि गौरव गोगोई को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाना है.
कांग्रेस और रायजोर दल मिलकर विपक्षी वोटों को बंटने से रोकना चाहते हैं ऊपरी असम की सीटों पर अखिल गोगोई 'असमिया पहचान' का कार्ड खेलकर बीजेपी के हिंदुत्व के एजेंडे को चुनौती देने की तैयारी में हैं.
दूसरी तरफ, बीजेपी ने इस गठबंधन को 'अप्राकृतिक' करार दिया है. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का दावा है कि विपक्ष का यह साथ बीजेपी की राह को और आसान बना देगा. अब देखना होगा कि 4 मई को आने वाले नतीजे असम की सत्ता की चाबी किसके हाथ सौंपते हैं.
ADVERTISEMENT


