संसद परिसर में राहुल गांधी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बेहद सहज, खुशनुमा और दोस्ताना अंदाज में चहलकदमी करने वाली जेबी माथेर इस समय राजनीति गलियारों और सोशल मीडिया पर सबसे बड़ा कौतूहल बन चुकी हैं. संसद के मानसून सत्र के दौरान दोनों नेताओं के बीच दिखी इस शानदार ट्यूनिंग और कमाल की केमिस्ट्री ने हर किसी का ध्यान खींचा है, क्योंकि अमूमन राहुल गांधी किसी भी सांसद के साथ संसद परिसर में इस तरह इतने हल्के-फुल्के और बेबाक अंदाज में बातचीत करते नहीं दिखते.
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राहुल गांधी और जेबी माथेर का वीडियो वायरल
राहुल गांधी और जेबी माथेर का वायरल वीडियो 10 अगस्त का है. संसद परिसर में बारिश हुई थी. बारिश के बाद मौसम बहुत खुशनुमा था. राहुल गांधी वॉक करने चल पड़े तो जेबी माथेर भी उनके साथ हो लीं. राहुल गांधी का ये नेचुरल अंदाज और जेबी माथेर के साथ कैंडिड बातचीत संसद में घूमते कैमरामैन ने रिकॉर्ड कर ली. और ये वीडियो वायरल हो रहा है. उसी चहलकदमी के दौरान राहुल और माथेर संसद परिसर में ड्यूटी कर रहे जवान तक पहुंचे. जवान ने राहुल गांधी को देखकर हेलो करने की उत्सुकता दिखाई. राहुल ने हैंडशेक करके जवान का दिन बना दिया. ये तो किसी को पता नहीं कि चहलकदमी करते हुए राहुल और जेबी ने क्या कुछ डिस्कस किया.
कांग्रेस के पुराने परिवार से आती हैं जेबी माथेर
जेबी माथेर केरल की मुस्लिम, महिला कांग्रेस सांसद हैं, जिन्हें राजनीति में इतनी ऊपर तक लाने का क्रेडिट भी राहुल गांधी को जाता है. जेबी माथेर की कहानी किसी फिल्मी 'पैराशूट लीडर' जैसी नहीं है, उनका परिवार तीन जेनरेशन से कांग्रेस से जुड़ा है.
तीन पीढ़ियों से कांग्रेस से जुड़ा परिवार
जेबी के नाना टी. ओ. बावा केरल कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं. पिता के. एम. आई. माथेर पार्टी के सीनियर नेता रहे.
राजनीति जेबी के खून में थी, लेकिन उन्होंने खुद को सिर्फ एक 'विरासत की वारिस' नहीं बनने दिया. उन्होंने लॉ में LL.M. यानी मास्टर ऑफ लॉज की डिग्री लेकर वकील के तौर पर अपना करियर शुरू किया.
माथेर सरनेम की कहानी क्या है?
पता नहीं उन्हें वकील ही बनना था या राजनीति में एंट्री से पहले वो अपना होमवर्क कर रही थीं. माथेर उनके परिवार का नाम है. अब ऑफिशियल नेम जेबी माथेर हिशाम हैं. केरल के (Cardiologist) डॉ. हिशाम अहमद से शादी के बाद जेबी माथेर हिशाम बन गईं. केरल में माथेर कोई जाति, उपजाति या अलग से कोई धार्मिक संप्रदाय नहीं है, बल्कि कोच्चि और अलुवा इलाके के प्रतिष्ठित, मुस्लिम घराने का सरनेम है. कहा जाता है कि कोच्चि के महाराजा से उनके परदादाओं को 'माथेर' की उपाधि मिली थी.
यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
अक्सर राजनीतिक घरानों के बच्चों को सीधे बड़े पद मिलते हैं, लेकिन जेबी ने अपना सफर यूथ कांग्रेस के एक आम कार्यकर्ता के रूप में शुरू किया था. वह केरल की चिलचिलाती धूप में सड़कों पर उतरीं, लाठियां खाईं और धीरे-धीरे सीढ़ियां चढ़ते हुए यूथ कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव बनीं. स्थानीय निकाय चुनाव लड़ा और अलुवा नगरपालिका की उपाध्यक्ष (Vice-Chairperson) बनकर जमीनी प्रशासन का अनुभव लिया. जब उन्हें केरल महिला कांग्रेस की कमान सौंपी गई, तो उन्होंने महिलाओं के हक की लड़ाई को इतनी आक्रामकता से लड़ी कि दिल्ली में बैठे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की नजरें उन पर टिक गईं.
2022 में राहुल गांधी ने खेला 'मास्टरस्ट्रोक'
2022 में केरल कांग्रेस के भीतर राज्यसभा टिकट को लेकर बड़े-बड़े बुजुर्ग दिग्गजों और गुटों में तलवारें खिंची हुई थीं. तब राहुल गांधी ने एक ऐसा 'मास्टरस्ट्रोक' खेला, जिसने केरल की सियासत का रुख बदल दिया. राहुल गांधी ने केरल के तमाम गुटीय समीकरणों को दरकिनार कर जेबी माथेर के नाम पर मुहर लगा दी. जब उनका नाम आगे आया तो वीडी सतीशन, के. सुधाकरन, केसी वेणुगोपाल-सबने हामी भर दी.
युवा और शिक्षित चेहरे को आगे बढ़ाने की रणनीति
जेबी माथेर को चुनने के पीछे राहुल की वही गहरी रणनीति थी कि कांग्रेस में युवाओं और शिक्षित चेहरों को बढ़ावा मिलना चाहिए. जेबी में ये सारे गुण थे. युवा भी हैं, कानून की जानकार भी हैं और जमीनी स्तर पर सक्रिय भी हैं, सीधे राज्यसभा से पॉलिटिकल लॉन्चिंग हुई. केरल कांग्रेस में चल रही आंतरिक खींचतान को खत्म करने के लिए राहुल गांधी को एक ऐसे 'न्यूट्रल और मेरिट वाले चेहरे' की तलाश थी, जिस पर कोई गुट उंगली न उठा सके. जेबी माथेर इस पैमाने पर बिल्कुल फिट बैठीं.
42 साल बाद कांग्रेस से राज्यसभा पहुंचीं महिला
केरल जैसे प्रगतिशील राज्य में भी कांग्रेस ने पिछले 42 सालों से किसी महिला को राज्यसभा नहीं भेजा था. राहुल गांधी इस दाग को धोना चाहते थे और देश को महिला सशक्तिकरण का कड़ा संदेश देना चाहते थे. जेबी को राज्यसभा भेजकर राहुल गांधी ने इतिहास के दो बड़े रिकॉर्ड बना दिए. पहला, जेबी माथेर केरल के इतिहास में राज्यसभा पहुंचने वाली पहली मुस्लिम महिला सांसद बनीं. दूसरा, केरल कांग्रेस के इतिहास में पूरे 42 साल बाद किसी महिला को राज्यसभा जाने का मौका मिला था. उनसे पहले आखिरी बार 1980 में लीला दामोदर मेनन राज्यसभा पहुंची थीं.
मुस्लिम समुदाय और महिलाओं को दिया संदेश
राहुल गांधी खुद केरल की वायनाड सीट से लोकसभा सांसद रहे हैं, जहां उन्हें अल्पसंख्यक समुदाय का भारी समर्थन मिला था. जेबी माथेर को चुनकर राहुल गांधी ने केरल के मुस्लिम समुदाय और विशेषकर महिलाओं को यह भरोसा दिया कि कांग्रेस उनके प्रतिनिधित्व को लेकर गंभीर है.
राहुल की 'कोर यंग ब्रिगेड' का हिस्सा?
राहुल गांधी की ऐसी सहज केमिस्ट्री किसी अन्य सांसद के साथ बहुत कम देखने को मिलती है. दोनों नेताओं के बीच का यह तालमेल साफ दिखाता है कि जेबी माथेर केवल एक सांसद नहीं हैं, बल्कि वे राहुल गांधी की उस 'कोर यंग ब्रिगेड' और वैचारिक टीम का हिस्सा हैं, जिस पर वे आंख मूंदकर भरोसा करते हैं. जेबी माथेर और राहुल गांधी का जुड़ाव केवल संसद की चहलकदमी तक सीमित नहीं है. वैचारिक रूप से जेबी को राहुल गांधी की 'कोर ब्रिगेड' का हिस्सा माना जाता है. जब भी बीजेपी नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हैं, जेबी संसद से लेकर मीडिया तक उनकी सबसे मजबूत ढाल बनकर खड़ी होती हैं. जब केरल से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से तुलना करके राहुल गांधी के छात्र आउटरीच कार्यक्रम 'छात्रों की गूंज' पर सवाल उठाए तो जेबी ने उन्हें सुना दिया.
जेपी नड्डा को भी दिया था कड़ा जवाब
जब केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर छात्रों के प्रदर्शनों को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया, तो जेबी ने बेहद कड़ा जवाब देते हुए कहा था, राहुल गांधी देश के छात्रों के मन की बात पढ़ते हैं और जब सरकार अंधी-बहरी हो जाती है, तो वे युवाओं के साथ चट्टान की तरह खड़े होते हैं.
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