Shesh Bharat: राजनीति में बयानबाजी सब करते हैं. आरोप-प्रत्यारोप रोज होते हैं. लेकिन जब विपक्ष सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और सरकार का एक सांसद खुद साइंटिस्ट बनकर लाइव कैमरे पर दूध का दूध और पानी का पानी कर दे. तो समझना चाहिए कि वो नेता सिर्फ एक सांसद नहीं. बल्कि अपनी पार्टी और सरकार के लिए सबसे बड़ा असेट बन चुका है.
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E20 पर लाइव एक्सपेरिमेंट
ये कहानी है तेलंगाना के चेवेल्ला से बीजेपी सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी की. सोशल मीडिया पर सरकार के E20 पेट्रोल यानी इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोजेक्ट के खिलाफ एक नैरेटिव चल रहा है. दावा है कि इससे इंजन खराब हो रहे हैं. इसी नैरेटिव को गलत साबित करने E20 पर सरकार के फैसले को जस्टिफाई करने के लिए सांसद रेड्डी ने कैमरे के सामने एक्सपेरिमेंट लैब खोल दिया. एक हाथ में पेट्रोल लिया. एक में इथेनॉल और लाइव कैमरे पर आग लगा दी. सिर्फ ये साबित करने के लिए कि E20 वाला पेट्रोल भी सही है और सरकारी नीतियां भी देश और पर्यावरण के लिए सही हैं.
साइंस के जरिए सरकार का बचाव
विपक्ष और सोशल मीडिया की ट्रोल आर्मी जब सरकार को घेरने के लिए फेक न्यूज़ का सहारा ले रही है. तब बीजेपी के इस सांसद ने बंद कमरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बजाय ग्राउंड पर उतरकर साइंस का सहारा लिया. सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ने लाइव टेस्ट करके साबित किया कि विदेशी पेट्रोल कितना काला धुआं छोड़ता है और भारतीय किसानों के मक्के-गन्ने से बना इथेनॉल कितना साफ जलता है. इस एक वीडियो ने सरकार के खिलाफ चल रहे पूरे प्रोपेगैंडा की हवा तो निकाल दी. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि सांसद रेड्डी की कैमरे पर एक्सपेरिमेंटल पॉलिटिक्स से E20 के खिलाफ मुहिम खत्म हो जाएगी या हो गई. जो काम हरदीप सिंह पुरी और नितिन गडकरी नहीं कर पाए. वह कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ने एक वीडियो में कर दिया.
इंजीनियर से राजनेता तक का सफर
कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी सिर्फ एक राजनेता नहीं हैं. उनकी प्रोफाइल देश के 99% नेताओं से बिल्कुल अलग और बेहद हाई-प्रोफाइल है. विश्वेश्वर रेड्डी का ताल्लुक तेलंगाना के राजनीतिक परिवार से है. उनके दादा के.वी. रंगा रेड्डी आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं. उन्हीं के नाम पर रंगा रेड्डी जिले का नाम रखा गया. उनके ससुर डॉ. प्रताप सी. रेड्डी देश के सबसे बड़े मेडिकल ग्रुप 'अपोलो हॉस्पिटल्स' के फाउंडर हैं. रेड्डी खुद इंजीनियर हैं. उन्होंने अमेरिका के न्यू जर्सी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है. राजनीति में आने से पहले वो अमेरिका में जनरल इलेक्ट्रिक (GE) जैसी दिग्गज कंपनी में काम कर चुके थे. भारत लौटकर उन्होंने हेल्थकेयर आईटी और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कई बिजनेस शुरू किए. उनके नाम पर कई पेटेंट भी दर्ज हैं.
KCR से बीजेपी तक राजनीतिक सफर
एक सफल बिजनेसमैन और इंजीनियर की यह राजनीतिक यात्रा बेहद दिलचस्प रही है. आज बीजेपी के असेट बने कोंडा रेड्डी हमेशा से बीजेपी में नहीं थे. उन्हें तो तेलंगाना आंदोलन के बाद KCR राजनीति में लेकर आए. 2014 में पहली बार चेवेल्ला सीट से TRS के टिकट पर सबसे अमीर सांसदों में से एक बनकर लोकसभा पहुंचे. 2018 में उनके KCR से मतभेद होने लगे तो उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन कर ली. 2018 में राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस ज्वाइन की. तेलंगाना कांग्रेस में भी उनकी ट्यूनिंग जमी नहीं. कांग्रेस की अंदरूनी कलह से परेशान होकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास मॉडल को चुना और 2022 में बीजेपी ज्वाइन कर ली. 2024 में तीसरी बार बीजेपी के टिकट पर शानदार जीत हासिल की. चेवेल्ला बीजेपी के लिए मुश्किल सीट रही. लेकिन कोंडा रेड्डी ने अपने दम पर जीतकर खुद को बीजेपी में भी जमा लिया.
₹4.568 करोड़ से ज्यादा की पारिवारिक संपत्ति
उनकी पत्नी संगीता रेड्डी. अपोलो हॉस्पिटल्स के संस्थापक डॉ. प्रताप सी. रेड्डी की बेटी हैं और खुद अपोलो ग्रुप की जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर (JMD) हैं. कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी की कुल पारिवारिक संपत्ति ₹4.568 करोड़ से अधिक है. वह 2024 के लोकसभा चुनाव में देश के सबसे अमीर उम्मीदवारों की सूची में दूसरे स्थान पर थे. इस विशाल संपत्ति का सबसे बड़ा हिस्सा देश की मशहूर अपोलो हॉस्पिटल्स (Apollo Hospitals) में शेयर हिस्सेदारी है. विश्वेश्वर रेड्डी के पास लगभग ₹973 करोड़ और उनकी पत्नी के पास ₹1.500 करोड़ से अधिक मूल्य के अपोलो के शेयर्स हैं.
अरबपति सांसद. फिर भी टॉयलेट की सफाई
एक अरबपति सांसद होने के बावजूद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी खुद सरकारी स्कूलों के टॉयलेट साफ करने और समाज में श्रम के सम्मान (Dignity of Labor) को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं. अमेरिका में पढ़ाई के दौरान खुद बाथरूम साफ करने के अनुभव और पीएम मोदी के स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरित होकर. उन्होंने न सिर्फ अपने हाथों से स्कूलों के टॉयलेट साफ किए. बल्कि एक इंजीनियर के तौर पर इसका एक सस्टेनेबल समाधान भी निकाला. उन्होंने विशेष 'स्कूल टॉयलेट क्लीनिंग ट्रक' (Swachh Trucks) डिजाइन किए. जो पानी की कमी वाले ग्रामीण इलाकों के 500 से अधिक सरकारी स्कूलों में जाकर रोजाना टॉयलेट की प्रेशर क्लीनिंग करते हैं. इस काम को गरिमा देने के लिए उन्होंने सफाई कर्मचारियों को विशेष यूनिफॉर्म और अच्छी सैलरी दी. और उनके इस बेहतरीन तकनीकी सामाजिक मॉडल की खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सराहना कर चुके हैं.
आखिर क्यों राजनीतिक दलों के लिए 'असेट' हैं रेड्डी?
अब सवाल यह है कि क्यों कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी जैसे नेता किसी भी राजनीतिक दल के लिए सबसे बड़े 'असेट' बन जाते हैं? जब एक पारंपरिक नेता भाषण देता है. तो जनता उसे राजनीति मानती है. लेकिन जब अमेरिका से पढ़ा एक इंजीनियर-इन्वेस्टर वैज्ञानिक तर्कों के साथ बात करता है. तो जनता उस पर तुरंत भरोसा करती है.
नीतियों को जनता तक पहुंचाने का तरीका
सरकार की नीतियों जैसे इथेनॉल ब्लेंडिंग को फाइलों से निकालकर आम जनता की भाषा में समझाना हर किसी के बस की बात नहीं होती. रेड्डी ने बिना किसी विवाद के सरकार को सही साबित कर दिया. पार्टी और सरकार के बचाव के लिए रेड्डी जैसे नेता किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं चाहे वो हाथ में ज्वलनशील पदार्थ लेकर खुद लाइव प्रयोग करना ही क्यों न हो. वे सिर्फ हाई-कमांड के आदेश का इंतजार नहीं करते. बल्कि खुद फ्रंटफुट पर आकर विपक्ष के बाउंसरों पर छक्का मारते हैं.
सोशल मीडिया के दौर में 'कम्युनिकेटर' की जरूरत
डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में पार्टियों को सिर्फ चुनाव जीतने वाले 'बाहुबली' या 'चुनावी रणनीतिकार' नहीं चाहिए. पार्टियों को ऐसे 'कम्युनिकेटर' चाहिए जो सरकार की नीतियों को सही ठहराने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा सकें. कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार के पास सही नीतियां और उसे समझाने वाले सही विजनरी नेता हों. तो विपक्ष के हर नैरेटिव को पलक झपकते ही 'स्वाहा' किया जा सकता है.
मणिशंकर अय्यर के पुराने बयान का जिक्र
उन्होंने संसद के पुराने रिकॉर्ड्स का हवाला देते हुए बताया कि साल 2005 में खुद कांग्रेस के नेता मणिशंकर अय्यर ने लोकसभा में इथेनॉल को देश के लिए बेहतरीन ईंधन बताया था और E50 (50% इथेनॉल) तक मिलाने की वकालत की थी. रेड्डी ने तंज कसते हुए कहा. "राहुल गांधी को एक बार फोन करके अपने ही नेता मणिशंकर अय्यर से पूछना चाहिए कि उन्होंने तब ऐसा क्यों कहा था?" इस बयान ने स्टोरी को एक बड़ा पॉलिटिकल मोड़ दे दिया है.
नितिन गडकरी के विजन को मिला समर्थन
सांसद का यह कदम सीधे तौर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के उस बड़े विजन को सपोर्ट करता है. जिसके तहत भारत सरकार ने घोषणा की थी कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम की वजह से भारत ने कच्चे तेल के आयात में ₹1.40 लाख करोड़ से ज्यादा की विदेशी मुद्रा (फॉरेन एक्सचेंज) बचाई है. रेड्डी का यह प्रयोग नितिन गडकरी और हरदीप सिंह पुरी (पेट्रोलियम मंत्री) के दावों को जमीनी स्तर पर जनता तक पहुंचाने का एक बेहतरीन जरिया बन गया है.
E20 पेट्रोल को लेकर क्या हैं लोगों के सवाल?
E20 पेट्रोल यानी 20% इथेनॉल मिक्स पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया और कार चलाने वालों का दावा ये है कि इसके इस्तेमाल से गाड़ियों के माइलेज में कमी आ रही है. पुराने इंजनों को नुकसान पहुंच रहा है. इसमें अब डिबेट इसलिए नहीं रहा कि ये लगभग मान लिया गया है कि E20 से एवरेज 5 से 10 फीसदी तक गिर जाता है. इसके अलावा. इथेनॉल में नमी (पानी) सोखने की प्रवृत्ति होती है. जिससे पुरानी गाड़ियों के फ्यूल टैंक. पाइपलाइनों और इंजन के पार्ट्स में जंग (Corrosion) लगने और रबर के पुर्जे गलने का खतरा बढ़ जाता है. लोग शिकायत कर रहे हैं कि सरकार बिना गाड़ियों को अपग्रेड किए या पुरानी गाड़ियों के लिए विकल्प छोड़े इस ईंधन को ज़बरदस्ती लागू कर रही है. जिससे उनके मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया है.
लाइव प्रयोग के बाद छिड़ी नई बहस
सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी के इस लाइव प्रयोग के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में मिली-जुली लेकिन बेहद तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. जहां एक तरफ बीजेपी समर्थकों ने उनके इस अनूठे और वैज्ञानिक अंदाज की जमकर तारीफ की है और इसे 'प्रोपेगैंडा के खिलाफ सबसे सटीक जवाब' बताया है. लेकिन अभी भी लोग उनकी थ्योरी को मान नहीं रहे. विरोध में ये दलील दी जा रही है कि खुली कटोरी में इथेनॉल को जलाकर यह तो साबित किया जा सकता है कि यह कम प्रदूषण फैलाता है. लेकिन इससे यह कतई साबित नहीं होता कि बंद इंजन के भीतर हाई-प्रेशर और अत्यधिक तापमान पर यह पुरानी गाड़ियों के रबर पार्ट्स. पाइपलाइन और इंजन को नुकसान नहीं पहुंचाएगा.
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