Shesh Bharat: मणिशंकर अय्यर ने फोड़ा सियासी बम, क्या 'INDIA' गठबंधन में शुरू हुई वर्चस्व की जंग?

Shesh Bharat: मणिशंकर अय्यर के बयान के बाद विपक्षी गठबंधन में 2029 के प्रधानमंत्री चेहरे को लेकर बहस तेज हो गई है. स्टालिन ने खुद को रेस से अलग रखने के संकेत दिए, जबकि ममता बनर्जी ने जिम्मेदारी मिलने पर तैयार रहने की बात कही. राहुल गांधी की भूमिका पर भी चर्चा जारी है.

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रूपक प्रियदर्शी

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Shesh Bharat: विपक्षी राजनीति में इन दिनों एक बयान ने खलबली मचा दी है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने खुद को 'राहुलवादी' नहीं बल्कि 'राजीववादी' बताकर अपनी ही पार्टी के नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अय्यर का मानना है कि प्रधानमंत्री पद के लिए राहुल गांधी के बजाय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ज्यादा उपयुक्त चेहरा हो सकते हैं.

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स्टालिन: क्या बनेंगे 21वीं सदी के कामराज?

चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान अय्यर ने स्टालिन की तुलना दिग्गज नेता कामराज से की और उन्हें गठबंधन की कमान सौंपने की वकालत की. हालांकि, स्टालिन ने बहुत ही सधे हुए अंदाज में इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने अपने पिता करुणानिधि के पुराने अंदाज में कहा, "मैं अपनी ऊंचाई जानता हूं." इसका साफ मतलब है कि स्टालिन फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति तक ही सीमित रहना चाहते हैं और खुद को 'किंग' के बजाय 'किंगमेकर' की भूमिका में देख रहे हैं.

ममता बनर्जी की दावेदारी और राहुल का पक्ष

वहीं दूसरी ओर, कोलकाता से ममता बनर्जी के तेवर अलग नजर आ रहे हैं. उन्होंने संकेत दिया है कि अगर उन्हें जिम्मेदारी मिली, तो वह पीछे नहीं हटेंगी. हालांकि, वह बंगाल छोड़े बिना गठबंधन का मार्गदर्शन करना चाहती हैं. दूसरी तरफ, उमर अब्दुल्ला जैसे नेता मजबूती से राहुल गांधी के साथ खड़े हैं. उनका कहना है कि बीजेपी और पीएम मोदी के खिलाफ असली लड़ाई राहुल ही लड़ रहे हैं और उनकी मेहनत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

क्यों मजबूत है ममता और स्टालिन का पलड़ा?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्टालिन और ममता का 'बायोडेटा' चुनाव जीतने के मामले में राहुल से ज्यादा मजबूत है. ममता ने 2011 से बंगाल में बीजेपी को सत्ता से दूर रखा है. वहीं, स्टालिन ने 2019, 2021 और 2024 के चुनावों में तमिलनाडु में क्लीन स्वीप कर अपनी ताकत साबित की है.

फिलहाल, 2029 की चुनावी बिसात बिछनी शुरू हो गई है. बीजेपी ने भी इस पर चुटकी लेते हुए कहा है कि अब तो कांग्रेस के अपने नेताओं को ही राहुल गांधी पर भरोसा नहीं रहा.

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