संसद में परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पास नहीं होने पर आया योगेंद्र यादव का रिएक्शन, सरकार को लेकर कही ये बातें!

Yogendra Yadav statement: परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पास न होने पर योगेंद्र यादव का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने मोदी सरकार पर संघीय ढांचे से छेड़छाड़ की साजिश का आरोप लगाया और कहा कि यह सिर्फ अस्थायी राहत है. जानिए 2027 की जनगणना, सीट बंटवारे और महिला आरक्षण को लेकर उन्होंने क्या चेतावनी दी.

Yogendra Yadav statement
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न्यूज तक डेस्क

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संसद में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक के पास न होने पर राजनीतिक विश्लेषक और स्वराज इंडिया के संस्थापक योगेंद्र यादव ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इसे मोदी सरकार की हार बताते हुए कहा कि यह देश के संघीय ढांचे को असंतुलित करने की एक 'चालाक साजिश' थी, जो फिलहाल टल गई है. हालांकि, यादव ने आगाह किया कि यह राहत केवल थोड़े समय के लिए है और असली चुनौती 2027 में फिर सामने आएगी.

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'महिलाओं के नाम पर राजनीति का खेल'

योगेंद्र यादव ने वीडियो संदेश में कहा कि औरतों के नाम पर बीजेपी अपना राजनीतिक आरक्षण सुनिश्चित करने का खेल खेल रही थी, जो फिलहाल रुक गया है. उन्होंने कहा, 'इसे केवल जीत-हार के चश्मे से न देखें. यह मोदी सरकार की हार जरूर है, लेकिन इसे जनता की अंतिम जीत की तरह मत देखिए. यह बस एक अस्थायी राहत है कि संविधान में राज्यों की सीटों के प्रावधान को हटाकर उसे साधारण कानून में डालने की साजिश कामयाब नहीं हुई.' 

संघीय ढांचे को बचाने की राहत

यादव ने विस्तार से बताया कि राहत इस बात की है कि तत्काल परिसीमन करके देश की निर्वाचन क्षेत्रों के साथ छेड़खानी करने की कोशिश विफल रही. उन्होंने इसे संघीय ढांचे को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया. उनके अनुसार, जिस तरह से राज्यों के प्रतिनिधित्व को बदलने की कोशिश की जा रही थी, वह लोकतंत्र के लिए खतरनाक था.

2027 में फिर खड़ा होगा सवाल: जनगणना और परिसीमन

योगेंद्र यादव ने चेतावनी दी कि ये सभी सवाल एक साल के भीतर दोबारा सामने आएंगे. 2027 में जनगणना के बाद परिसीमन का मुद्दा फिर से अनिवार्य रूप से उठेगा. उन्होंने कहा, '2027 में जनगणना के बाद महिला आरक्षण का सवाल भी आएगा और राज्यों की सीटों के बंटवारे का सवाल भी मुंह बाए खड़ा होगा. आने वाला एक-डेढ़ साल का समय हमें इन सवालों के ठोस जवाब खोजने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए.'

'जनता की अदालत में हराना होगा षड्यंत्र'

योगेंद्र यादव ने केवल परिसीमन ही नहीं, बल्कि 'वन नेशन वन इलेक्शन' और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि देश के बुनियादी चुनावी ढांचे को बदलने का खेल चल रहा है. यादव ने कहा, 'संसद में तो सरकार की हार हो गई है, लेकिन इस षड्यंत्र को जनता की अदालत में ले जाकर हराना हम सबकी जिम्मेदारी है. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि अगली बार महिलाओं के नाम पर कोई 'शरारत' न हो और उन्हें बिना किसी अड़चन के जल्द से जल्द आरक्षण मिले.' 

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