इसे मतभेद नहीं, मनभेद कहते हैं जो आंध्र प्रदेश के वाईएसआर परिवार में चल रहा है. घर में बेटी की शादी है... शहनाइयां बजने वाली हैं... लेकिन इस खुशी के मौके पर भी सगे भाई-बहन आमने-सामने हैं. बात अब इतनी बिगड़ चुकी है कि घर का मामला घर में सुलझाने की बजाय, देश के सामने प्रेस रिलीज और चिट्ठियों के जरिए लड़ा जा रहा है. आपसी बातचीत का हर रास्ता बंद हो चुका है और अब सिर्फ मीडिया ही बातचीत का जरिया बची है. कोई भी आम इंसान यही कहेगा कि घर का मामला है, भाई-बहन और भाभी बैठकर मिलकर सुलझा लें.
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देश की राजनीति में चंद्रबाबू और जगन रेड्डी दोनों ऐसे नेता माने जाते हैं जिनके बीच कभी किसी पर्सनल बॉन्डिंग की चर्चा नहीं होती. एकाध फोटो को छोड़कर दोनों की एक साथ वाली कोई फोटो भी इंटरनेट पर नहीं है. जगन रेड्डी और चंद्रबाबू के बीच राजनीतिक जंग चल रही है. जब जगन और शर्मिला के बीच शादी के वेन्यू को लेकर जंग तेज है तो चंद्रबाबू नायडू और नारा लोकेश भी भाई-बहन के झगड़े के बहाने घर में घुस गए.
TDP ने इस मौके को लपकने में जरा भी देर नहीं की
जब घर की बात सरेआम होगी, तो विरोधी फायदा क्यों न उठाएं? तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने इस मौके को लपकने में जरा भी देर नहीं की. मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस विवाद में कूदते हुए जगन मोहन रेड्डी को 'कंस मामा' का खिताब दे दिया. नायडू ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो आदमी अपनी सगी भांजी की शादी के लिए पिता का घर नहीं दे सकता, वो अपनी मां और बहन का क्या सगा होगा. नारा लोकेश ने भी चुटकी लेते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में मामा का स्थान भगवान जैसा होता है, लेकिन यहां मामा सुरक्षा का बहाना बनाकर अपनी ही भांजी को घर आने से रोक रहा है.
कहानी एक मां की ममता और एक बेटी की ज़िद से. वाईएस शर्मिला को अपनी बेटी अंजलि की शादी अपने दिवंगत पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी (YSR) के बनाए पुश्तैनी घर यानी बेंगलुरु के येलहंका पैलेस से करनी है. पिता की यादें जुड़ी हैं, इसलिए बेटी का अरमान है कि विदाई इसी आंगन से हो. लेकिन कहानी में ट्विस्ट यहीं आता है. आरोप है कि भाई जगन मोहन रेड्डी ने चालाकी से घर को अपनी सास यानी भारती रेड्डी की मां सुगुणा रेड्डी के नाम पर ट्रांसफर कर दिया है! और अब, इसी तकनीकी पेंच का हवाला देकर शर्मिला को अपनी ही बेटी की शादी उस घर में करने से रोका जा रहा है.
बेंगलुरु का यलहंका पैलेस (Yelahanka Palace) सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि 20 एकड़ में फैला एक आलीशान साम्राज्य है.वाईएस राजशेखर रेड्डी (YSR) ने अपने जीवनकाल में भाई और बहन के लिए बिल्कुल एक जैसे बनवाए थे. बेंगलुरु के इस 20 एकड़ के परिसर में 10 एकड़ जगन का है और 10 एकड़ शर्मिला का. शर्मिला की बेटी अंजलि ने अपना बचपन इसी यलहंका परिसर में बिताया है. शर्मिला का तर्क है कि वह अपनी बेटी की शादी अपने ही हिस्से के परिसर से करना चाहती हैं. लेकिन जगन का कहना है कि यह पूरी प्रॉपर्टी तकनीकी रूप से उनकी सास यानी भारती रेड्डी की मां सुगुणा रेड्डी के नाम पर रजिस्टर्ड हो चुकी है, इसलिए वहां बाहरी लोगों का आना उनकी सुरक्षा के खिलाफ है.
फैसला केवल शर्मिला के लिए नहीं है
हालांकि जब जगन ने शर्मिला को शादी के लिए घर देने से मना किया तो चिट्ठी लिखते समय डियर शर्मी कहते हुए संबोधित किया. जगन ने पत्र की शुरुआत में लिखा, पिछले सात सालों में हमारे बीच जो कुछ भी घटा है, उसके बावजूद मैं दिल से अंजलि को आजीवन खुशियों और प्यार की शुभकामनाएं देता हूं. शादी के कारण घर के परिसर में भारी संख्या में बाहरी और अज्ञात लोग आएंगे—जैसे कैटर्स, डेकोरेटर्स, फ्लोरिस्ट, इवेंट मैनेजर्स, फोटोग्राफर्स और वीडियोग्राफर्स. इन लोगों की आवाजाही और घर और उसके आसपास के सुरक्षा क्षेत्रों के फोटो-वीडियो सोशल मीडिया या बाहर सर्कुलेट होने से उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा व निजता को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है. जगन ने लिखा कि यह फैसला केवल शर्मिला के लिए नहीं है, बल्कि अगर उनकी खुद की बेटियां हर्षा या वर्षा भी होतीं, तब भी वह सुरक्षा कारणों से यही स्टैंड लेते. जगन ने साफ किया कि वह शादी के खिलाफ नहीं हैं. वो चाहें तो हैदराबाद में लोटस पॉन्ड वाला घर शादी के लिए इस्तेमाल कर सकती हैं.
वाईएस शर्मिला की बेटी वाईएस अंजलि रेड्डी और डॉ. सोमला रघुरमा रेड्डी की शादी को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. शादी 25 नवंबर को तय है. इससे पहले 24 नवंबर को सगाई और दिसंबर में रिसेप्शन की तारीखें रखी गई हैं. दोनों पक्षों की ओर से शादी के कार्ड बांटे जा चुके हैं और सोशल मीडिया पर भी वायरल हो चुके हैं. कार्ड्स में शादी का वेन्यू येलहंका पैलेस, बेंगलुरु' ही लिखा है.
भाई जगन मोहन रेड्डी द्वारा लिखित में मना किए जाने के बावजूद, वाईएस शर्मिला अपने फैसले पर अडिग हैं. शर्मिला के करीबियों के अनुसार, वह शादी येलहंका परिसर में अपने वाले हिस्से से ही करेंगी. वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन सहित कई बड़े राजनेताओं को इसी पते के साथ निमंत्रण पत्र व्यक्तिगत रूप से सौंप चुकी हैं.
बेटी की विदाई पिता के घर से होगी या किसी कन्वेंशन सेंटर से, यह तो वक्त बताएगा. लेकिन बिना साइन वाले बयानों और मीडिया के जरिए लड़ी जा रही इस जंग ने यह साफ कर दिया है कि वाईएसआर परिवार की यह दरार अब कभी न भरने वाला एक गहरा जख्म बन चुकी है.
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