धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को 'आप' ने बताया युवाओं की ऐतिहासिक जीत, कहा- 'छात्रों के संघर्ष के आगे झुकी केंद्र सरकार'

न्यूज तक डेस्क

• 08:44 PM • 26 Jul 2026

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आम आदमी पार्टी पंजाब ने इसे लाखों छात्रों और युवाओं की जीत बताया है. पार्टी का दावा है कि लगातार हुए छात्र आंदोलनों और पेपर लीक के विरोध ने केंद्र सरकार को झुकने पर मजबूर किया. साथ ही परीक्षा और भर्ती प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग भी दोहराई गई.

भाजपा की केंद्र सरकार की विद्यार्थी विरोधी नीतियों के खिलाफ-आप
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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लाखों विद्यार्थियों और युवाओं की बड़ी जीत बताया. पार्टी ने कहा कि यह उन छात्रों की जीत है, जो लगातार पेपर लीक, परीक्षाओं में धांधली और केंद्र सरकार की कथित छात्र-विरोधी नीतियों के खिलाफ लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे. इससे पहले दिन में, आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार की छात्र-विरोधी कार्यप्रणाली के खिलाफ पूरे पंजाब में 'थाली बजाओ, तानाशाह भगाओ' के नारे के साथ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. छात्रों का समर्थन करने के लिए आप के मंत्री, सांसद, विधायक, पदाधिकारी और हजारों कार्यकर्ता राज्य के हर जिले में सड़कों पर उतरे. सभी ने बार-बार लीक होते पर्चों और देश की चरमराती शिक्षा व भर्ती व्यवस्था को लेकर केंद्र से जवाब मांगा.

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धर्मेंद्र प्रधान के पद से हटने पर प्रतिक्रिया देते हुए आप के वरिष्ठ नेता व कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, "धर्मेंद्र प्रधान का त्यागपत्र युवा शक्ति की एकजुटता की विशाल मिसाल है. पीएम नरेंद्र मोदी को बिना देर किए इसे मंजूर करना चाहिए. आखिरकार, भारतीय जनता पार्टी को युवाओं के अडिग रुख के सामने झुकना ही पड़ा. आशा है कि इस फैसले से शिक्षा तंत्र के पुनर्गठन और पर्चा लीक की रोकथाम जैसे बड़े व बुनियादी सुधार संभव हो सकेंगे. इंकलाब जिंदाबाद."

दूसरी ओर, आप सांसद मालविंदर सिंह कंग ने इस इस्तीफे को देश के करोड़ों छात्रों, नौजवानों और लोकतांत्रिक मूल्यों व न्याय के लिए आवाज उठाने वाले हर नागरिक की बहुत बड़ी जीत माना.

आप सांसद ने पुलिस की सख्ती और उत्पीड़न के बावजूद विरोध का नेतृत्व करने वाले छात्र-युवाओं को बधाई दी. उन्होंने कहा, "भाजपा नीत सरकार ने इस लोकतांत्रिक प्रदर्शन को कुचलने का हर संभव प्रयास किया, परंतु विद्यार्थियों के साहस और सामर्थ्य ने केंद्र को पीछे हटने पर बाध्य कर दिया. प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर लाठियां बरसाई गईं, कई विद्यार्थियों को अस्पताल भर्ती कराना पड़ा, और तो और उनके भोजन-पानी के प्रबंध तक में बाधाएं डाली गईं. इतनी बाधाओं के बाद भी छात्र डटे रहे और सरकार को फैसला लेने पर मजबूर करने तक अपना अहिंसक आंदोलन चलाते रहे."

मालविंदर सिंह कंग ने स्पष्ट किया कि केवल त्यागपत्र से बात नहीं बनेगी. उन्होंने मांग रखी कि लाखों युवाओं के भविष्य और उम्मीदों को चोट पहुँचाने वाले पेपर लीक को हमेशा के लिए समाप्त करने, पारदर्शिता लाने और जवाबदेही तय करने के लिए देश की पूरी परीक्षा व भर्ती प्रणाली में व्यापक बदलाव किए जाने चाहिए.

कंग ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को तानाशाही रवैये के प्रति सचेत भी किया. उन्होंने कहा, "यदि केंद्र सरकार ऐसे ही विद्यार्थियों, अन्नदाताओं, कर्मचारियों और अन्य वर्गों की बातों की अनदेखी करती रही, तो आम जनता लोकतंत्र और अपने संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा हेतु पुनः सड़कों पर उतरने को विवश होगी."

छात्रों और युवाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए आम आदमी पार्टी ने घोषणा की कि जब तक देश का शिक्षा ढांचा पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और उत्तरदायी नहीं बन जाता, तब तक वह सड़क से लेकर संसद भवन तक युवाओं की आवाज मजबूती से उठाती रहेगी.