धर्मेंद्र प्रधान ने छोड़ी कुर्सी, अब पंजाब के 2 मंत्रियों पर क्यों बढ़ा इस्तीफे का दबाव?

कुबूल अहमद

• 11:15 AM • 26 Jul 2026

पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पंजाब की भगवंत मान सरकार पर सियासी संकट गहरा गया है. विपक्ष ने पेपर लीक के मुद्दों पर मुख्यमंत्री और मंत्रियों को घेरते हुए इस्तीफे की मांग की है. कांग्रेस और अकाली दल ने इसके विरोध में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है.

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Punjab Paper Leak: केंद्र सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने का असर अब पंजाब की राजनीति पर साफ दिखाई देने लगा है. राष्ट्रीय स्तर पर पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय होने के बाद, पंजाब के विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है. कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने राज्य के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह को तुरंत पद से हटाने की मांग तेज कर दी है.

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विपक्ष को मिला बड़ा राजनीतिक हथियार

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से विपक्षी दलों को एक मजबूत नैतिक आधार मिल गया है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने इसे युवाओं के संघर्ष की जीत बताया है. उनका कहना है कि अगर केंद्र सरकार अपने मंत्री पर कार्रवाई कर सकती है, तो पंजाब की 'आप' सरकार क्यों नहीं? विपक्ष का आरोप है कि पंजाब में पिछले कुछ सालों में एक के बाद एक कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है.

पंजाब में पेपर लीक के कई मामले

विपक्ष का दावा है कि आम आदमी पार्टी के कार्यकाल के दौरान राज्य में फार्मेसी भर्ती परीक्षा, 12वीं कक्षा की अंग्रेजी परीक्षा, ग्रुप-बी परीक्षा और फार्मासिस्ट भर्ती समेत कई पेपर लीक हुए हैं. कांग्रेस और अकाली दल का आरोप है कि जब युवाओं ने इन घोटालों के खिलाफ आवाज उठाई, तो सरकार ने उनकी बात सुनने के बजाय पुलिस से लाठीचार्ज करवाया. अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने आरोप लगाया कि पंजाब में साढ़े चार साल में कई पेपर लीक हुए हैं, जिससे पांच लाख से ज्यादा युवा प्रभावित हुए हैं. उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान और 'आप' नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया है.

बीजेपी और अकाली दल का कड़ा रुख

दिल्ली के मंत्री और बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि दिल्ली में छात्र आंदोलनों में आगे रहने वाले नेता पंजाब के युवाओं के भविष्य पर चुप क्यों हैं. अकाली दल और कांग्रेस दोनों ने चेतावनी दी है कि यदि मंत्रियों ने खुद इस्तीफा नहीं दिया तो वे दिल्ली की तर्ज पर पंजाब की सड़कों पर उतरकर बड़ा जन आंदोलन करेंगे.

फिलहाल, इस राजनीतिक भूचाल के बाद पंजाब सरकार और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस पर चौतरफा दबाव बढ़ गया है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और गरमाने की पूरी संभावना है.