पंजाब का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच चुका है. विधानसभा चुनावों का बिगुल बजने से पहले ही शह और मात का खेल शुरू हो गया है और इस सियासी घमासान के बीच, दिल्ली से लेकर पंजाब तक हलचल बेहद तेज है. शुक्रवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान दिल्ली पहुंचे. सीधे आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के आवास पर एक हाई-प्रोफाइल मीटिंग हुई. बंद कमरे में घंटों मंथन चला और एजेंडा सिर्फ एक था, पंजाब फतह की रणनीति.
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लेकिन खबर सिर्फ मुलाकात की नहीं है... खबर इससे कहीं बड़ी है. इस महामंथन में उम्मीदवारों की पहली कैंडिडेट लिस्ट पर लगभग मुहर लग चुकी है! विरोधियों के पत्ते खोलने से पहले ही, आम आदमी पार्टी अपने सिपहसालारों को मैदान में उतारने के लिए पूरी तरह तैयार है! इस बैठक में केजरीवाल, मान के अलावा मौजूद रहे मनीष सिसोदिया समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता. पंजाब के कैबिनेट मंत्री एवं प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा भी ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल हुए.
बैठक में पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर गहन समीक्षा की गई है. पार्टी ने जमीन पर जो इंटरनल सर्वे कराए थे, उनकी रिपोर्ट कार्ड को सामने रखा गया. कई रिपोर्ट्स में दावा है कि कुछ मौजूदा विधायकों के रिपोर्ट कार्ड उम्मीद के मुताबिक नहीं हैं, यानी कई बड़े नामों के टिकट पर आज कैंची चल सकती है!
शनिवार को पीएसी की बैठक होने वाली है जिसमें इन्हीं नामों पर विचार विमर्श किया जाएगा. खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ कर दिया है कि शनिवार को दोपहर 12 बजे पार्टी अपनी पहली लिस्ट जारी करने जा रही है! सीएम ने कहा कि आम आदमी पार्टी की लिस्ट पूरी तरह से सर्वे पर आधारित है. इस बार उन्हीं उम्मीदवारों को टिकटें मिलेंगी, जिन्हें लोग चाहेंगे. सीएम के इस ब्यान के बाद पंजाब में हलचल तेज हो गई है.
उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी करना एक सोची-समझी रणनीति
आम आदमी पार्टी (AAP) का चुनाव आचार संहिता लगने से महीनों पहले अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी करना एक सोची-समझी और गहरी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है. शुरुआती सूची में घोषित उम्मीदवारों को अपने-अपने हलकों में जाकर प्रचार करने, घर-घर जाने और वोटर्स के साथ मजबूत रिश्ता बनाने के लिए 3 से 4 महीने का अतिरिक्त समय मिल जाएगा. लंबित मुद्दों का निपटारा: सत्ता में होने के कारण, पार्टी के उम्मीदवारों को अपने क्षेत्र के अधूरे या लंबित पड़े सरकारी व सार्वजनिक कार्यों को समय रहते पूरा कराने का मौका मिलेगा, जिससे जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाए. जब विरोधी दल (कांग्रेस, अकाली दल या भाजपा) अभी सिर्फ गठबंधन और सीटों के बंटवारे पर माथापच्ची कर रहे होंगे, तब 'आप' के उम्मीदवार मैदान में प्रचार शुरू कर चुके होंगे. समय से पहले नाम तय करके पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह पूरी तरह एकजुट है और उसकी चुनावी तैयारी विपक्ष से कहीं आगे है.
5 साल के कामकाज के रिपोर्ट कार्ड पर मैदान में है
2022 में 'बदलाव' के नाम पर रिकॉर्ड 92 सीटें जीतने वाली 'आप' इस बार अपने 5 साल के कामकाज के रिपोर्ट कार्ड पर मैदान में है, जिससे जनता की उम्मीदों का भारी दबाव है. पंजाब का नशा संकट (Drug Crisis) और कानून-व्यवस्था विपक्ष का सबसे बड़ा हथियार बन चुके हैं. हाल ही में मंसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह जोटा की हत्या के बाद से सरकार इस मुद्दे पर चौतरफा घिरी है. अप्रैल 2026 में पंजाब से 'आप' के कई राज्यसभा सांसदों (जैसे राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, संदीप पाठक आदि) के इस्तीफे और भाजपा में शामिल होने से पार्टी के कैडर और सांगठनिक हौसले को बड़ा झटका लगा है.
वहीं कांग्रेस की सबसे बड़ी दुश्मन उसकी अपनी अंदरूनी कलह है. हाल ही में अमरेंद्र सिंह राजा वड़िंग की जगह परगट सिंह को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद भी चरनजीत सिंह चन्नी, प्रताप सिंह बाजवा और सुखजिंदर रंधावा जैसे क्षत्रपों के बीच आपसी खींचतान जारी है. देखना होगा कि पंजाब में कौन बाजी मारेगा...
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