पंजाब कांग्रेस की राजनीति में लंबे समय से सुलग रही आंतरिक कलह आखिरकार एक बड़े बदलाव के साथ सतह पर आ गई है. पार्टी की कमान संभाल रहे राजा वड़िंग की कुर्सी अब छिन चुकी है और उनकी प्रधानी समाप्त हो गई है. महीनों से पार्टी के भीतर चल रहे गतिरोध और गुटबाजी के बीच दिल्ली दरबार से आए एक कड़े फरमान ने इस पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है, जिसके चलते राजा वड़िंग को आखिरकार अपने पद से हटना पड़ा है.
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सचिन पायलट की सीक्रेट रिपोर्ट और दिल्ली का फरमान
सूत्रों और अंदरखाने की खबरों के मुताबिक, पंजाब कांग्रेस में मचे घमासान को शांत करने के लिए पार्टी आलाकमान ने पूरी स्थिति पर पैनी नजर रखी हुई थी. इस मामले में सचिन पायलट की तरफ से तैयार की गई एक गुप्त (सीक्रेट) रिपोर्ट ने अहम भूमिका निभाई. इस रिपोर्ट और दिल्ली दरबार से मिले सख्त निर्देशों के बाद राजा वड़िंग के लिए मैदान छोड़ना अनिवार्य हो गया, जिससे साफ हो गया कि पार्टी नेतृत्व अब राज्य इकाई में और अधिक अंतर्कलह बर्दाश्त करने के मूड में नहीं था.
चरणजीत सिंह चन्नी की जीत और असली खिलाड़ियों का खेल
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे चरणजीत सिंह चन्नी और उनके खेमे की रणनीतिक बढ़त साफ तौर पर दिखाई दे रही है. राजा वड़िंग के इस्तीफे और चरणजीत सिंह चन्नी की इस सियासी जीत के पीछे राहुल गांधी की एक फोन कॉल को सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है. राहुल गांधी की उस एक महत्वपूर्ण कॉल ने पंजाब कांग्रेस के खेल को पूरी तरह से पलट कर रख दिया, जिसके बाद यह बड़ा बदलाव देखने को मिला है.
कांग्रेस अध्यक्ष की रेस में कौन-कौन?
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बदलने की तैयारी में है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि प्रदेश संगठन की कमान अब किसे सौंपी जाएगी और 2027 के चुनाव में पार्टी की अगुवाई कौन करेगा. कांग्रेस हाईकमान ऐसे चेहरे की तलाश में है, जो राजा वड़िंग और चरणजीत सिंह चन्नी के गुटों के बीच संतुलन बनाकर संगठन को एकजुट रख सके. प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है. सिंगला को पंजाब में एक हिंदू चेहरे और केंद्रीय नेतृत्व के करीबी नेता के तौर पर देखा जा रहा है.
हाईकमान को उम्मीद है कि उनका तटस्थ रुख दोनों खेमों के बीच जारी अंदरूनी खींचतान को कम करने में मदद कर सकता है. इसके अलावा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के नाम की भी चर्चा है. सिंगला और बाजवा के साथ पूर्व ओलंपियन परगट सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखजिंदर सिंह रंधावा, राणा केपी सिंह और सुखबिंदर सिंह सरकारिया के नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल हैं. कांग्रेस ऐसे नेता को प्रदेश की कमान सौंपना चाहती है, जो जाट सिख, दलित और हिंदू समुदायों के बीच सामाजिक और राजनीतिक संतुलन कायम कर सके.
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