पंजाब में विधानसभा चुनाव करीब आते ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. 117 सीटों वाली पंजाब विधानसभा में सत्ता वापसी और आम आदमी पार्टी (भगवंत मान सरकार) को बेदखल करने के लिए कांग्रेस को बहुमत का आंकड़ा पार करना होगा. पिछली बार कांग्रेस महज 18 सीटों पर सिमट गई थी. ऐसे में चुनाव से पहले ही पंजाब कांग्रेस के भीतर टिकट बंटवारे के मापदंडों को लेकर घमासान शुरू हो गया है. एक तरफ पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग एक परिवार में एक ही टिकट देने की पैरवी कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पार्टी के वरिष्ठ नेता व सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा का मानना है कि टिकट का आधार सिर्फ प्रत्याशी की जीत (विनेबिलिटी) होना चाहिए.
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राजा वडिंग की मांग: एक परिवार में एक से ज्यादा टिकट न मिले
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि चुनाव में नए चेहरों और युवाओं को मौका मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े नेता अपने बेटों और रिश्तेदारों के लिए कई-कई टिकट मांगते हैं, जिससे कार्यकर्ताओं का हक मारा जाता है. वडिंग ने कहा कि यद्यपि टिकट बांटने का अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान (राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और भूपेश बघेल) के हाथ में है, लेकिन वे एक मजबूत वकील की तरह इस बात की वकालत करेंगे कि किसी भी एक परिवार को एक से ज्यादा टिकट न दी जाए ताकि आम युवाओं को आगे आने का मौका मिले.
सुखजिंदर रंधावा का पलटवार: जिताऊ उम्मीदवार को मिलें चार टिकट
राजा वडिंग के बयान के जवाब में कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कड़ा रुख अपनाया. डेरा बाबा नानक में आयोजित सभा के दौरान रंधावा ने कहा कि टिकट बंटवारे में मुख्य पैमाना उम्मीदवार की जीत की क्षमता होना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर किसी एक परिवार में चार ऐसे लोग हैं जो चुनाव जीतकर पार्टी की झोली में सीट डाल सकते हैं, तो कांग्रेस को उन्हें चार टिकट देने से भी पीछे नहीं हटना चाहिए. रंधावा का तर्क है कि चुनाव जीतने के लिए जो भी जरूरी होगा, पार्टी को वही कदम उठाना चाहिए. हालांकि, बाद में सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं में काफी उत्साह है और वे एकजुट होकर ही चुनाव जीतेंगे.
अंदरूनी कलह से परेशान हाईकमान
पंजाब कांग्रेस में पहले से ही अध्यक्ष पद को लेकर राजा वडिंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खेमे के बीच खींचतान चल रही थी. हालांकि, पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल और हाईकमान ने साफ कर दिया है कि प्रदेश अध्यक्ष के पद पर कोई बदलाव नहीं होगा और राजा वडिंग ही इस पद पर बने रहेंगे. लेकिन अब टिकट बंटवारे को लेकर सामने आए इस नए विवाद ने कांग्रेस हाईकमान के माथे पर एक बार फिर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि हाईकमान टिकट बंटवारे के इस विवाद को कैसे सुलझाता है.
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