पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान ने सफलता के 500 दिन पूरे कर लिए हैं. इस विशेष अभियान के तहत पंजाब पुलिस ने नशा तस्करों के आर्थिक साम्राज्य को ध्वस्त करते हुए उनकी 319 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां जब्त की हैं. सख्त कानूनी कार्रवाई और जनभागीदारी की बदौलत पुलिस ने पिछले 500 दिनों में 68,850 से अधिक ड्रग तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा है.
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ड्रग माफिया के खिलाफ इतिहास की सबसे बड़ी कार्रवाई: डीजीपी गौरव यादव
पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) गौरव यादव ने अभियान के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि 1 मार्च 2025 को शुरू हुए इस अभियान के तहत अब तक एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत 52,432 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं. गिरफ्तार किए गए तस्करों में 629 'बड़े मगरमच्छ' (मुख्य तस्कर) शामिल हैं, जिनके पास से भारी मात्रा में हेरोइन बरामद की गई है.
डीजीपी ने यह भी बताया कि पंजाब में एनडीपीएस मामलों में दोषियों को सजा दिलाने की दर (दोषसिद्धि दर) 89 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो देश में सबसे अधिक है. यह पुलिस की बेहतरीन जांच और मजबूत पैरवी का नतीजा है.
तस्करों की संपत्ति होगी जमींदोज: एडीजीपी नीलाभ किशोर
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के प्रमुख एडीजीपी नीलाभ किशोर ने साफ किया कि ड्रग माफिया के प्रति पुलिस 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है. नशे की कमाई से बनाई गई ₹319 करोड़ की संपत्तियों को कुर्क करने के साथ-साथ सरकारी जमीन पर किए गए उनके अवैध निर्माणों को भी बुलडोजर से ध्वस्त किया गया है.
'सेफ पंजाब' हेल्पलाइन और जनता का साथ
इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत पंजाब की जनता बनी है. पुलिस की ‘सेफ पंजाब एंटी-ड्रग हेल्पलाइन’ (97791-00200) पर लोगों ने बिना किसी डर के 46,342 गुप्त सूचनाएं दीं, जिनकी मदद से 22,960 तस्करों को दबोचा गया. इसके अलावा, राज्य के गांवों में बनी 24,000 से अधिक ग्राम रक्षा समितियां भी जमीनी स्तर पर पुलिस की आंख और कान बनकर काम कर रही हैं.
सजा नहीं, सुधार का मौका भी दे रही सरकार
एक तरफ जहां तस्करों पर कड़ा प्रहार किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ नशे की लत के शिकार हुए लोगों को सुधारने का मौका भी दिया जा रहा है. सरकार ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 64ए के तहत 10,917 लोगों को अदालती कार्रवाई से छूट देकर उन्हें जेल भेजने के बजाय नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्रों (रिहैबिलिटेशन सेंटर) में इलाज की सुविधा दी है, ताकि वे मुख्यधारा में लौट सकें.
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