पंजाब पुलिस की महत्वाकांक्षी परियोजना 'सड़क सुरख्या फोर्स' (SSF) अब राज्य में सड़क सुरक्षा के नए मानक तय कर रही है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन और सैटेलाइट डेटा को एकीकृत कर एसएसएफ पंजाब को भारत का पहला 3D पुलिस बल बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
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47 हजार से अधिक लोगों की बचाई जान
पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने बताया कि फरवरी 2024 से जनवरी 2026 तक एसएसएफ ने 43,983 सड़क दुर्घटनाओं में त्वरित मदद पहुंचाकर 47,386 लोगों की जान बचाई है. इस दौरान 19,973 लोगों को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि 27,413 घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया.
एसएसएफ की तैनाती वाले प्रमुख मार्गों पर दुर्घटना मौतों में 45 से 48 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है. 2023 में इन मार्गों पर मौतों का आंकड़ा 1,955 था, जो 2024 में घटकर 1,016 रह गया- यानी एक वर्ष में लगभग 940 लोगों की जिंदगी बचाई गई.
'प्लैटिनम 10 मिनट' मॉडल और हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर
विशेष पुलिस महानिदेशक (SDGP - ट्रैफिक एवं रोड सेफ्टी) अमरदीप सिंह राय के अनुसार, यह बल 'प्लैटिनम 10 मिनट' के सिद्धांत पर काम करता है. एसएसएफ टीमों का औसत रिस्पॉन्स टाइम 6 से 10 मिनट है, जो वैश्विक मानकों से भी बेहतर है.
बेड़ा और जनशक्ति: 144 हाई-टेक वाहन और 1,600 से अधिक प्रशिक्षित जवान (जिसमें 28% महिला कर्मी शामिल हैं).
कवरेज: राज्य के 4,100 किलोमीटर से अधिक राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों पर हर 30 किलोमीटर पर तैनाती.
उपकरण: स्पीड गन, एल्कोमीटर, ई-चालान मशीनें, डैश कैम और एडवांस्ड फर्स्ट-एड किट.
इन कर्मियों को कानून-व्यवस्था या वीआईपी ड्यूटी में नहीं लगाया जाता, बल्कि इनका एकमात्र उद्देश्य सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद करना है.
फेज़-II और 'विजन एसएसएफ-2047'
एसएसएफ के दूसरे चरण में इसका दायरा बढ़ाकर 6,000 किलोमीटर राज्य सड़कों तक किया जाएगा. लंबी अवधि के 'विजन एसएसएफ-2047' के तहत पंजाब पुलिस अपने स्वयं के जियोसिंक्रोनस नैनो/माइक्रो सैटेलाइट के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाश रही है.
इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS), ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) और 7E फ्रेमवर्क (इंजीनियरिंग, एनफोर्समेंट, एजुकेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, इमरजेंसी केयर, एंगेजमेंट और इवैल्यूएशन) के जरिए पंजाब को देश का अग्रणी रोड सेफ्टी हब बनाने का लक्ष्य है.
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