संसद के मानसून सत्र के खत्म होने से ठीक एक दिन पहले यानी 12 अगस्त को संसद परिसर में एक अहम सियासी तस्वीर देखने को मिली. कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा एक साथ बातचीत करते नजर आए. इस मुलाकात का जो वीडियो सामने आया है, उसमें तीनों नेता आपस में हंसते और मुस्कुराते हुए चर्चा करते दिख रहे हैं. पंजाब कांग्रेस में मची अंदरूनी खींचतान के बीच राहुल गांधी और प्रताप सिंह बाजवा की इस अनौपचारिक मुलाकात के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं. विस्तार से समझिए पूरी बात.
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पंजाब कांग्रेस के विधायकों की चिट्ठी और हाईकमान का रुख
पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ समय से पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के बीच अंदरूनी कलह चल रही है. इस गुटबाजी से राज्य के नेताओं और कार्यकर्ताओं में भ्रम का माहौल है. इसी सिलसिले में पंजाब कांग्रेस के कई विधायकों ने राहुल गांधी और कांग्रेस हाईकमान को पत्र लिखकर मिलने का समय मांगा था ताकि राज्य के मुद्दों और कलह पर चर्चा की जा सके. हालांकि, हाईकमान की ओर से अब तक विधायकों को मिलने का समय नहीं दिया गया है. ऐसे में विधायकों को समय न मिलने के बीच प्रताप सिंह बाजवा की राहुल गांधी से हुई यह मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है.
प्रताप सिंह बाजवा की भूमिका और मुलाकात का एजेंडा
पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा की खासियत यह है कि वे राजा वडिंग और चरणजीत सिंह चन्नी दोनों में से किसी भी गुट की तरफदारी नहीं करते हैं और एक निष्पक्ष नेता के रूप में जाने जाते हैं. हालांकि, राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल और प्रताप बाजवा के बीच हुई इस संक्षिप्त बातचीत का ब्योरा अभी मीडिया में सामने नहीं आया है. लेकिन सियासी गलियारों में यह माना जा रहा है कि इसमें पंजाब कांग्रेस के अंदरूनी हालात, कार्यकर्ताओं के बीच जा रहे संदेशों और आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति पर चर्चा हुई होगी.
चरणजीत सिंह चन्नी को कड़ा संदेश?
दरअसल, 1 जुलाई को कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस में जिम्मेदारियों का बंटवारा किया था. हाईकमान ने अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर बनाए रखने का फैसला किया था, जबकि चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार समिति (कैंपेन कमेटी) का चेयरमैन नियुक्त किया गया था. हालांकि, चरणजीत सिंह चन्नी खुद प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभालना चाहते थे, जिससे वे संतुष्ट नहीं दिखे और पार्टी में गुटबाजी बढ़ती गई.
वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने भी दो बार पंजाब का दौरा कर गुटबाजी सुलझाने की कोशिश की, लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो सके. ऐसे में राहुल गांधी का बाजवा के साथ इस तरह आत्मीय अंदाज में मिलना चन्नी के लिए एक संकेत माना जा रहा है कि हाईकमान अपने पुराने फैसलों में किसी दबाव में बदलाव करने के मूड में नहीं है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राहुल गांधी पंजाब के अन्य विधायकों से कब मुलाकात करते हैं.
यहां देखें वीडियो
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