18 Patient lost their eye vision in SMS: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत चिरंजीवी योजना के जरिए सरकार रिपीट करने का दावा करते हैं. लेकिन उनके फ्री इलाज के ये दावे जयपुर के सवाईमान सिंह हॉस्पिटल में धराशाही नजर आ रहे हैं. जब 18 मरीजों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद उनकी रोशनी ही चली गई. यही नहीं, दोबारा ऑपरेशन भी किया, लेकिन रोशनी नहीं लौटी.
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इससे भी बड़ी विडंबना यह है कि इन मरीजों को अब अस्पताल से एक-एक करके गायब किया जा रहा है, ताकि मीडिया के सामने यह संक्रमित मरीज ना आ सकें. इसके लिए इन्हें इसी हालात में अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा रहा है.
जो तिमारदार अपने मरीज को अस्पताल में ऑपरेशन के लिए लेकर आए थे. उनके ऑपरेशन के बाद भी आंखों में खुजली और धुंधलेपन की शिकायत हो रही है. लेकिन अस्पताल में कमी और खामी क्या रही. इस पर जांच करने के बजाय उल्टा इन मरीजों को जैसे-तैसे अस्पताल से छुट्टी के लिए दबाव बनाया जा रहा है. जिसके बाद जनता अपने आप को ठगा सा महसूस कर रही है. मरीजों का कहना है कि अस्पतालकर्मी कहते है कि आपकी इच्छा हों तो घर जा सकते हों. लेकिन बताओ इसी हालात में घर कैसे लेकर जाए?
आखिर क्या है मामला?
एसएमएस अस्पताल के चरक भवन के नेत्र वार्ड में भर्ती मरीजों ने बताया कि 22-23 जून को आंखों का ऑपरेशन हुआ और उसके बाद से ही आंखें लाल होने लगी. धीरे-धीरे खुजली हुई और फिर दिखना ही बंद हों गया. जब डॉक्टर्स से शिकायत की तो बोले धीरे-धीरे इंतजार करो, रोशनी आ जाएगी.
जानकारी के अनुसार 26, 27 और 28 जून में कुल 74 मरीजों के आंखों के ऑपरेशन हुए थे. ऑपरेशन के कई दिनों बाद 18 मरीजों ने धुंधला दिखने की शिकायत की तो बताया गया कि इन्फेक्शन फैलने के कारण आंखों की रोशनी गई है. लेकिन अब तक किसी इस प्रकरण में किसी की कोई जिम्मेदारी तय नहीं की गई है.
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