उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बड़ौत स्थित स्पंदन हॉस्पिटल से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जो देश में आज भी कायम रूढ़िवादी सोच और बाल विवाह की कड़वी सच्चाई को बयां करता है. हॉस्पिटल की गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर प्रज्ञा तोमर के पास राजस्थान का एक दंपति चेकअप के लिए पहुंचा था. जब डॉक्टर ने महिला की उम्र और उसकी प्रेग्नेंसी की हिस्ट्री जानी तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई.
ADVERTISEMENT
बाल विवाह और लगातार गर्भधारण
डॉक्टर के पूछने पर पता चला कि महिला की उम्र महज 22 साल है और वह इस समय 5 महीने की गर्भवती है. हैरान करने वाली बात यह है कि यह उसका छठा (6th) बच्चा है. महिला का बाल विवाह हुआ था और करीब 15-16 साल की उम्र में ही उसकी शादी कर दी गई थी. उसका सबसे बड़ा बच्चा इस समय 8 साल का है, यानी शादी के बाद से बिना किसी गैप के महिला लगातार गर्भधारण कर रही है.
'एक बेटे से क्या होता है, कमाने वाले हाथ ज्यादा होंगे'
जब डॉक्टर प्रज्ञा तोमर ने इस दंपति से इतने बच्चे पैदा करने की वजह पूछी, तो पहले तो महिला ने बताया कि लगातार बेटियां हो रही थीं, इसलिए बेटे की चाहत थी. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती; उनके पास पहले से एक बेटा मौजूद है. इसके बावजूद पति का कहना था, "एक लड़के से क्या होता है, कम से कम दो बेटे तो होने ही चाहिए. जितने ज्यादा बच्चे होंगे, भविष्य में कमाने वाले हाथ भी उतने ही ज्यादा होंगे." पति के इस दबाव और वंश चलाने की सनक के आगे महिला बेबस नजर आई.
महिला की सेहत गंभीर खतरे में
डॉक्टर ने वीडियो में साफ तौर पर नाराजगी और चिंता जताते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में लगातार इतने बच्चों को जन्म देना महिला की जान के लिए बेहद खतरनाक है. महिला पहले से ही अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आने और सांस फूलने जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही है. डॉक्टर ने दंपति को फटकार लगाते हुए समझाया कि बच्चों के बीच गैप होना बहुत जरूरी है और सिर्फ एक और बेटे की चाहत में किसी महिला की जिंदगी को दांव पर नहीं लगाया जा सकता.
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
डॉक्टर प्रज्ञा तोमर ने समाज को जागरूक करने के उद्देश्य से इस बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया, जो देखते ही देखते इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया. इस वीडियो को अब तक करीब 6 करोड़ से ज्यादा लोग देख चुके हैं. लोग इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.
यूजर्स का कहना है कि 22 साल की उम्र में 5 बच्चे होना बेहद दर्दनाक है और महिला को इंसान नहीं बल्कि बच्चा पैदा करने की मशीन समझ लिया गया है. यह घटना सवाल उठाती है कि तमाम जागरूकता अभियानों के बाद भी क्या हमारा समाज बेटियों को बोझ और महिलाओं को सिर्फ वंश आगे बढ़ाने का जरिया मानता रहेगा?
ADVERTISEMENT


