कुदरत का खेल कभी-कभी इतना क्रूर होता है कि इंसान निशब्द रह जाता है. राजस्थान के नागौर जिले से एक ऐसी ही रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जहां एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं. टालनपुर कस्बे में महज 9 साल की एक मासूम बच्ची की स्कूल में अचानक मौत हो गई.
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प्रार्थना के दौरान गिरी और फिर नहीं उठी
गांव के रहने वाले राजेंद्र की 9 वर्षीय बेटी दिव्या रोज की तरह सुबह 7 बजे अपने प्राइवेट स्कूल पहुंची थी. स्कूल में सुबह की प्रार्थना सभा (असेंबली) चल रही थी. सभी बच्चे कतार में खड़े थे, तभी अचानक दिव्या बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी. स्कूल स्टाफ ने तुरंत उसे संभाला और आनन-फानन में नजदीकी सरकारी अस्पताल ले गए. लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था, महज 7 मिनट के भीतर दिव्या की सांसें थम गईं. डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया.
डॉक्टरों ने जताई हार्ट अटैक की आशंका
अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, शुरुआती जांच में मौत की वजह 'कार्डियक अरेस्ट' यानी हृदय गति रुकना लग रही है. हालांकि, परिजनों ने बच्ची का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया, जिसके बाद शव उन्हें सौंप दिया गया.
4 महीने में उजड़ गया परिवार
इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है. ग्रामीणों ने बताया कि दिव्या के पिता राजेंद्र पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. अभी ठीक 4 महीने पहले ही उनके 16 साल के बेटे अभिषेक की भी इसी तरह अचानक मौत हुई थी. एक के बाद एक दो जवान बच्चों को खोने के बाद मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है. चिकित्सा जगत के लिए भी यह चिंता का विषय है कि आखिर इतनी कम उम्र के बच्चों को दिल का दौरा क्यों पड़ रहा है.
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