पेपर लीक के बाद अब जेल आंदोलन बढ़ा रहा गहलोत सरकार की टेंशन! जानें क्या है इसके राजनीतिक मायने?

Rajasthan News: राजस्थान में आपको इन दिनों दो ही चीजें नजर आ रही होंगी. या तो यात्रा या फिर आंदोलन. जी हां, पहले राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा, फिर सीएचए कर्मियों का धरना, इसके बाद बीजेपी की जन आक्रोश यात्रा और फिर पेपर लीक पर युवाओं-बेरोजगारों का धरना. और अब तो राजस्थान के हजारों […]

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Rajasthan News: राजस्थान में आपको इन दिनों दो ही चीजें नजर आ रही होंगी. या तो यात्रा या फिर आंदोलन. जी हां, पहले राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा, फिर सीएचए कर्मियों का धरना, इसके बाद बीजेपी की जन आक्रोश यात्रा और फिर पेपर लीक पर युवाओं-बेरोजगारों का धरना. और अब तो राजस्थान के हजारों जेलकर्मी भी धरने पर बैठ गए हैं. वो भी खाना-पीना छोड़कर. राजस्थान के कमोबेश सभी जेलों के सुरक्षाकर्मी और कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर पिछले 3 दिनों से धरने पर बैठे हैं. इस आंदोलन ने गहलोत सरकार की टेंशन को बढ़ा दिया है. क्योंकि अगर सरकार जेल कर्मियों की मांगों का जल्द कोई समाधान नहीं निकालती है तो यह आंदोलन उग्र रूप ले सकता है. जिन लोगों पर जेलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है वही लोग धरने पर हैं तो जेलों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है.

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आपको बता दें कि जेल कर्मचारियों का ये धरना अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के बैनर तले चल रहा है. जेल कर्मियों की मांग है कि उनका वेतन पुलिसकर्मियों के बराबर किया जाए. साथ ही वेतन की तमाम विसंगतियों को भी दूर किया जाए. राजस्थान के जेल कर्मचारियों की ये मांग कोई आज की नहीं बल्कि 1998 से चली आ रही है. जेल कर्मचारियों का कहना है कि कई सरकारें बदल गईं लेकिन इनकी हालत पर किसी ने ध्यान नहीं दिया.

जेल मंत्री ने बीजेपी को ठहराया जिम्मेदार
जेल कर्मियों की मांगों का समाधान करने की बजाय इस पर राजनीति भी जमकर हो रही है. जेल मंत्री टीकाराम जूली ने कहा कि जेल कर्मियों की हड़ताल जायज है, क्योंकि इसके लिए भाजपा जिम्मेदार है. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के शासनकाल में वेतन संबंधी विसंगति पैदा हुई है जिसका अब तक समाधान नहीं हुआ था. अब उन्होंने मुख्यमंत्री से इस संबंध में बात की है जल्द ही उनकी समस्या का समाधान कराया जाएगा.

कोटा और भरतपुर में बिगड़ी जेल कर्मियों की तबीयत
कोटा और भरतपुर में तो धरने पर बैठे-बैठे कई जेल कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ गई जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. लेकिन जेल कर्मियों ने भी कह दिया है कि इस बार ये आंदोलन यूं ही जारी रहेगा. और अगर इस दौरान किसी जेलकर्मी की हालत ज्यादा खराब होती है तो उसकी जिम्मेदारी भी गहलोत सरकार की होगी.

विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है आंदोलन का असर
अगर गहलोत सरकार समय रहते जेल कर्मियों की मांगों को मानकर उनका आंदोलन खत्म नहीं करवाती है तो इसकी कीमत उन्हें चुनाव में भी चुकानी पड़ सकती है. अगर जेल कर्मचारी का सरकार से लंबे समय तक नाराज रहते हैं तो इसका असर जेलों की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है. साथ ही विपक्षी दल बीजेपी भी इसे बड़ा मुद्दा बना सकती है जिससे गहलोत सरकार की मुश्किलें बढ़ जाएगी.

जेल कर्मियों को उपेन यादव का भी मिला साथ
जेल कर्मियों के आंदोलन को राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के अध्यक्ष उपेन यादव का भी साथ मिल गया है. उन्होंने शनिवार को सेंट्रल जेल पहुंचकर जेल प्रहरियों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया था. उपेन यादव ने ट्वीट के जरिए बताया था कि जब तक जेल कर्मियों की भूख हड़ताल जारी रहेगी वह भी अन्न ग्रहण नहीं करेंगे. उपेन यादव के समर्थन से जेल कर्मचारियों के आंदोलन को बल मिला है. साथ ही अगर सरकार समय रहते नहीं चेतती है तो यह आंदोलन लंबे समय तक चल सकता है और इसका असर आने वाले विधानसभा चुनाव पर भी जरूर पड़ेगा.

इनपुट: राजस्थान तक के लिए धोलपुर से उमेश मिश्रा/ कोटा से संजय वर्मा/ भरतपुर से सुरेश फौजदार

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