सरहद पर मस्जिदें गिराई, BJP हमें आपस में लड़ाना चाहती है'... पांच बांध विवाद और ध्रुवीकरण पर बरसे अशोक गहलोत

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पांच बांध विवाद पर सरकार को दोनों समुदायों से तुरंत बात करने की नसीहत दी है. साथ ही, उन्होंने भाजपा पर चुनावी लाभ के लिए सरहदी इलाकों में मस्जिदों और दरगाहों को गिराकर ध्रुवीकरण की राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया है.

राजनाथ सिंह
राजनाथ सिंह

न्यूज तक डेस्क

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राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने सूबे की भजनलाल सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है. गहलोत ने आरोप लगाया है कि राजस्थान में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और ऐसा लगता है जैसे राज्य में 'सरकार नाम की कोई चीज' ही नहीं बची है. उन्होंने पांच बांध (गुर्जर-मीणा विवाद) के मुद्दे पर सरकार की निष्क्रियता और भारत-पाकिस्तान सीमा पर मस्जिदों-दरगाहों को गिराए जाने को लेकर भाजपा पर देश में ध्रुवीकरण की राजनीति करने का बड़ा आरोप लगाया है.

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'पांच बांध विवाद' पर सरकार को दी नसीहत

राजस्थान में चल रहे पांच बांध विवाद (गुर्जर और मीणा समुदाय के बीच पानी व अन्य मांगों को लेकर जारी गतिरोध) पर बोलते हुए अशोक गहलोत ने कहा, "पिछले 15-20 दिनों से यह समस्या चल रही है. कम से कम सरकार को दोनों समुदायों (गुर्जर और मीणा समाज) के पंच-पटेलों और जनप्रतिनिधियों को बुलाकर बात करनी चाहिए थी कि आखिर इस समस्या का रास्ता कैसे निकल सकता है." 

गहलोत ने कहा कि एक तरफ हाई कोर्ट बार-बार आदेश दे रहा है, जिससे अधिकारी इस डर में हैं कि उन पर कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) का केस न लग जाए, और दूसरी तरफ सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है. उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से इस मामले को गंभीरता से लेने की अपील की. गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री को मंत्रियों या अपनी पार्टी के लोगों की एक टीम बनानी चाहिए, जो दोनों पक्षों से संवाद स्थापित कर समय रहते शांतिपूर्ण समाधान निकाल सके ताकि जातीय संघर्ष जैसी स्थितियां पैदा न हों.

सरहद पर मस्जिदें और दरगाहें चुन-चुनकर गिराई जा रही हैं

पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा पर सबसे गंभीर आरोप भारत-पाकिस्तान सीमा (जैसलमेर और बीकानेर बॉर्डर) वाले इलाकों में की जा रही कार्रवाई को लेकर लगाया. गहलोत ने कहा कि आजादी के बाद से आज तक इन सीमावर्ती इलाकों में कभी कोई तनाव या दंगा नहीं हुआ, जबकि वहां बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक (Minority) समुदाय के लोग रहते हैं. वहां लोग हमेशा से भाईचारे और प्यार-मोहब्बत से रहते आए हैं.

भाजपा सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए गहलोत ने कहा, "वहां पर जो मस्जिदें और दरगाहें हैं, उन्हें चुन-चुनकर आप गिरा रहे हो और लोगों को भड़का रहे हो. आखिर सरकार चाहती क्या है? यह सब कुछ उनके ध्रुवीकरण के एजेंडे का हिस्सा है, ताकि धर्म के आधार पर चुनाव जीतने का उनका सिलसिला बना रहे." 

'जहां मुसलमान नहीं, वहां हिंदुओं ने किया विरोध'

कार्रवाई का एक उदाहरण देते हुए गहलोत ने दावा किया कि सीमावर्ती इलाके में एक दरगाह ऐसी भी थी, जहां कोई मुस्लिम आबादी नहीं है, बल्कि पूरा गांव हिंदुओं का है और हिंदू ही वहां इबादत करते थे. जब प्रशासन उसे गिराने पहुंचा तो खुद हिंदू समाज के लोगों ने हल्ला किया और विरोध जताया कि यह हमारा धार्मिक स्थल है, जिसे हमने बनाया है. इसके बावजूद प्रशासन ने किसी की नहीं सुनी और उसे तहस-नहस कर दिया.

जिला प्रशासन और अधिकारियों को चेतावनी

अशोक गहलोत ने स्थानीय जिला प्रशासन, कलेक्टर्स, एसपी और आईजी को संविधान की भावना के तहत काम करने की नसीहत दी. उन्होंने कहा कि सीमावर्ती जिलों में शांति और सद्भाव बनाए रखना अधिकारियों की जिम्मेदारी है. राजनीतिक एजेंडे के तहत बॉर्डर एरिया का माहौल खराब करना देश की सुरक्षा और भविष्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है.

 

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