राजस्थान में 'परिवारवाद' और 'बेटों की राजनीति' को लेकर छिड़ी जंग के बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बड़ा बयान सामने आया है. गहलोत ने बीजेपी नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि वे अपने बेटों, बेटियों और रिश्तेदारों को राजनीति में लाएं, ताकि नई पीढ़ी को उनके अनुभवों का लाभ मिल सके.
ADVERTISEMENT
'सरकार से दूर रखने की बात कही थी, राजनीति से नहीं'
गहलोत ने स्पष्ट किया कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है. उन्होंने कहा, "मैंने यह कहा था कि मंत्रियों और मुख्यमंत्री को अपने बेटों को सरकार के कामकाज से दूर रखना चाहिए ताकि सरकार की बदनामी न हो. मैंने यह कभी नहीं कहा कि उन्हें राजनीति में नहीं आना चाहिए." उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तब उनके बेटे अलग किराए के मकान में रहते थे, मुख्यमंत्री निवास में नहीं.
गवर्नेंस और विपक्ष के सवालों पर घेरा
अशोक गहलोत ने वर्तमान सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सरकार को गवर्नेंस पर ध्यान देना चाहिए, न कि विपक्ष के सवालों का मज़ाक उड़ाना चाहिए. उन्होंने करोड़ों रुपये की लागत से बनी इमारतों के शुरू न होने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार इन गंभीर सवालों का जवाब देने के बजाय अनर्गल बातें कर रही है.
बीजेपी पर साधा निशाना
गहलोत ने कहा कि बीजेपी के नेता शायद किसी 'अपराध बोध' से ग्रसित हैं, इसीलिए पिछले तीन दिनों से उनके खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं. उन्होंने सलाह दी कि सत्ता पक्ष को विपक्ष का सम्मान करना सीखना चाहिए और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप सवालों के सीधे जवाब देने चाहिए.
ADVERTISEMENT


