मात्र 14 दिन में मिली सरकारी मंज़ूरी? केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी के पॉलीहाउस और सब्सिडी की इनसाइड स्टोरी

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को अपने ही मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से खीरे की खेती के लिए ₹99.60 लाख की सब्सिडी मिली है. विपक्ष ने इसे हितों का टकराव बताकर बड़ा मुद्दा बनाया है.

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न्यूज तक डेस्क

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राजस्थान की राजनीति और देश के कृषि गलियारों में इस समय एक बड़ा सियासी बवाल खड़ा हो गया है. मामला केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी से जुड़ा है, जिन्हें अपने ही मंत्रालय के अधीन आने वाली एक योजना के तहत लगभग ₹99.60 लाख की भारी-भरकम सब्सिडी मिली है. विपक्ष ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लेते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं खुद केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने सामने आकर इस पूरे मामले पर अपनी सफाई दी है. आइए समझते हैं कि यह पूरा विवाद आखिर क्या है और मंत्री जी के इस फॉर्म हाउस का पूरा राज़ क्या है.

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गहलोत ने साधा निशाना, लगाया गंभीर आरोप

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ देश का आम किसान सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक जाता है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा के मंत्रियों और उनके चहेते अफसरों के परिवारों पर करोड़ों की सरकारी मेहरबानी हो रही है. विपक्ष इस पूरी प्रक्रिया को हितों के टकराव (Conflict of Interest) के रूप में देख रहा है.

क्या है पूरा मामला और किस योजना से मिली सब्सिडी?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को राजस्थान के अजमेर (पीस गांव) स्थित उनके निजी खेत पर खीरे की खेती के लिए यह सब्सिडी दी गई है.

मंत्री जी के खेत पर लगे बोर्ड के अनुसार, इस पूरे आधुनिक पॉलीहाउस और फार्म पोंड (कृत्रिम तालाब) प्रोजेक्ट की कुल लागत ₹1 करोड़ 99 लाख (करीब 2 करोड़) है.

इस प्रोजेक्ट के लिए उन्होंने HDFC बैंक से ₹1.49 करोड़ का लोन लिया था. प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की योजना के तहत उन्हें 50 फीसदी यानी ₹99 लाख 60 हजार की सब्सिडी मंजूर हुई, जो सीधे उनके बैंक लोन खाते में क्रेडिट कर दी गई.

चौंकाने वाली बात यह है कि जिस राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) ने यह सब्सिडी मंजूर की है, केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी खुद उसके पदेन उपाध्यक्ष हैं. हालांकि, नियमों के मुताबिक अंतिम मंजूरी देने वाली कमेटी में अध्यक्ष या उपाध्यक्ष शामिल नहीं होते हैं. विपक्ष का आरोप यह भी है कि मंत्री जी ने 15 अप्रैल को आवेदन किया और महज 14 दिनों के भीतर ही इसे सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई.

खुलासे के बाद खुलकर सामने आए मंत्री भागीरथ चौधरी 

चोट खाए विपक्ष के हमलों के बीच केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने खुलकर मीडिया के सामने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा, "मैं एक किसान वर्ग से आता हूं और बचपन से खेती कर रहा हूं. खेती ही हमारा पैतृक रोजगार है. मैंने कोई काम छिपाकर नहीं किया है."

मंत्री जी ने अपनी सफाई में क्या कहा?

मंत्री ने बताया कि उनके क्षेत्र में भूमिगत पानी पूरी तरह खत्म हो चुका है. इसलिए उन्होंने ₹2 करोड़ की लागत से पॉलीहाउस लगाया और 2 करोड़ लीटर की क्षमता वाला 'फार्म पोंड' (तालाब) बनाया, ताकि सालभर बारिश के पानी से उन्नत खेती की जा सके.

उन्होंने कहा, "मैंने अपने फॉर्म पर बकायदा बड़ा साइन बोर्ड लगाया था, जिसमें लोन की रकम और सब्सिडी की राशि साफ-साफ लिखी थी. मैं खुद आसपास के किसानों और यहां तक कि डीडवाना-कुचामन के जिला कलेक्टर तक को वहां विजिट करवाता हूं, ताकि दूसरे किसान भी इस तकनीक को देखें और प्रेरित हों. अगर मेरे मन में कोई खोट होती तो मैं बोर्ड क्यों लगाता?"

भागीरथ चौधरी ने एक तकनीकी पहलू को स्पष्ट करते हुए कहा कि कृषि मंत्रालय में दो राज्य मंत्री (MoS) हैं- एक वे खुद और दूसरे रामनाथ ठाकुर. यह योजना और सब्सिडी से जुड़ा विभाग रामनाथ ठाकुर के अधीन आता है, इसलिए इसमें उनके पद का कोई दुरुपयोग नहीं हुआ है.

उन्होंने साफ किया कि वह इस प्रोजेक्ट के लिए साल 2018 से ही आवेदन कर रहे थे, लेकिन तब हार्ड कॉपी जमा करने में देरी की वजह से उनका आवेदन रिजेक्ट हो गया था. अब जाकर पूरी नीतिगत और कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें यह लाभ मिला है, जो देश के किसी भी आम किसान को मिल सकता है.

PMO संपत्ति घोषणा का विवाद

इस मामले में एक और बिंदु चर्चा में है कि अप्रूवल से करीब एक महीने पहले प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को दी गई संपत्ति की घोषणा में मंत्री जी ने अपनी कृषि भूमि का जिक्र तो किया था, लेकिन इस कमर्शियल प्रोजेक्ट की जानकारी नहीं थी. हालांकि, उनके सहयोगियों का कहना है कि आगामी घोषणाओं में इसे नियमानुसार अपडेट कर दिया जाएगा.

मंत्री भागीरथ चौधरी का कहना है कि विपक्ष के पास उनके खिलाफ कोई दाग या भ्रष्टाचार का मुद्दा नहीं है, इसलिए वे एक किसान को मिलने वाले हक को लेकर राजनीति कर रहे हैं. बहरहाल, मंत्री जी का यह दावा और विपक्ष के आरोप अब जनता की अदालत में हैं.

 

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