हनुमान बेनीवाल के दबाव के बाद सरकार झुकी, RIICO प्रोजेक्ट पर रोक, क्या है भैराणा धाम का पूरा विवाद!

Bhairana Dham Controversy: राजस्थान के भैराणा धाम में प्रस्तावित RIICO इंडस्ट्रियल एरिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया. संत समाज और ग्रामीणों के विरोध के बाद हनुमान बेनीवाल जयपुर कूच पर निकले, लेकिन देर रात सरकार और संघर्ष समिति में समझौता हो गया. अब मामले की जांच के लिए संयुक्त कमेटी बनाई गई है.

Bhairana Dham Controversy
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ललित यादव

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Bhairana Dham Controversy: राजस्थान के भैराणा धाम में प्रस्तावित RIICO इंडस्ट्रियल एरिया को लेकर बुधवार को दिनभर तनाव बना रहा. संत समाज, ग्रामीणों और RLP  कार्यकर्ताओं के विरोध के बीच मामला इतना बढ़ गया कि देर रात हनुमान बेनीवाल हजारों समर्थकों के साथ जयपुर कूच पर निकल पड़े. हालांकि पुलिस ने मौखमपुरा मोड़ पर काफिले को रोक लिया और फिर देर रात प्रशासन व आंदोलनकारियों के बीच बनी सहमति के बाद फिलहाल टकराव टल गया.

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क्या है पूरा मामला?

पूरा विवाद भैराणा धाम और दादू तपोवन क्षेत्र के आसपास बनने वाले RIICO इंडस्ट्रियल एरिया को लेकर है. संत समाज और संघर्ष समिति का कहना है कि यह इलाका केवल जमीन का टुकड़ा नहीं बल्कि धार्मिक आस्था, पर्यावरण और वन्य जीवन से जुड़ा संवेदनशील क्षेत्र है. उनका आरोप है कि यहां उद्योग स्थापित होने से प्रदूषण बढ़ेगा और क्षेत्र की धार्मिक व प्राकृतिक पहचान खत्म हो जाएगी.

बुधवार सुबह से ही भैराणा धाम में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था. संत समाज के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण और आरएलपी कार्यकर्ता भी मौके पर डटे रहे. दिनभर प्रशासन और संघर्ष समिति के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया.

शाम को भैराणा धाम पहुंचे बेनीवाल!

शाम होते-होते माहौल और गर्म हो गया. रात करीब 7 बजे हनुमान बेनीवाल भैराणा धाम पहुंचे. इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों, RIICO प्रतिनिधियों और संघर्ष समिति के बीच करीब तीन घंटे तक बातचीत चली. सरकार की ओर से प्रस्ताव दिया गया कि भैराणा धाम के लिए 150 बीघा जमीन के साथ अतिरिक्त 100 बीघा भूमि सुरक्षित रखी जाएगी. यानी कुल 250 बीघा जमीन धार्मिक क्षेत्र के लिए छोड़ी जाएगी.

लेकिन संत समाज इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हुआ. आंदोलनकारियों की मांग थी कि पूरे दादू तपोवन क्षेत्र को सुरक्षित घोषित किया जाए और RIICO परियोजना को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए.

रात 12 बजे जयपुर कूच का ऐलान!

रात करीब 12 बजे बातचीत बेनतीजा रही तो हनुमान बेनीवाल ने जयपुर कूच का ऐलान कर दिया. इसके बाद बड़ी संख्या में समर्थक जयपुर की ओर बढ़ने लगे. हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए जब आंदोलनकारियों ने बिचून क्षेत्र में पुलिस का पहला नाका पार कर लिया. इसके बाद पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया.

मौखमपुरा मोड़ पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया. बैरिकेडिंग लगाकर काफिले को रोका गया. इसी दौरान एक बार फिर प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत शुरू हुई. कई घंटे चली चर्चा के बाद आखिरकार सहमति बन गई.

क्या समझौता हुआ?

समझौते के तहत अब भैराणा क्षेत्र में प्रस्तावित RIICO इंडस्ट्रियल एरिया का री-डिजाइन किया जाएगा. इसके लिए एक संयुक्त कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों के साथ संघर्ष समिति और संत समाज के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. यह कमेटी पूरे मामले की समीक्षा कर सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी.

हनुमान बेनीवाल ने दावा किया कि सरकार ने फिलहाल 800 बीघा जमीन पर RIICO का काम रोक दिया है. उन्होंने कहा कि समिति पर्यावरण, नदी-नालों और धार्मिक महत्व जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर रिपोर्ट तैयार करेगी. बेनीवाल ने इसे जनता और संत समाज की जीत बताया.

सरकार का पक्ष क्या है?

सरकार का पक्ष अलग है. प्रशासन का कहना है कि यह क्षेत्र औद्योगिक और लॉजिस्टिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है. यह इलाका नेशनल हाईवे, जयपुर रिंग रोड और कोटपूतली-किशनगढ़ एक्सप्रेस-वे से जुड़ा हुआ है. साथ ही इसे दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के बफर जोन का हिस्सा भी माना जा रहा है. जानकारी के मुताबिक आसपास ट्रेन कार्गो टर्मिनल विकसित करने की योजना भी है.

राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार पूरे क्षेत्र में करीब 800 बीघा जमीन शामिल है. इनमें 150 बीघा भूमि भैराणा धाम के नाम दर्ज है, जबकि बाकी सरकारी भूमि बताई जा रही है.

फिलहाल जयपुर कूच टल गया है, लेकिन विवाद खत्म नहीं हुआ है. अब सबकी नजर उस कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी है, जो तय करेगी कि विकास और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए. इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्थान की राजनीति में भी नई हलचल पैदा कर दी है.
 

 

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