मुख्यमंत्री के नेतृत्व में नगर निकाय चुनाव में भाजपा का दमदार प्रदर्शन

न्यूज तक डेस्क

• 04:52 PM • 20 Sep 2026

राजस्थान नगर निकाय चुनाव 2026 में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भाजपा ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया. जानिए 'भजनलाल मॉडल' की चुनावी सफलता, निर्विरोध बोर्ड की पूरी रिपोर्ट.

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निकाय चुनाव में BJP की बड़ी जीत.
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राजस्थान में हाल ही में संपन्न हुए नगर निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए शानदार जीत दर्ज की है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मजबूत नेतृत्व, सटीक मार्गदर्शन और प्रभावी रणनीति के बल पर प्रदेश के नगर निगमों, नगर परिषदों और नगरपालिकाओं में 'कमल' खिला है. मुख्यमंत्री की इस सफलता और चुनाव रणनीति की सराहना प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने की है.

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मिशन मोड पर लड़ा गया चुनाव और मजबूत रणनीति

मुख्यमंत्री ने निकाय चुनावों में संगठन को दिशा दिखाते हुए खुद कमान संभाली. उन्होंने संभागवार बड़े नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी और प्रतिदिन का फीडबैक लिया. स्वयं चुनावी मैदान में उतरकर मुख्यमंत्री ने 10 नगर निगमों में रोड शो किए. परिणामों के बाद पार्षदों को एकजुट रखने और निर्दलीयों को पार्टी के साथ लाने में उनकी बड़ी भूमिका रही. 

उनकी इस रणनीति के आगे कांग्रेस के तमाम दावे फेल साबित हुए. मुख्यमंत्री की अगुवाई में भरतपुर और डीग जिले की 90 प्रतिशत नगरपालिकाओं में भाजपा ने बोर्ड बनाया, जबकि भरतपुर नगर निगम में निर्विरोध जीत हासिल की. इसके अलावा, जयपुर नगर निगम में लगातार सातवीं बार भाजपा का बोर्ड बनने जा रहा है. 

निर्विरोध जीत में बड़ा अंतर

प्रदेश में एक साथ 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगर पालिकाओं में चुनाव हुए, जिन्हें सरकार के ढाई साल के कार्यकाल पर जनता की मुहर माना जा रहा है. इससे पहले हुए 7 में से 5 विधानसभा उपचुनावों में भी भाजपा ने जीत दर्ज की थी. 

आंकड़ों की तुलना करें तो

कांग्रेस शासन (2018-23): कुल 11 निकाय निर्विरोध रहे (भाजपा-3, कांग्रेस-6, निर्दलीय-2). 

भाजपा शासन (भजनलाल सरकार): कुल 33 निकाय निर्विरोध रहे (भाजपा-30, कांग्रेस-2, भाजपा समर्थित-1).

जयपुर का चर्चित रोड शो और मुद्दे

जयपुर के चारदीवारी क्षेत्र में मुख्यमंत्री के रोड शो ने शहर की जीत तय की. यहीं से भाजपा के मेयर प्रत्याशी सुनील कोठारी ने जीत दर्ज की. रोड शो के दौरान लव जिहाद, धर्मांतरण कानून, डिस्टर्ब एरिया बिल और यूसीसी जैसे विषयों पर दिए गए संदेशों का सीधा प्रभाव चुनाव नतीजों पर दिखा. 

विपक्ष की चालें हुईं नाकाम

कांग्रेस ने जातिगत समीकरणों और 'होटल पॉलिटिक्स' के जरिए बढ़त बनाने की कोशिश की, लेकिन मुख्यमंत्री की सोशल इंजीनियरिंग और 'वन स्टेट-वन इलेक्शन' की रणनीति के आगे विपक्ष टिक नहीं सका. कांग्रेस को अपने पार्षदों को होटलों में रखना पड़ा, जबकि भाजपा ने 33 बोर्डों पर निर्विरोध जीत हासिल कर शुरुआत में ही मजबूत बढ़त बना ली.