राजस्थान में आगामी पंचायती राज चुनावों को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक ऐसा दांव चला है जिससे न केवल पश्चिमी राजस्थान की राजनीति बदल गई है, बल्कि दिल्ली तक हलचल तेज हो गई है. मुख्यमंत्री ने मानवेंद्र सिंह जसौल को बाड़मेर, जैसलमेर और बालोतरा जिलों की कमान सौंपकर स्पष्ट कर दिया है कि अब इन क्षेत्रों में उन्हीं का 'सिक्का' चलेगा.
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टिकट वितरण का पूरा जिम्मा मानवेंद्र के पास
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बाड़मेर और जैसलमेर के बीजेपी नेताओं के साथ हुई बैठक में दो टूक शब्दों में कह दिया है कि भविष्य में होने वाले चुनावों में मानवेंद्र सिंह जसौल की ही चलेगी. पंचायती राज चुनावों के लिए टिकट वितरण की पूरी प्रक्रिया अब उनके माध्यम से ही संचालित की जाएगी. इसका मतलब यह है कि जैसलमेर, बाड़मेर और नवनिर्मित बालोतरा जिले में उम्मीदवार तय करने में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी.
मुख्यमंत्री का 'दिल्ली' और 'विरोधियों' को जवाब
राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं और आईबी (IB) की एक कथित रिपोर्ट, जिसमें बीजेपी की स्थिति कमजोर बताई गई थी, के बीच इस फैसले को सीएम का 'मास्टर स्ट्रोक' माना जा रहा है. कर्नल मानवेंद्र सिंह को आगे करके मुख्यमंत्री ने अपने विरोधी खेमे की रणनीति को करारा झटका दिया है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस फैसले से जोधपुर क्षेत्र के कई बड़े दिग्गजों का सियासी गणित बिगड़ सकता है.
पंचायती राज चुनाव 2026: तारीखों पर सस्पेंस
राजस्थान में पंचायती राज चुनाव अप्रैल 2026 तक कराए जाने की तैयारी है. हालांकि, कोर्ट के निर्देशों के अनुसार 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए, लेकिन ओबीसी आरक्षण की रिपोर्ट और सूचियों के अंतिम रूप लेने में हो रही देरी की वजह से सस्पेंस बना हुआ है. इस बीच, पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने चुनाव टालने की कोशिशों के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर हड़कंप मचा दिया है.
आलाकमान से मिली 'हरी झंडी'
मुख्यमंत्री के इस कदम से साफ है कि मानवेंद्र सिंह जसौल को पार्टी आलाकमान से भी पूरा समर्थन प्राप्त है. उन्हें लूप में रखे बिना अब बाड़मेर-जैसलमेर की राजनीति में कोई भी बड़ा फैसला नहीं लिया जाएगा. यह फैसला आने वाले समय में संगठनात्मक नियंत्रण को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा संकेत है.
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