Shankar Ram Bishnoi case: राजस्थान के बारां जिले से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हड़कंप मचा दिया है. जिस पुलिसवाले के कंधों पर कभी कानून की हिफाजत और सूबे के एक बड़े नेता की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, आज वही मादक पदार्थों की तस्करी के काले कारोबार का मास्टरमाइंड निकला.
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कौन है हेड कांस्टेबल शंकर राम बिश्नोई?
करीब 27 साल पहले पुलिस सेवा में भर्ती होकर वर्दी पहनने वाले हेड कांस्टेबल शंकर राम बिश्नोई का बारां और नागौर के इलाकों में बड़ा रसूख था. साल 2003 से जब-जब बारां के छबड़ा से प्रताप सिंह सिंघवी बीजेपी के विधायक बने, शंकर राम लगातार उनके गनमैन (बॉडीगार्ड) के रूप में तैनात रहा. वीआईपी सुरक्षा में रहने के कारण शंकर राम का राजनीतिक गलियारों में भी अच्छा-खासा प्रभाव था. लेकिन इस रसूख की आड़ में वह तस्करों के एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था.
97 किलो डोडा चूरा बरामदगी से खुला राज
इस पूरे काले साम्राज्य का पर्दाफाश 29 अक्टूबर 2025 को हुआ, जब बारां सदर थाना पुलिस ने एक कार से 97 किलो 110 ग्राम अवैध डोडा चूरा बरामद किया था. शुरुआत में इसे सामान्य तस्करी का मामला माना जा रहा था, लेकिन जब पुलिस ने कड़ियां जोड़ीं तो इसके तार सीधे हेड कांस्टेबल शंकर राम बिश्नोई से जाकर जुड़े. जांच में सामने आया कि शंकर राम सीधे तौर पर तस्करों के संपर्क में था और अपने गुर्गों के माध्यम से डोडा चूरा की बड़ी खेप को सुरक्षित नागौर तक पहुंचाने का काम करता था.
7 महीने से फरार, पुलिस ने किया नौकरी से बर्खास्त
जैसे ही इस पूरे मामले में पुलिस महकमे के भीतर शंकर राम बिश्नोई का नाम उजागर हुआ, वह अपनी ड्यूटी छोड़कर अचानक गायब हो गया. एक-दो दिन नहीं, बल्कि पूरे 7 महीने बीत जाने के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं लगा है. विभाग द्वारा कई नोटिस जारी किए गए और अदालत से गिरफ्तारी वारंट भी निकाला गया, लेकिन वह लगातार फरार चल रहा है.
अब बारां पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए हेड कांस्टेबल शंकर राम बिश्नोई को तत्काल प्रभाव से सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है. पुलिस का यह कदम संदेश देता है कि वर्दी की आड़ में अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि 7 महीने से गायब यह पूर्व गनमैन आखिर छुपा कहां है और उसकी गिरफ्तारी के बाद और कितने बड़े चेहरों से नकाब उतरेगा?
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