नीट विवाद और देश भर में जारी छात्र आंदोलनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर पर राजनीति गरमा गई है. राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस घटनाक्रम को देश के करोड़ों छात्रों और राहुल गांधी द्वारा शुरू की गई 'छात्रों की गूंज' मुहिम की पहली बड़ी जीत करार दिया है.
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'युवाओं के आगे झुकना पड़ा सरकार को'
मीडिया से बात करते हुए टीकाराम जूली ने कहा कि देश भर के छात्र जंतर-मंतर से लेकर हर कोने में अपने हक और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था के लिए आवाज उठा रहे थे. छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और कई युवाओं ने आत्महत्या तक कर ली. यह पहली बार है जब इस सरकार के कार्यकाल में किसी मंत्री का इस तरह इस्तीफा हुआ है, जो दिखाता है कि जब छात्र एकजुट होते हैं तो सरकार को झुकना ही पड़ता है.
'सिर्फ विभाग न बदला जाए, सख्त एक्शन हो'
टीकाराम जूली ने केंद्र सरकार से मांग की है कि राष्ट्रपति तुरंत प्रभाव से मंत्री का इस्तीफा स्वीकार करें. उन्होंने आशंका जताई कि जैसे अधिकारियों का तबादला एक विभाग से दूसरे विभाग में कर दिया जाता है, वैसा ही धर्मेंद्र प्रधान के साथ न किया जाए. उन्हें किसी दूसरे मंत्रालय में बैठाने के बजाय मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए.
भाजपा नेताओं के बयानों पर साधा निशाना
जूली ने भाजपा नेताओं और राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बयानों पर भी कड़ा एतराज जताया. उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे देश के भविष्य को भाजपा नेताओं ने 'विदेशी फंडिंग' और 'भाड़े के टट्टू' तक कह दिया. सरकार हर आंदोलन को भटकाने की कोशिश करती है, लेकिन इस बार युवाओं के संघर्ष ने सच्चाई को सामने ला खड़ा किया है.
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