ससुर इंजीनियर..सास वकील और अब बहू बनी IAS, नागौर की डिंपल चौहान ने UPSC में मारी बाजी बनीं IAS, 5वें प्रयास में गाड़े सफलता के झंडे

Dimple Chauhan UPSC: नागौर की डिंपल चौहान ने यूपीएससी में 131वीं रैंक हासिल कर मिसाल पेश की है. दिल्ली सरकार में नौकरी करते हुए उन्होंने अपने 5वें प्रयास में यह सफलता पाई.

Dimple Chauhan UPSC
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न्यूज तक डेस्क

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Dimple Chauhan UPSC: राजस्थान के नागौर और जालौर जिले की बेटी और बहू डिंपल चौहान ने देश की सबसे प्रतिष्ठित यूपीएससी परीक्षा में बाजी मारकर प्रदेश का नाम रोशन किया है. डिंपल ने ऑल इंडिया 131वीं रैंक हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में अपनी जगह पक्की कर ली है. उनकी यह कामयाबी केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि उस जज्बे की कहानी है जहाँ परिवार और ससुराल का साथ मिलने पर बड़ी से बड़ी मंजिल आसान हो जाती है.

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नौकरी की व्यस्तता के बीच नहीं छोड़ी जिद

डिंपल की राह इतनी आसान नहीं थी. वह वर्तमान में दिल्ली सरकार के ट्रेड एंड टैक्स डिपार्टमेंट में सहायक आयुक्त (Assistant Commissioner) के पद पर तैनात हैं. एक जिम्मेदार पद पर रहते हुए यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी करना बड़ी चुनौती थी, लेकिन डिंपल ने हार नहीं मानी. उन्होंने वैकल्पिक विषय के रूप में दर्शनशास्त्र (Philosophy) को चुना, जिसने उनकी सोच को एक नया नजरिया दिया.

5वें प्रयास में मिला मनचाहा मुकाम

यह डिंपल का पांचवां प्रयास था. इससे पहले भी उन्हें सफलता मिली थी, लेकिन रैंक कम होने के कारण वह अपने सपने (IAS) से दूर रह गई थीं. एक बार उनकी रैंक 800 के करीब आई थी, जिसे कई लोग बड़ी उपलब्धि मानते हैं, लेकिन डिंपल का लक्ष्य स्पष्ट था. उन्होंने अपनी कमियों पर काम किया और आखिरकार 131वीं रैंक लाकर अपना सपना सच कर दिखाया.

IIT से पढ़ाई और परिवार का अटूट विश्वास

डिंपल की शुरुआती शिक्षा उदयपुर और कोटा में हुई, जिसके बाद उन्होंने आईआईटी गुवाहाटी से इंजीनियरिंग की डिग्री ली. उनकी सफलता के पीछे माता-पिता के साथ-साथ ससुराल वालों का भी बड़ा हाथ है. उनके पिता रमेश चौहान जालौर में डिप्टी सीएमएचओ रह चुके हैं और ससुर श्रवण राम बिडियासर अजमेर डिस्कॉम में अधीक्षण अभियंता रहे हैं. वहीं उनकी सास वंदना चौधरी राजस्थान हाईकोर्ट में वकील हैं. डिंपल अपनी जीत का बड़ा श्रेय अपने पति पवन चौधरी को देती हैं, जो खुद भी यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं और हर मोड़ पर उनके साथ खड़े रहे.

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