'गजब राजस्थान पुलिस'..DSP ने महकमे को बताए बिना अपने पास छुपाए रखा 1.5 करोड़ का सोना, यूं पोल खुली! 

Rajasthan: पाली जिले के सोजत सिटी में एक अनोखा मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस कार्रवाई के बाद पकड़े गए 1.66 किलो सोने को अपने पास रखने के आरोप में DSP अनिल सारण को निलंबित कर दिया गया है. इस मामले में उनके साथ दो कांस्टेबलों को भी निलंबित किया गया है.

DSP Anil Saran
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Rajasthan: पाली जिले के सोजत सिटी में एक अनोखा मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस कार्रवाई के बाद पकड़े गए 1.66 किलो सोने को अपने पास रखने के आरोप में DSP अनिल सारण को निलंबित कर दिया गया है. इस मामले में उनके साथ दो कांस्टेबलों को भी निलंबित किया गया है. एसपी चूनाराम जाट ने इस मामले की पूरी जानकारी पुलिस महानिदेशक (DGP) यूआर साहू को दी गई. पुलिस महानिदेशक यूआर साहू द्वारा जारी आदेश के अनुसार, निलंबन के बाद डीएसपी अनिल सारण को जयपुर मुख्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया है. 

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बिना सूचना के रखा 1.66 किलो सोना

पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ कि डीएसपी अनिल सारण ने एक ज्वेलरी कारोबारी से 1.66 किलो सोना (अनुमानित कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये) जब्त करने के बाद उसे अपने पास रख लिया. आरोप है कि DSP सारण इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को नहीं दी, बल्कि मामले में किसी भी कानूनी प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया गया.

चेन्नई से सोना लेकर बेचने आया था आरोपी

पुलिस जांच में यह सामने आया कि नागौर जिले के डेगना गांव का रहने वाला मनीष शर्मा चेन्नई में अपने रिश्तेदार की दुकान पर काम करता था. वहां से वह 1.66 किलो सोना लेकर सोजत आया था, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1.5 करोड़ रुपये थी. 12 फरवरी को डीएसपी अनिल सारण को इस बात की भनक लगी, जिसके बाद उन्होंने कांस्टेबल अशोक मीणा और जितेंद्र के साथ मिलकर मनीष को हिरासत में ले लिया. हालांकि, आरोपी से बरामद सोने को पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज करने के बजाय डीएसपी ने उसे अपने पास रख लिया और मनीष को होटल भेज दिया.

जांच शुरू होते ही डीएसपी ने सोना किया थाने में जमा

जब डीएसपी को इस मामले की जांच शुरू होने की जानकारी मिली, तो उन्होंने आनन-फानन में 5 दिन बाद यानी मंगलवार को सोने को सोजत थाने में जमा करा दिया. इसके साथ ही एक औपचारिक मामला भी दर्ज कर लिया गया और आरोपी को फरार घोषित कर दिया गया.

दोस्त के परिवार को हुआ शक, ऐसे खुली पोल

इस पूरे घटनाक्रम की पोल तब खुली, जब मनीष 9 फरवरी को सोना लेकर सोजत पहुंचा और एक होटल में ठहरा. 10 फरवरी को उसने अपने दोस्त कैलाश चौहान से मुलाकात की और उसे सोना बेचने की इच्छा जताई. हालांकि, कैलाश के परिवार को सोने की वैधता पर शक हुआ और उन्हें लगा कि यह चोरी का हो सकता है. इसी संदेह के चलते उन्होंने इस बारे में पुलिस को सूचना दे दी, जिसके बाद यह पूरा मामला सामने आया.

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