राजस्थान में RLP के मुखिया और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल और राज्य की भाजपा सरकार के बीच तल्खी बढ़ती जा रही है. जयपुर पुलिस आयुक्त कार्यालय के आदेश पर हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा में तैनात तीन निजी सुरक्षा अधिकारियों (कमांडो) को हटा दिया गया है. अचानक लिए गए इस प्रशासनिक फैसले के बाद राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं कि क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश है.
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हनुमान बेनीवाल का तीखा पलटवार
सुरक्षा घटाए जाने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए RLP प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने सरकार पर सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा, "मैंने सरकार से कभी सुरक्षा की मांग नहीं की थी. मुझे इस सरकारी सुरक्षा की कोई जरूरत ही नहीं है. पूरे राजस्थान में घूम रहे हजारों युवा मेरे साथ मुस्तैदी से खड़े हैं और वही मेरी सबसे बड़ी ढाल और सुरक्षा हैं."
आखिर क्यों मिली थी बेनीवाल को भारी सुरक्षा?
सांसद बेनीवाल ने अपनी सुरक्षा का इतिहास बताते हुए कहा कि सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा विवाद के दौरान तत्कालीन खुफिया अधिकारी संजय अग्रवाल की पहल पर उनकी सुरक्षा बढ़ाई गई थी. उस वक्त उन्हें AK-47 से लैस कमांडो दिए गए थे. उनकी सुरक्षा में कुल 8 जवान तैनात थे, जिनमें से 4 जयपुर से और 4 नागौर से थे. इनमें से दो जवान उनके आवास पर रहते थे, दो रिजर्व ड्यूटी पर और चार हमेशा उनके साथ चलते थे.
सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
बेनीवाल ने भजनलाल सरकार की घेराबंदी करते हुए सवाल उठाया कि जब उन्होंने कई बड़े माफियाओं और प्रभावशाली समूहों के खिलाफ आवाज उठाई थी, तब सुरक्षा देना जरूरी समझा गया था; तो अब अचानक इसे कम करने का क्या आधार है? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उन्हें राजनीतिक रूप से घेरने और विवादों में उलझाने की कोशिश कर रही है, लेकिन वे जनता के मुद्दों पर पीछे हटने वाले नहीं हैं.
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