राजस्थान की राजनीति के दिग्गज और आरएलपी (RLP) प्रमुख हनुमान बेनीवाल एक बार फिर अपने बेबाक बयानों के कारण चर्चा में हैं. नागौर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए बेनीवाल ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जुड़े कई अनसुने किस्से साझा किए. उन्होंने दावा किया कि उनके संघर्ष के कारण ही वसुंधरा राजे को अपनी 'जाट पहचान' स्वीकारनी पड़ी थी.
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"वसुंधरा राजे से कहलवाया- मैं जाट की बहू हूँ"
हनुमान बेनीवाल ने जनसभा में 2002-2003 के दौर को याद करते हुए कहा कि एक समय था जब वसुंधरा राजे 'चौधरी' के नारों से परहेज करती थीं. बेनीवाल ने दावा किया, "मैंने ही वसुंधरा राजे को यह कहने पर मजबूर कर दिया कि 'मैं जाटनी हूँ, मैं जाट की बहू हूँ'." उन्होंने कहा कि उनके दबाव के कारण ही वसुंधरा राजे को सरपंचों को फोन कर कार्यक्रमों में आने की मिन्नतें करनी पड़ती थीं.
जब अमित शाह का आया फोन: "हनुमान, ये क्या करवा रहे हो?"
बेनीवाल ने 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद का एक दिलचस्प वाकया सुनाया. उन्होंने बताया कि जब वे सांसद बने, तो युवाओं ने उन्हें मंत्री बनाने की मांग को लेकर बीजेपी कार्यालय और अमित शाह के घर पर इतने फोन किए कि अमित शाह खुद हैरान रह गए [02:28]. बेनीवाल के अनुसार, अमित शाह ने उन्हें फोन कर पूछा, "ये क्या फोन करवा रहे हो?" इस पर बेनीवाल ने जवाब दिया कि यह युवाओं का प्यार है.
"व्हाट्सएप वाले भी हो गए परेशान"
अपने प्रति युवाओं की दीवानगी पर बेनीवाल ने चुटकी लेते हुए कहा कि उनके पास इतने मैसेज और व्हाट्सएप आते हैं कि उनका व्हाट्सएप ही हैंग हो गया. उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि व्हाट्सएप वाले भी डर गए होंगे कि अगर हनुमान बेनीवाल का व्हाट्सएप ऐसे ही चलता रहा तो कहीं पूरा सिस्टम ही बंद न हो जाए.
किसानों की कर्जमाफी और बिजली पर बड़ा बयान
राजनीतिक हमलों के बीच बेनीवाल ने अपनी विचारधारा को भी स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य राजस्थान के किसानों की बिजली फ्री करना, टोल मुक्त राजस्थान बनाना और संपूर्ण कर्जमाफी दिलाना है. उन्होंने चौधरी देवीलाल के दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर बड़े सेठों का 30 लाख करोड़ का कर्ज माफ हो सकता है, तो किसानों का क्यों नहीं?
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