हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय (HJU) के दीक्षांत समारोह में उपमुख्यमंत्री के सामने एक छात्रा द्वारा 'बेइज्जती' किए जाने के बयान के बाद अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है. यूनिवर्सिटी की ही एक पूर्व संयुक्त सचिव और छात्रा ने इस पूरे घटनाक्रम को विश्वविद्यालय प्रशासन और अतिथियों को बदनाम करने का एक 'सुनियोजित प्रोपोगेंडा' करार दिया है.
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क्या है पूरा विवाद और बैक स्टोरी?
दरअसल, दीक्षांत समारोह के दौरान एक छात्रा ने मंच पर डिग्री लेते समय कहा था कि "बेइज्जती करके इज्जत देने के लिए शुक्रिया." लेकिन अब इस मामले की बैक स्टोरी सामने आई है. एचजेयू की पूर्व संयुक्त सचिव के अनुसार, कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रसिद्ध कविता "रगरग हिंदू मेरा परिचय" का जिक्र किया था. इस कविता में चित्तौड़ के जौहर और ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेख है, जिससे वहां मौजूद एक खास विचारधारा से जुड़े कुछ लोगों को कथित तौर पर 'बेइज्जती' महसूस होने लगी.
'लाल सलाम' के नारों और प्रोपोगेंडा का आरोप
डिप्टी सीएम के बचाव में उतरी छात्रा का आरोप है कि जो लोग इस विवाद को तूल दे रहे हैं, वे राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि ये वही लोग हैं जिन्होंने छात्र संघ चुनावों में जीत के बाद 'लाल सलाम जिंदाबाद' के नारे लगाए थे. उनके अनुसार, यह पूरी घटना पहले से तय थी ताकि एक खास नैरेटिव सेट किया जा सके और विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके.
क्या डिग्री न देना नियमों के खिलाफ था?
विवाद का एक मुख्य बिंदु यह था कि सभी छात्रों को मुख्य अतिथि के हाथों डिग्री नहीं दी गई. इस पर स्पष्टीकरण देते हुए पूर्व छात्रा ने कहा कि किसी भी दीक्षांत समारोह में सभी विद्यार्थियों को मुख्य अतिथि के हाथों डिग्री देना न तो संभव है और न ही नियमों में अनिवार्य है. इनविटेशन कार्ड में भी ऐसा कहीं नहीं लिखा था. उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर माहौल को बिगाड़ने के लिए 'बेइज्जती' का कार्ड खेला गया है.
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