पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी का मुद्दा देशभर में गरमाया हुआ है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे रोकने के लिए 2024 में सख्त कानून बन चुका है. उस समय संसद में कोटा की 18 साल की JEE छात्रा की आत्महत्या का भी जिक्र हुआ था. लंबी चर्चा के बाद संसद ने एंटी-पेपर लीक कानून को मंजूरी दी थी. कानून में परीक्षा माफिया और संगठित गिरोहों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया था.
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अब छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार 2024 में बने एंटी-पेपर लीक कानून को और सख्त करने की तैयारी कर रही है. लेकिन इस कानून के बनने की कहानी भी काफी अहम है. फरवरी 2024 में जब इसे संसद में लाया गया था, तब कोटा में JEE की तैयारी कर रही 18 साल की छात्रा निहारिका सोलंकी की आत्महत्या का मामला भी उठा था. सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ने पेपर लीक को युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया था.
लोकसभा चुनाव से पहले आया था बिल
2024 के लोकसभा चुनाव से करीब ढाई महीने पहले केंद्र सरकार यह विधेयक संसद में लाई थी. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने 6 फरवरी 2024 को इसे लोकसभा में पेश किया.
बहस के दौरान जितेंद्र सिंह ने राजस्थान के कोटा में JEE की तैयारी कर रही 18 वर्षीय निहारिका सोलंकी की आत्महत्या का ज्रिक किया था. निहारिका ने परीक्षा से 2 दिन पहले आत्महत्या कर ली थी. मंत्री ने संसद में उसके सुसाइड नोट का भी जिक्र किया था.
छात्रों को कानून के दायरे से रखा बाहर
संसद में उसके सुसाइड नोट की पंक्तियां पढ़कर सुनाते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि चंद स्वार्थी तत्वों और माफिया की वजह से देश के प्रतिभावान युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ जाता है. उन्होंने साफ किया था कि इस कानून के तहत परीक्षार्थी या छात्र सजा के दायरे में नहीं आएंगे. बल्कि इस कानून के दायरे में पेपर लीक कराने वाले माफिया और भ्रष्ट अधिकारियों को सख्त से सख्त सजा दी जाएगी.
क्यों पड़ी नए कानून की जरूरत?
देश में अलग-अलग भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं के पेपर लीक होने के मामले सामने आते रहे हैं. कई जगह असली कैंडिडेट की जगह दूसरे व्यक्ति को परीक्षा में बैठाने और परीक्षा केंद्रों पर गड़बड़ी के मामले भी पकड़े गए.
ऐसी घटनाओं से ईमानदारी से तैयारी करने वाले छात्रों को नुकसान होता है. इसी वजह से केंद्र सरकार ने परीक्षा में संगठित तरीके से होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए कानून को कड़ा बनाने का फैसला किया.
छात्रों को लेकर क्या है कानून में?
2024 में आए कानून में 5 से 10 वर्ष कारावास और कम से कम 1 करोड़ रुपये का जुर्माना का प्रावधान है, लेकिन शुक्रवार को कैबिनेट में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन करने वाले विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है.
जिसमें सजा के प्रावधान को और कड़ा किया जा रहा है. अब परीक्षा संबंधी अपराधों के लिए 10 वर्ष तक कारावास और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है.
विपक्ष ने भी किया था बिल का समर्थन
2024 के कानून की खास बात यह रही कि संसद में सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष के कई सांसदों ने भी इसका समर्थन किया.
कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने बिल का समर्थन करते हुए परीक्षाओं को सुरक्षित बनाने के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया था.
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने सवाल उठाया था कि कानून में गड़बड़ी करने वालों के लिए सजा तो है लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाओं को होने से पहले रोकने के लिए भी मजबूत व्यवस्था होनी चाहिए.
DMK सांसद डीएम कथिर आनंद ने भी कहा था कि केवल जेल और जुर्माना काफी नहीं है. ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए जिससे परीक्षा में गड़बड़ी ही न हो सके.
सुप्रिया सुले ने भी उठाया था सवाल
NCP (SP) सांसद सुप्रिया सुले ने बिल का समर्थन किया था. हालांकि उन्होंने सरकार से पूछा था कि नए कानून से मौजूदा व्यवस्था में क्या बड़ा बदलाव आएगा.
TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने भी कहा था कि कानून बनाने के साथ उसे सही तरीके से लागू करना जरूरी है.
सरकार की ओर से कहा गया कि परीक्षा में होने वाली अलग-अलग तरह की गड़बड़ियों को साफ तौर पर अपराध की श्रेणी में लाने के लिए विशेष कानून की जरूरत थी.
राज्यसभा में भी पेपर लीक पर हुई चर्चा
लोकसभा से पास होने के बाद बिल राज्यसभा पहुंचा. यहां भी पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई.कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने बिल का समर्थन किया था, लेकिन मध्य प्रदेश के व्यापम मामले का जिक्र करते हुए परीक्षा व्यवस्था में होने वाली गड़बड़ियों पर सवाल उठाए था.
तत्कालीन AAP सांसद संदीप पाठक ने भी पेपर लीक के मामलों का मुद्दा उठाया था और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी. इसके बाद राज्यसभा से भी बिल को मंजूरी मिल गई.
किन परीक्षाओं पर लागू होता है कानून?
यह कानून केंद्र सरकार की प्रमुख सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने के लिए बनाया गया है. इसके दायरे में UPSC, SSC,RRB और NTA जैसी संस्थाओं की ओर से आयोजित कई परीक्षाएं आती हैं.
संसद से पास होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर यह कानून बना. इसे 21 जून 2024 से देश में लागू किया गया.
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