KK Bishnoi IPS and IPS Anshika Verma wedding: आज के दौर में जहां हर कोई ऊंचे पैकेज और ऐशो-आराम की जिंदगी के पीछे भागता है, वहीं कुछ ऐसे भी जुनूनी लोग होते हैं जिनके लिए देश सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है. आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसी ही जोड़ी की, जिन्होंने न सिर्फ अपनी मेहनत से खाकी वर्दी का मान बढ़ाया, बल्कि अब अपनी लाइफ की एक नई पारी शुरू करने जा रहे हैं. ये कहानी है IPS कृष्ण कुमार बिश्नोई (KK Bishnoi) और IPS अंशिका वर्मा की. केके बिश्नोई ने IPS बनने से पहले संयुक्त राष्ट्र (UN) की 30 लाख रुपये सालाना की नौकरी को सिर्फ इसलिए ठुकरा दिया ताकि वे अपने देश की सेवा कर सकें. दूसरी तरफ हैं 'लेडी सिंघम' के नाम से मशहूर उत्तर प्रदेश कैडर की तेज-तर्रार ऑफिसर अंशिका वर्मा, जिन्होंने अपनी वीरांगना यूनिट के जरिए महिलाओं की सुरक्षा की नई मिसाल पेश की है.
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संभल के एसपी रहते हुए केके बिश्नोई ने जब ढाई हजार से ज्यादा अपराधियों पर कड़ा एक्शन लिया, तो खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उनके कायल हो गए. अब दो अलग-अलग राज्यों और अलग सामाजिक पृष्ठभूमि से आने वाले ये दोनों अफसर 29 मार्च को शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं. इनकी यह शादी सिर्फ दो दिलों का मिलन नहीं, बल्कि मेहनत, ईमानदारी और सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ने की एक प्रेरणादायक दास्तान है. कैसे शुरू हुई इन दो जांबाज अफसरों की लव स्टोरी? कैसे इन्होंने अपने करियर और प्यार के बीच तालमेल बिठाया और क्यों इनकी जोड़ी आज पूरे समाज के लिए एक मिसाल बन गई है? चर्चित चेहरा के आज के इस खबर में हम आपको बताएंगे IPS केके बिश्नोई और IPS अंशिका वर्मा के संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी.
ड्यूटी के साथ परवान चढ़ा प्यार, यहां हुई पहली मुलाकात
आज जब समाज में जाति और परंपराओं की दीवारें रिश्तों के बीच आ खड़ी होती हैं, तब दो IPS अधिकारियों की शादी समाज को एक पॉजिटिव मैसेज देने का काम कर रही है. कुल मिलाकर दो IPS की लव स्टोरी चर्चा का विषय बनी हुई है. केके बिश्नोई और अंशिका वर्मा की मुलाकात उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुई थी. उस समय केके बिश्नोई गोरखपुर में एसपी सिटी के पद पर तैनात थे और अंशिका वर्मा वहां एएसपी के तौर पर काम कर रही थीं. ड्यूटी के दौरान दोनों को कई बड़े और चुनौतीपूर्ण मामलों को संभालना पड़ता था. काम करते-करते दोनों ने एक-दूसरे के तौर-तरीके और सोच को करीब से जाना. धीरे-धीरे उनके बीच दोस्ती हुई और फिर यह दोस्ती प्यार में बदल गई. काफी समय तक एक-दूसरे को समझने के बाद दोनों ने अपने परिवारों से बात की. परिवार की सहमति मिलने के बाद अब दोनों शादी करने जा रहे हैं.
रेगिस्तान के लाल की कृष्ण कुमार बिश्नोई की कहानी
आईपीएस कृष्ण कुमार बिश्नोई मूल रूप से राजस्थान के बाड़मेर जिले के रहने वाले हैं. साधारण परिवार से आने वाले बिश्नोई ने अपनी मेहनत और लगन से बड़ा मुकाम हासिल किया है. उन्होंने कड़ी मेहनत करके यूपीएससी परीक्षा पास की और 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी बने. पढ़ाई में भी वो काफी शानदार रहे, उन्हें फ्रांस सरकार की स्कॉलरशिप मिली थी, जिसके जरिए उन्होंने पेरिस स्कूल ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स से इंटरनेशनल सिक्योरिटी में मास्टर डिग्री हासिल की. देश के प्रति लगन भी ऐसी कि आईपीएस बनने से पहले वह संयुक्त राष्ट्र में लगभग 30 लाख रुपये सालाना पैकेज छोड़ा और देश सेवा का रास्ता चुना. आईपीएस बनने के बाद केके बिश्नोई ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में काम किया और करीब 29 महीने तक गोरखपुर में एसपी सिटी रहे. इसके बाद 2024 में उन्हें संभल जिले का एसपी बनाया गया, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश का काफी संवेदनशील जिला माना जाता है. संभल में तैनाती के दौरान उन्होंने कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई सख्त कदम उठाए.
संभल हिंसा का दमन और 100 करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश
24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान संभल में हिंसा भड़क गई थी. स्थिति काफी गंभीर हो गई थी लेकिन केके बिश्नोई ने सिर्फ दो घंटे के अंदर ही हालात पर काबू पा लिया. उन्होंने सख्त कार्रवाई करते हुए सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क समेत करीब ढाई हजार अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया. इसके अलावा उन्होंने बिजली चोरी के खिलाफ भी बड़ा अभियान चलाया. केके बिश्नोई ने संभल में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के बीमा घोटाले का भी पर्दाफाश किया. इस मामले में उन्होंने 69 से ज्यादा माफियाओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा. उन्होंने संभल हिंसा के मास्टरमाइंड माने जाने वाले शारिक साठा गैंग पर भी बड़ी कार्रवाई की और गैंग के कई लोगों को गिरफ्तार किया. उनकी बहादुरी और सख्त प्रशासनिक नेतृत्व के लिए उन्हें 2025 में मुख्यमंत्री मेडल से भी सम्मानित किया गया. केके बिश्नोई के माता-पिता गंगा देवी और सुजाना राम बिश्नोई अपने बेटे की उपलब्धियों पर गर्व करते हैं. अब उनका परिवार अपनी बहू के रूप में आईपीएस अधिकारी अंशिका वर्मा का स्वागत करने के लिए तैयार है.
बिना कोचिंग के बनीं अफसर जानें अंशिका वर्मा की कहानी
बात करें आईपीएस अंशिका वर्मा की तो वो उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की रहने वाली हैं और 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं, जो इस समय बरेली में एसपी साउथ की पोस्ट पर हैं. उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और उसके बाद सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की. खास बात यह है कि उन्होंने बिना किसी कोचिंग के खुद पढ़ाई करके यूपीएससी परीक्षा पास की. बरेली में तैनाती के दौरान अंशिका वर्मा ने कई अच्छे काम किए हैं. 2025 में उन्होंने उत्तर प्रदेश की पहली वीरांगना यूनिट बनाई. इस यूनिट में महिला कमांडो को ताइक्वांडो और दंगों से निपटने की ट्रेनिंग दी जाती है. इसका मकसद महिलाओं के खिलाफ अपराध को रोकना और महिला सुरक्षा को मजबूत करना है. देखा जाए तो अंशिका वर्मा ने बरेली में कई बड़े आपराधिक मामलों को जल्दी सुलझाया. उन्होंने एनडीपीएस, हत्या और कई अन्य गंभीर मामलों में अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा. इसके अलावा उन्होंने एक मदरसे में चल रहे कथित लव जिहाद और धर्म परिवर्तन के बड़े रैकेट का भी खुलासा किया, जिसके बाद यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा में आ गया. महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अच्छे काम के लिए उन्हें 2025 में दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के कार्यक्रम में वूमेन आइकन अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है.
जोधपुर में लगेगा दिग्गजों का जमावड़ा
दोनों आईपीएस अधिकारियों की शादी की रस्में 27 मार्च से राजस्थान के बाड़मेर में शुरू होंगी. 29 मार्च को जोधपुर में शादी होगी और 30 मार्च को एक बड़ी रिसेप्शन रखा जाएगा. परिवार के अनुसार इस कार्यक्रम में करीब 10 से 15 हजार लोग शामिल हो सकते हैं. कई बड़े प्रशासनिक अधिकारी, राजनीतिक नेता और सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोग भी इस समारोह में पहुंच सकते हैं. मशहूर गायक कैलाश खेर से लेकर कांग्रेस नेता सचिन पायलट और वैभव गहलोत समेत कई बड़े नेता समारोह में शामिल हो सकते हैं.
रूढ़ियों को तोड़ती दो जांबाज अफसरों की जोड़ी
केके बिश्नोई और अंशिका वर्मा की शादी सिर्फ एक निजी खुशी नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए भी एक प्रेरणा है. दोनों ने अपनी मेहनत और काबिलियत से देश की सबसे बड़ी सेवा में जगह बनाई और अब जीवन की नई शुरुआत करने जा रहे हैं. अब यह दोनों जांबाज़ आईपीएस अधिकारी न सिर्फ अपराध के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे, बल्कि जीवन की राह भी साथ-साथ तय करेंगे. मतलब इतना तो साफ है कि अगर सोच अच्छी हो और आपसी समझ हो, तो समाज की पुरानी परंपराएं और भेदभाव की दीवारें भी धीरे-धीरे खत्म हो सकती हैं.
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