Jagdeep Dhankhar Resignation Statement: पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से अचानक दिए इस्तीफे को लेकर पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है. राजस्थान के सादुलपुर पहुंचे धनखड़ ने कहा कि उनके पद छोड़ने का फैसला पूरी तरह से स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए था. उन्होंने कहा कि शास्त्रों में भी स्वास्थ्य को सबसे ऊपर बताया गया है और उन्होंने उसी मार्ग का अनुसरण किया है. उनके इस बयान के बाद सियासी हलकों में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है.
ADVERTISEMENT
दरअसल, जगदीप धनखड़ चूरू जिले के सादुलपुर पहुंचे. वहां वह पूर्व सांसद रामसिंह कस्वां का हालचाल जानने पहुंचे थे. इस दौरान वह भावुक नजर आए. इसी दौरान उन्होंने 2 ऐसे बयान दिए, जिनकी खूब चर्चा हो रही है. इस दौरान उन्होंने कहा कि कस्वां परिवार के साथ उनका रिश्ता राजनीति से ऊपर है. जब भी उनके स्वास्थ्य की चर्चा हुई, रामसिंह कस्वां सबसे पहले चिंता जताने वालों में रहे. धनखड़ ने इसे अपने ऊपर ''कर्ज'' बताया और कहा कि वह इस स्नेह का ऋण चुकाने सादुलपुर की मिट्टी पर आए हैं.
'यह नहीं कहा कि मैं बीमार हूं': धनखड़
जगदीप धनखड़ ने कहा, "मैंने कभी स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही नहीं बरती. जब मैंने पद छोड़ने की बात कही, तो यह नहीं कहा कि मैं बीमार हूं. मैंने सिर्फ इतना कहा कि स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रहा हूं, जैसा कि हमारे शास्त्रों में भी लिखा है." अब उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में कई मायनों में देखा जा रहा है.
वीडियो देखिए
इसके अलावा, धनखड़ का एक और वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह कहते दिख रहे है कि दाढ़ी वालों को देखते ही मैं डर जाता हूं.
'दाढ़ी वालों को देखते ही मैं डर जाता हूं': धनखड़
दरअसल, जब वह पूर्व सांसद रामसिंग कस्वां का हालचाल जानने के बाद उनके आवास से निकल रहे थे तो इस दौरान हंसी मजाक में उन्होंने यह बयान दिया. इस दौरान एक व्यक्ति से बातचीत करते हुए धनखड़ ने मजाकिया लहजे में कहा, "दाढ़ी वालों को देखते ही मैं डर जाता हूं. मेरा ओएसडी भी अपनी दाढ़ी से मुझे डराता है." यह टिप्पणी उन्होंने हंसी-मजाक में कही, लेकिन इसका वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. लोग इसे अलग-अलग संदर्भों में साझा कर अपने-अपने कयास लगा रहे हैं.
वीडियो देखिए, क्या कहा
21 जुलाई 2025 को दिया था इस्तीफा
21 जुलाई 2025 को धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था. मानसून सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना त्यागपत्र सौंप दिया था.
उनके इस फैसले पर विपक्षी दलों ने कई राजनीतिक सवाल खड़े किए थे, क्योंकि इस्तीफे से महज 12 दिन पहले जेएनयू के एक कार्यक्रम में उन्होंने 2027 तक पद पर रहने की बात कही थी.
2022 में संभाला था उपराष्ट्रपति पद
जगदीप धनखड़ ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली थी. उनका कार्यकाल 2027 तक तय था. लेकिन जुलाई 2025 में अचानक पद छोड़ने से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई थी.
जगदीप धनखड़ का सियासी सफर
राजस्थान के झुंझनू जिले के किठाना गांव में जन्मे धनखड़ ने प्रारंभिक शिक्षा चित्तौड़गढ़ के सैनिक स्कूल से प्राप्त की है. इसके बाद उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की.
वह राजस्थान हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर चुके हैं. राजनीतिक करियर की शुरुआत उन्होंने कांग्रेस से की. पीवी नरसिम्हा राव सरकार में सांसद रहे. बाद में उन्होंने बीजेपी का दामन थामा.
चंद्रशेखर सरकार में वह केंद्रीय मंत्री भी रहे. 2019 में उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया. 2022 में वह देश के उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए. उनका इस्तीफा अब भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है.
ADVERTISEMENT

