उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, जहां आपराधिक लापरवाही के कारण 15 मासूम बच्चों की जान चली गई. लेकिन इस भयानक ट्रेजडी से राजस्थान की राजधानी जयपुर के कोचिंग संस्थानों ने कोई सबक नहीं लिया है. जयपुर का गोपालपुरा इलाका, जिसे शहर का प्रमुख कोचिंग हब माना जाता है, वहां की स्थिति लखनऊ से बिल्कुल भी अलग नहीं है.
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राजस्थान तक की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि गोपालपुरा रोड पर स्थित सीएलसी (CLC) जैसे बड़े संस्थान, जहां नीट (NEET) और आईआईटी-जेईई (IIT-JEE) की तैयारी के लिए रोजाना हजारों बच्चे आते हैं, वहां सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. इस इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर तमाम दुकानें और कमर्शियल एक्टिविटीज चल रही हैं, जबकि पहली मंजिल पर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है. अगर भगवान न करे जमीनी स्तर पर कोई हादसा या शॉर्ट सर्किट होता है, तो ऊपरी मंजिल से बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना (इवाकुएट करना) नामुमकिन हो जाएगा.
सिर्फ सीएलसी ही नहीं बल्कि इसी लाइन में स्थित बोधितत्वा एकेडमी, टारगेट प्लस (जहां रीट, सीईटी और पटवार जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी होती है) और कलाम एकेडमी की स्थिति भी हूबहू ऐसी ही है. इन सभी इमारतों में नीचे खाने-पीने और अन्य व्यावसायिक दुकानें हैं और ऊपर धड़ल्ले से कोचिंग सेंटर चल रहे हैं.
जब ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान वहां पढ़ रहे छात्रों से बात की गई, तो सुरक्षा दावों की पोल खुल गई. कुछ नए छात्रों ने साफ कहा कि उन्हें किसी भी आपातकालीन स्थिति या ट्रेजडी से निपटने के लिए कोई गाइडलाइन या जानकारी नहीं दी गई है. वहीं कुछ संस्थानों में महज दिखावे के लिए फायर सिलेंडर टांग दिए गए हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्थानीय प्रशासन और नगर निगम समय-समय पर इन बिल्डिंग्स की मॉनिटरिंग क्यों नहीं करता? क्या प्रशासन जयपुर में भी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? अगर समय रहते इन कोचिंग सेंटर्स पर कड़ा एक्शन नहीं लिया गया, तो गोपालपुरा में भी लखनऊ जैसी क्रिमिनल नेग्लिजेंस किसी बड़ी जनहानि का कारण बन सकती है.
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