राजस्थान की राजधानी जयपुर में विधानसभा के बाहर माहौल बेहद गरमा गया है. प्रदेश के सरकारी स्कूलों की खस्ताहाल व्यवस्था और इस पर सरकार द्वारा जारी किए गए नए आदेशों के खिलाफ कांग्रेस के विधायकों ने विधानसभा के मुख्य द्वार पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया.
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विधानसभा के मुख्य गेट पर धरने पर बैठे विधायक
राजस्थान विधानसभा के मुख्य गेट पर ताला लगाए जाने और अंदर जाने से रोके जाने के बाद कांग्रेस विधायक हाथों में तख्तियां लेकर वहीं धरने पर बैठ गए. विधायकों का कहना है कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाना चाहती है और उन्हें विधानसभा के अंदर जाने से रोक रही है.
सचिन पायलट का सरकार और शिक्षा मंत्री पर तीखा हमला
प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने सरकार के रवैये पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा:
"सरकार ना तो इस गंभीर मुद्दे को उठाने देना चाहती है और ना ही अपनी गलती स्वीकार कर रही है. जब पूरे प्रदेश में बारिश के कारण जर्जर स्कूलों की छतें गिर रही हैं और बच्चों की जान जा रही है, तब व्यवस्था सुधारने के बजाय सरकार ने तुगलकी फरमान जारी कर दिया है."
पायलट ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री और सरकार ने ऐसा आदेश जारी किया है कि कोई भी स्कूलों की फोटो नहीं खींच सकता, रील नहीं बना सकता और मीडिया को वहां जाने पर पाबंदी लगा दी गई है.
हाईकोर्ट की लताड़ के बाद भी सरकार खामोश
सचिन पायलट ने कहा कि प्रदेश के कई जिलों में बच्चे जर्जर भवनों में पढ़ने को मजबूर हैं. इस मामले में हाईकोर्ट तक ने सरकार को लताड़ लगाई है और आवश्यक निर्देश दिए हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है.
स्कूलों के घटिया निर्माण और रखरखाव में लापरवाही को लेकर कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार इस तानाशाही रवैये को वापस नहीं लेती और स्कूलों की स्थिति सुधारने पर ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक विपक्ष इस मुद्दे को मजबूती से उठाता रहेगा.
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